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Ranchi : झारखंड का नाम आते ही दिमाग में सबसे पहले क्या आता है? कोयले की खदानें, ऊंचे पहाड़, घने जंगल और खनिज संपदा। सालों से इस राज्य की यही पहचान रही है। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। झारखंड अब सिर्फ जमीन के नीचे छिपे खजाने के भरोसे नहीं रहेगा, बल्कि अपनी दिमागी ताकत और तकनीक के दम पर दुनिया में अपनी नई पहचान बनाने जा रहा है। सीएम हेमंत सोरेन का यही नया विज़न है, जिसे उन्होंने एक बेहद खास मंत्र में पिरोया है… ‘माइंस से माइंड्स’ की ओर बढ़ता झारखंड।
रांची में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का नजारा इस बात का गवाह था कि राज्य अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। देश-विदेश से जुटे निवेशकों, तकनीकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के दिग्गजों के सामने मुख्यमंत्री ने जब अपनी बात रखी, तो उसमें सिर्फ सरकारी नीतियां नहीं थीं, बल्कि एक नए और आधुनिक झारखंड का सपना था। उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ कागजी काम नहीं है, यह राज्य में असीम संभावनाओं के नए दरवाजे खोलने की शुरुआत है।

जब बड़े औद्योगिक घरानों ने मिलाया हाथ
इस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी कामयाबी रही वह 14 महत्वपूर्ण MoU, जिन पर सरकार और दुनिया की नामी कंपनियों ने दस्तखत किए। डिजिटल गवर्नेंस और AI को बढ़ावा देने के लिए गूगल, टाटा समूह, जिंदल ग्रुप, वरुण बेवरेजेस और ईज माय ट्रिप जैसी दिग्गज कंपनियां झारखंड के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने को तैयार हैं।
सीएम हेमंत सोरेन ने इन समझौतों पर खुशी जताते हुए कहा कि लोग इसे सिर्फ कागजी डील न समझें। यह झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की असली उपलब्धि है। अब राज्य में रिसर्च, नवाचार और नए आइडियाज को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि यहाँ के युवाओं को आगे बढ़ने के लिए अपने घर से दूर न जाना पड़े।

फाइलों में बंद नहीं होंगी योजनाएं, जमीन पर दिखेगा असर
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी योजनाएं फाइलों में ही दम तोड़ देती हैं, लेकिन इस बार सरकार का रुख बेहद कड़ा है। सीएम हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को साफ लफ्जों में निर्देश दिया है कि छोटी-मोटी योजनाओं के जाल में उलझने के बजाय ऐसी लंबी साझेदारी पर ध्यान दें जो राज्य को सालों-साल फायदा पहुंचाए। उन्होंने सख्त हिदायत दी है कि जितने भी समझौतों पर बात हुई है, उन्हें एक निश्चित समय सीमा के अंदर जमीन पर उतारा जाए। काम में ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं होगी।
आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने का बड़ा दांव
इस पूरे विज़न की सबसे खूबसूरत बात यह है कि सरकार आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों को नहीं भूल रही है। सीएम हेमंत सोरेन ने मंच से ऐलान किया कि राज्य की असली आत्मा यहां का आदिवासी समाज है और उन्हें विकास की मुख्य राह पर लाना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है।
फिलहाल जियाडा के नियमों के तहत आदिवासी उद्यमियों के लिए 25 प्रतिशत रियायत की व्यवस्था है, लेकिन सीएम ने अधिकारियों को इस पर दोबारा विचार करने को कहा है। उनका लक्ष्य इस छूट को बढ़ाकर सीधे 50 प्रतिशत तक करने का है, ताकि स्थानीय और आदिवासी युवाओं को उद्योग लगाने में कोई परेशानी न हो।
अतीत की गलतियों से सीख और जोहार की गूंज
सीएम ने बड़ी ईमानदारी से इस बात को भी कबूल किया कि अतीत में सही तरीके से बातचीत न हो पाने के कारण झारखंड की असली ताकत और खूबियां दुनिया के सामने नहीं आ पाईं। निवेशकों और सरकार के बीच एक दूरी बनी रही। लेकिन अब इस दूरी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया है। सरकार देश-विदेश के निवेशकों से लगातार सीधा संवाद बनाए रखेगी।
कार्यक्रम के अंत में सीएम हेमंत सोरेन ने वहां मौजूद केंद्रीय मंत्रियों, निवेशकों और मेहमानों का आभार जताया। उन्होंने झारखंड की माटी के पारंपरिक और आत्मीय शब्द ‘जोहार’ के साथ अपना संबोधन समाप्त किया और सबको संदेश दिया कि आइए, इस बदलते और बढ़ते झारखंड के सफर में हमारे हमसफर बनिए।
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