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Ranchi : झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक में हुए करोड़ों के कथित घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार सुबह शिकंजा कस दिया है। रांची ईडी की टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत झारखंड और ओडिशा में एक साथ सात ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। यह पूरी कार्रवाई सरायकेला शाखा से जुड़े वित्तीय फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग की पड़ताल के सिलसिले में की जा रही है। जांच टीमें अलग-अलग ठिकानों पर कागजातों और डिजिटल सबूतों को खंगालने में जुटी हैं।
सरायकेला शाखा से जुड़ा है पूरा फर्जीवाड़ा
यह पूरा मामला झारखंड स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक की सरायकेला शाखा में हुई भारी वित्तीय गड़बड़ियों और धोखाधड़ी से जुड़ा है। जांच के केंद्र में कारोबारी संजय कुमार डालमिया और बैंक के तत्कालीन अधिकारियों की कथित मिलीभगत है। आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बैंक फंड का गलत इस्तेमाल किया गया और मनमाने तरीके से लोन बांटे गए। झारखंड हाईकोर्ट के 2024 के एक आदेश में भी 4.14 करोड़ रुपये की हेराफेरी का जिक्र आया था, जिसमें अलग-अलग बैंक शाखाओं से पैसे ट्रांसफर करने और लोन खातों में रकम एडजस्ट करने के आरोप दर्ज हैं।

पहले भी जेल जा चुके हैं कारोबारी संजय डालमिया
इस मामले में कारोबारी संजय कुमार डालमिया पहले भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। साल 2020 में पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों ने को-ऑपरेटिव बैंक में लगभग 36 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया था। अब ईडी इसी पुराने मामले की तह में जाकर मनी लॉन्ड्रिंग के ऐंगल की पड़ताल कर रही है, ताकि यह साफ हो सके कि बैंक से निकाला गया पैसा किन-किन रास्तों से होकर कहां खपाया गया।
लेनदेन के सबूत और संपत्तियों पर ईडी की नजर
फिलहाल ईडी की टीम का मुख्य ध्यान बैंक धोखाधड़ी से जुड़े पैसों के ट्रेल, लेन-देन से जुड़े बैंक दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड्स को जुटाने पर है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अपराध से जुटाई गई रकम से कहीं दूसरी संपत्तियां तो नहीं खरीदी गईं। कई जगहों पर अभी सर्च ऑपरेशन जारी है और अफसरों का कहना है कि छानबीन पूरी होने के बाद ही जब्त किए गए दस्तावेजों और नकदी का पूरा ब्योरा सामने आ सकेगा।
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