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Davos/Ranchi : दावोस की ठंडी वादियों में जब दुनिया के ताकतवर नेता, उद्योगपति और नीति निर्माता जुटे थे, उसी भीड़ में एक चेहरा ऐसा भी था जो अपनी सादगी, जमीन से जुड़ाव और अलग पहचान के कारण सबका ध्यान खींच रहा था। यह चेहरा था झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का। भारत से पहली बार किसी आदिवासी निर्वाचित नेता की वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक में मौजूदगी सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं थी। यह उस संघर्ष, उस पहचान और उस उम्मीद की कहानी थी जो झारखंड के जंगलों, पहाड़ों और गांवों से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े मंच तक पहुंची।
व्हाइट बैज से नवाजे गये सीएम हेमंत सोरेन
WEF की ओर से सीएम हेमंत सोरेन को व्हाइट बैज नवाजा गया। सीएम को दिया गया व्हाइट बैज अपने आप में खास है। यह बैज आमतौर पर राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को दिया जाता है, जो उन्हें WEF के सभी अहम कार्यक्रमों में बराबरी का स्थान देता है। लेकिन इस सम्मान से ज्यादा अहम वह संदेश है जो इसके साथ जुड़ा है। यह संदेश है कि अब झारखंड को केवल खनिजों का राज्य नहीं, बल्कि विचारों, संभावनाओं और भविष्य की दिशा तय करने वाले राज्य के रूप में देखा जा रहा है।
आदिवासी समाज से वैश्विक मंच तक
हेमंत सोरेन की यात्रा किसी कॉरपोरेट बोर्डरूम से शुरू नहीं हुई। वह उस समाज से आते हैं, जिसने लंबे समय तक हाशिये पर रहकर अपनी पहचान और अधिकारों की लड़ाई लड़ी है। दावोस में उनकी मौजूदगी कई आदिवासी युवाओं के लिए एक शांत लेकिन मजबूत संदेश है कि उनकी आवाज भी वैश्विक मंच तक पहुंच सकती है। जब वे वैश्विक नेताओं के बीच खड़े थे, तो उनके साथ झारखंड के गांव, खेत, पहाड़ और आदिवासी संस्कृति भी खड़ी थी।
WEF और झारखंड के बीच संवाद
WEF के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने साफ कहा कि वे झारखंड के साथ दीर्घकालिक साझेदारी चाहते हैं। मुख्यमंत्री द्वारा WEF अध्यक्ष को भेजे गए पत्र को भी गंभीरता से लिया गया। यह पत्र किसी औपचारिक भाषा से ज्यादा एक साफ सोच को दिखाता है कि झारखंड अब दुनिया से जुड़कर, लेकिन अपनी शर्तों पर आगे बढ़ना चाहता है। बैठकों में क्रिटिकल मिनरल्स, समावेशी समाज, जलवायु बदलाव और ऊर्जा परिवर्तन जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। यह वही मुद्दे हैं जिनका असर सीधे झारखंड के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।
जब झारखंड की बात दुनिया सुनती है
जिस WEF कांग्रेस सेंटर में मुख्यमंत्री मौजूद थे, वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति सहित कई देशों के शीर्ष नेता भी जुटने वाले थे। ऐसे मंच पर झारखंड की चर्चा होना यह बताता है कि राज्य अब सिर्फ राष्ट्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहा। यह बदलाव अचानक नहीं आया। यह वर्षों के प्रयास, नीतिगत फैसलों और एक अलग विकास दृष्टि का नतीजा है, जिसमें विकास के साथ समाज और प्रकृति को भी बराबर जगह दी गई है।
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