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Deoghar : 11वीं से 13वीं JPSC और इससे जुड़ी परीक्षाओं को रद्द किए जाने के राज्य सरकार के फैसले का असर अब श्रावणी मेला की व्यवस्था पर भी दिखने लगा है। इन परीक्षाओं के जरिए नौकरी पाने वाले करीब 70 अधिकारी और कर्मचारी इस समय देवघर में श्रावणी मेला की अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। किसी की ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में लगी थी तो कोई मेला क्षेत्र में दूसरी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभा रहा था। परीक्षा रद्द होने की अधिसूचना जारी होते ही कई अधिकारी ड्यूटी छोड़कर अपने गृह क्षेत्र या रांची के लिए रवाना हो गए।
मंगलवार देर रात सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद मेला ड्यूटी में तैनात ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी हलचल मच गई। अधिकारियों ने अपने वरीय पदाधिकारियों को फैसले की जानकारी दी और इसके बाद कई लोग अपनी ड्यूटी से अलग हो गए। इससे अंतिम सोमवारी से ठीक पहले जिला प्रशासन के सामने खाली हुए पदों पर नए अधिकारियों की तैनाती की चुनौती खड़ी हो गई है।
अधिसूचना मिलते ही मजिस्ट्रेट ने छोड़ी मेला ड्यूटी
श्रावणी मेला में मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी संभाल रहे अमित आनंद भी 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के जरिए नौकरी पाने वाले अधिकारियों में शामिल हैं। सरकार की अधिसूचना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तत्काल अपने वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद वह मजिस्ट्रेट की ड्यूटी छोड़कर वहां से रवाना हो गए।
इसी तरह मेला क्षेत्र में बनाए गए ओपी-5 में मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात हरे राम ने भी सरकार के फैसले की जानकारी मिलने के बाद अपनी ड्यूटी छोड़ दी। बताया जा रहा है कि JPSC परीक्षा के जरिए नियुक्त कई अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इसी तरह मेला ड्यूटी से हट गए हैं।
दरअसल, मंगलवार रात परीक्षा रद्द होने की घोषणा के बाद उन अधिकारियों के सामने अपनी नौकरी को लेकर स्थिति साफ नहीं थी, जिन्होंने इसी परीक्षा के आधार पर सरकारी सेवा ज्वाइन की थी। इसी वजह से मेला क्षेत्र में तैनात ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच अचानक बेचैनी बढ़ गई।
करीब 70 अधिकारी-कर्मचारी थे तैनात, अब दूसरे कर्मियों को जिम्मेदारी
देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने बताया कि उच्च स्तर पर लिए गए फैसले के बाद कई अधिकारी और कर्मचारियों ने अपनी ड्यूटी छोड़ी है। उन्होंने कहा कि श्रावणी मेला में करीब 70 ऐसे अधिकारी और कर्मचारी तैनात थे, जिन्होंने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के माध्यम से नौकरी हासिल की थी। सरकार के फैसले की जानकारी मिलने के बाद इन लोगों ने जिला प्रशासन को इसकी सूचना दी और अपनी ड्यूटी से अलग हो गए।
अब प्रशासन उन अधिकारियों और कर्मचारियों की जगह दूसरे कर्मियों को लगाने की तैयारी कर रहा है, जो फिलहाल श्रावणी मेला की ड्यूटी में नहीं हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि मेला की व्यवस्था किसी एक अधिकारी या कर्मचारी पर निर्भर नहीं है। जरूरत के हिसाब से जिम्मेदारियों में बदलाव कर व्यवस्था को संभाला जाएगा।
डीसी ने कहा कि राहत की बात यह है कि सरकार का यह फैसला तीन सोमवारी गुजरने के बाद आया है। अब श्रावणी मेला की केवल चौथी सोमवारी बची है। अंतिम सोमवारी को लेकर प्रशासन पहले से ही अतिरिक्त तैयारी कर रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी को देखते हुए इस बार दो से तीन गुना ज्यादा मेहनत करने की तैयारी है।
चौथी सोमवारी से पहले प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
श्रावणी मेला की तीन सोमवारी के दौरान जिन अधिकारियों और कर्मचारियों ने मेला व्यवस्था को संभाला, उनमें से करीब 70 लोगों के हटने के बाद अब प्रशासन को उनकी जगह नए लोगों को जिम्मेदारी देनी होगी। अंतिम सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के देवघर पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में प्रशासन किसी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहता।
मेला क्षेत्र में मजिस्ट्रेट की तैनाती से लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने, यातायात व्यवस्था संभालने और अलग-अलग स्थानों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी प्रशासनिक अधिकारियों के पास रहती है। इसलिए अचानक कई अधिकारियों के हटने से जिम्मेदारियों का दोबारा बंटवारा करना जरूरी हो गया है।
हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि वैकल्पिक व्यवस्था जल्द पूरी कर ली जाएगी। जिन अधिकारियों की ड्यूटी मेला में नहीं लगी थी, उन्हें जरूरत के अनुसार जिम्मेदारी दी जाएगी। प्रशासन का दावा है कि चौथी सोमवारी में श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
मेला में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए काम कर रहे समाजसेवी सरोज सिंह ने भी कहा कि अधिकारियों के हटने से प्रशासनिक स्तर पर कुछ दिक्कतें जरूर सामने आ सकती हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस बल की बड़ी भूमिका है। इसलिए सुरक्षा के मोर्चे पर किसी बड़े असर की उम्मीद नहीं है।
उन्होंने कहा कि श्रावणी मेला के दौरान स्थानीय लोग भी प्रशासन का सहयोग करते रहे हैं। अगर अंतिम सोमवारी के दौरान प्रशासन को किसी तरह की परेशानी आती है तो स्थानीय लोग आगे आकर मदद करेंगे। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन खाली हुई जिम्मेदारियों को कितनी जल्दी भरता है और अंतिम सोमवारी की भीड़ को किस तरह संभालता है।
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