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Patna: सावन का महीना आते ही “बोल बम” के जयघोष से पूरा बिहार गूंज उठता है। लाखों शिवभक्त सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम तक की कठिन पैदल यात्रा पर निकलते हैं। कई श्रद्धालु नंगे पैर चलते हैं, कई दिन-रात का सफर तय करते हैं। रास्ते में तेज धूप, उमस, बारिश, थकान और भीड़ जैसी कई चुनौतियां होती हैं। ऐसे में अगर किसी कांवरिये की तबीयत बिगड़ जाए तो सबसे बड़ी जरूरत होती है तुरंत इलाज की। यही वजह है कि इस बार बिहार सरकार ने श्रावणी मेला 2026 में स्वास्थ्य सुविधाओं को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत बनाने का फैसला किया है।
स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा इंतजाम करने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि श्रद्धालुओं को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। कांवरिया पथ पर हर दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। यहां डॉक्टर, एएनएम, पैरामेडिकल कर्मी, जरूरी दवाएं, ऑक्सीजन, बेड और प्राथमिक उपचार की पूरी व्यवस्था रहेगी। जरूरत पड़ने पर मरीज को तुरंत बड़े अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALSA) और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLSA) एम्बुलेंस भी तैनात रहेंगी।
अब सिर्फ यात्रा नहीं, रास्ते भर मिलेगा इलाज का भरोसा
गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के सभागार में स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत और विभाग के सचिव श्री कुमार रवि ने श्रावणी मेला की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मेला से जुड़े 14 जिलों के सिविल सर्जनों ने अपने-अपने इलाके की तैयारियों की जानकारी दी। अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया कि श्रद्धालुओं को इलाज के लिए इंतजार नहीं करना पड़े और हर स्वास्थ्य शिविर पूरी क्षमता के साथ काम करे।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि श्रावणी मेला बिहार का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। लाखों लोग आस्था के साथ इस यात्रा में शामिल होते हैं। ऐसे में विभाग की जिम्मेदारी है कि हर श्रद्धालु को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और हर व्यवस्था पहले से तैयार रखी जाए।
102 पर एम्बुलेंस, 104 पर मिलेगी स्वास्थ्य संबंधी हर मदद
मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने दो अहम टोल फ्री नंबर भी सक्रिय रखने का फैसला किया है। किसी को एम्बुलेंस की जरूरत पड़ने पर वह 102 पर कॉल कर सकेगा। वहीं स्वास्थ्य संबंधी सलाह, जानकारी या किसी तरह की सहायता के लिए 104 हेल्पलाइन चौबीसों घंटे उपलब्ध रहेगी।
सभी सरकारी अस्पतालों और रेफरल सेंटरों को भी अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शिविरों से भेजे गए मरीजों का तुरंत इलाज शुरू किया जा सके।
सर्पदंश से लेकर फूड पॉइजनिंग तक, हर चुनौती से निपटने की तैयारी
श्रावणी मेला के दौरान हजारों श्रद्धालु खुले रास्तों से होकर गुजरते हैं। ऐसे में सर्पदंश, दूषित भोजन, पानी से होने वाली बीमारियां, डिहाइड्रेशन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका भी रहती है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को एंटी स्नेक वेनम सीरम (ASVS) और एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) का पर्याप्त भंडारण रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जरूरी दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
खाने-पीने की दुकानों पर भी रहेगी नजर
मेले में लाखों लोग भोजन और नाश्ता करते हैं। ऐसे में साफ-सफाई भी बड़ी चुनौती होती है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेला क्षेत्र में दुकान लगाने वाले वेंडरों को पहले से प्रशिक्षित किया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिल सके। इसके साथ ही मेला क्षेत्र में साफ-सफाई पर लगातार निगरानी रखने को भी कहा गया है।
हर शिविर पर मिलेंगे डॉक्टरों के नंबर
इस बार स्वास्थ्य विभाग सिर्फ इलाज तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों को जागरूक भी करेगा। मेला क्षेत्र में जगह-जगह पोस्टर, बैनर और होर्डिंग लगाए जाएंगे। इन पर स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सलाह के साथ वहां तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के संपर्क नंबर भी लिखे होंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर श्रद्धालु सीधे उनसे संपर्क कर सकें।
14 जिलों को मिली खास जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग ने बांका, भागलपुर, जमुई, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, सारण, वैशाली, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, लखीसराय, मधुबनी, समस्तीपुर और सिवान के सिविल सर्जनों को अपने-अपने क्षेत्रों की तैयारियों की विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। खास तौर पर सुल्तानगंज से देवघर तक के कांवरिया पथ पर स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी करने को कहा गया है।
सभी जिलों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि कितने स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे, कितने डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तैनात रहेंगे, दवाओं का कितना भंडारण होगा और कितनी एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध रहेगी। इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर विभाग को सौंपनी होगी।
श्रावणी मेला हर साल आस्था, विश्वास और भक्ति का सबसे बड़ा पर्व बनकर सामने आता है। इस बार सरकार की कोशिश है कि श्रद्धालुओं की यह यात्रा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित और स्वास्थ्य के लिहाज से भी निश्चिंत रहे। ताकि बाबा भोलेनाथ के दरबार तक पहुंचने वाले हर कांवरिये के साथ रास्ते भर स्वास्थ्य सेवाओं का भरोसा भी कदम से कदम मिलाकर चलता रहे।

