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Pakur (Jaydev Kumar) : ढोल-नगाड़ों की थाप, करमा पूजा के गीत और मेले की जगमग रोशनी… पाकुड़ के हिरणपुर का नयाग्राम त्योहार के रंग में रंगा था। 13 साल का मासूम दीनानाथ सिंह भी बाकी बच्चों की तरह उसी भीड़ का हिस्सा था, अपनी ही धुन में मगन। उसे कहां खबर थी कि जिस भीड़ में वह खुशियां तलाश रहा है, वहीं उसका अपना कोई साए की तरह उसकी मौत का जाल बुन चुका है। जमीन के चंद टुकड़ों और घरेलू रंजिश की ऐसी आग, जिसने एक हंसते-खेलते बच्चे की जिंदगी को बेरहमी से निगल लिया।
मेले की चहल-पहल के बीच से वो खामोश गायब होना
पूजा की रात जब गांव वाले जश्न मना रहे थे, तब दीनानाथ अचानक लापता हो गया। रात गहराने लगी, लेकिन वह घर नहीं लौटा। मां की आंखें दरवाजे पर टिकी रहीं और पिता की बेचैनी हर गुजरते मिनट के साथ बढ़ती गई। रिश्तेदारियों में फोन खड़खड़ाए गए, रात के सन्नाटे में टॉर्च की रोशनियों से गलियों की खाक छानी गई, मगर बच्चे का कोई अता-पता नहीं चला। अगली सुबह तक गांव में सन्नाटा पसर चुका था और अनहोनी की काली छाया परिवार के चेहरों पर साफ दिखने लगी थी। लाचार परिजनों ने आखिरकार थाने की चौखट पर जाकर गुमशुदगी की गुहार लगाई।
टैंपू में काल का सफर और लोहे का वो भारी जैक
मामला एक 13 साल के बच्चे से जुड़ा था, इसलिए पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। एसपी अनुदीप सिंह के निर्देश पर तुरंत एसडीपीओ कुमार गौरव की अगुआई में एक SIT बनाई गई। टीम ने जब गांव के पुराने झगड़ों और परिवार के रिश्तों की पड़ताल शुरू की, तो जमीन के एक पुराने विवाद की कड़ी निकलकर सामने आई। शक की सुई गांव के ही 40 साल के मनोज कुमार पर जाकर टिक गई।
टेक्निकल सेल और मुखबिरों से इनपुट जुटाते हुए पुलिस ने जाल बिछाया और हिरणपुर बस स्टैंड से भागने की फिराक में खड़े मनोज को धर दबोचा। पुलिस के कड़े तेवरों के सामने आरोपी ज्यादा देर टिक नहीं सका। उसने जो खौफनाक कहानी बयां की, उसने खाकी को भी अंदर तक हिला दिया।

आरोपी ने कबूल किया कि उसने जमीन की रंजिश का बदला लेने के लिए मेले से मासूम को अपनी बातों में उलझाया और अपने बजाज मैक्सिमा टैंपू में बैठा लिया। गाड़ी जब सुनसान इलाके की तरफ बढ़ी, तो बच्चे को खतरे का अहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आरोपी ने गाड़ी में रखे लोहे के भारी जैक से मासूम पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।
नदी की तलहटी से मिला सुराग, झाड़ियों में दफन हुआ सच
वारदात को अंजाम देने के बाद कातिल के सिर पर लाश को ठिकाने लगाने का भूत सवार था। वह लहूलुहान बच्चे को लेकर पाकुड़ नगर थाना इलाके में देवपुर और मंगलापाड़ा के बीच बहने वाली नदी के किनारे पहुंचा। वहां उसने शव को झाड़ियों और पत्थरों के बीच छिपा दिया ताकि किसी की नजर न पड़े।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस टीम आरोपी को उसी जगह ले गई। नदी किनारे बिखरे खून के सूखे धब्बे और झाड़ियों में पड़ा मासूम का बेजान जिस्म इस बात की गवाही दे रहा था कि मरने से पहले उस बच्चे ने बचने की कितनी मिन्नतें की होंगी। पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमॉर्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा और मौके से वारदात में इस्तेमाल टैंपू व खूनी जैक जब्त कर लिया।
सलाखों के पीछे कातिल, गांव में गूंजता सवाल
पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर हिरणपुर थाना कांड संख्या 71/26 का पर्दाफाश कर कातिल को सलाखों के पीछे भेज दिया। लिट्टीपाड़ा, हिरणपुर और सिमलोंग ओपी की टीमों की मुस्तैदी से केस सुलझ तो गया, लेकिन नयाग्राम में पसरा मातम चीख-चीखकर एक ही सवाल पूछ रहा है कि जमीन के टुकड़े के लफड़े में एक मासूम का क्या कसूर था? जिस आंगन में कल तक बच्चे की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ मां की सिसकियां और पिता की पथराई आंखें बची हैं।
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