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Ranchi : झारखंड अब सिर्फ कोयला, लोहा और खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार की कोशिश है कि राज्य उद्योग, तकनीक और पर्यटन के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाए। इसी दिशा में गुरुवार को बड़ा कदम उठाया गया। राष्ट्रीय हितधारक परामर्श के समापन सत्र में राज्य सरकार ने 99,639 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े 14 बड़े एमओयू पर हस्ताक्षर किए। अगर ये परियोजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं तो आने वाले वर्षों में झारखंड की अर्थव्यवस्था, रोजगार और औद्योगिक विकास की तस्वीर काफी बदल सकती है।
इतनी बड़ी निवेश राशि एक साथ आने को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि मान रही है। इसका असर सिर्फ बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे कारोबार, स्थानीय कंपनियों और हजारों युवाओं के रोजगार पर भी देखने को मिल सकता है।
70 हजार करोड़ रुपये का दांव अकेले जिंदल समूह ने लगाया
सबसे ज्यादा चर्चा जिंदल समूह के निवेश की रही। जिंदल स्टील लिमिटेड ने झारखंड में 40 हजार करोड़ रुपये निवेश करने का समझौता किया है। वहीं जिंदल न्यूक्लियर पावर प्राइवेट लिमिटेड ने 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है। यानी दोनों कंपनियां मिलकर राज्य में 70 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेंगी। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से नए उद्योग स्थापित होंगे, सहायक इकाइयां विकसित होंगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। इससे राज्य की औद्योगिक गतिविधियां भी तेज होंगी।
अब सरकारी सेवाओं में भी तकनीक की ताकत दिखेगी
सरकार सिर्फ फैक्ट्रियां लगाने तक नहीं रुकना चाहती। लोगों तक सरकारी सेवाएं आसान और तेज तरीके से पहुंचें, इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग ने गूगल क्लाउड और वाधवानी ग्रुप के साथ समझौते किए हैं। इन साझेदारियों के जरिए डिजिटल ढांचे को मजबूत किया जाएगा। सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और ज्यादा प्रभावी बनाने के साथ प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में भी काम होगा। आने वाले समय में आम लोगों को कई सेवाएं पहले से ज्यादा आसान तरीके से मिल सकेंगी।
पर्यटन को भी मिलेगी नई उड़ान
झारखंड की खूबसूरत वादियां, झरने और जंगल तो पहले से लोगों को आकर्षित करते हैं, लेकिन अब सरकार राज्य की खनन विरासत को भी पर्यटन से जोड़ना चाहती है। इसी सोच के तहत टाटा मोटर्स के साथ माइनिंग टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया गया है। इसके अलावा ईजमाईट्रिप प्लानर्स के साथ साझेदारी कर झारखंड के पर्यटन स्थलों को देशभर में बेहतर तरीके से प्रचारित किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय लोगों की आय के नए स्रोत भी बनेंगे।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुए सभी समझौते
ये सभी समझौते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में हुए। कार्यक्रम में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव, सुदिव्य कुमार और इरफान अंसारी भी मौजूद रहे। मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, सूचना प्रौद्योगिकी सचिव पूजा सिंघल, उद्योग सचिव अरवा राजकमल और पर्यटन सचिव मुकेश कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। विभागीय सचिवों और कंपनियों के अधिकृत प्रतिनिधियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
सरकार का संदेश साफ, झारखंड अब निवेश के लिए तैयार
इन समझौतों के जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि झारखंड अब निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार कर चुका है। अगर घोषित परियोजनाएं तय समय पर शुरू होती हैं तो राज्य में उद्योगों का विस्तार होगा, रोजगार बढ़ेगा, तकनीक आधारित सेवाएं मजबूत होंगी और पर्यटन को भी नई पहचान मिलेगी। कुल मिलाकर 99,639 करोड़ रुपये के इन निवेश समझौतों को झारखंड के विकास की दिशा में एक बड़ी और महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है।
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