अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
News Samvad : त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। चीनी के दाम में अचानक तेजी आई है। खुदरा बाजार में चीनी पहली बार 65 रुपए किलो तक पहुंच गई है। कारोबारियों के मुताबिक, पिछले 15 दिनों में चीनी के भाव में करीब 15 रुपए किलो की बढ़ोतरी हुई है। कुछ दिन पहले तक 48 से 50 रुपए किलो बिकने वाली चीनी अब कई बाजारों में 60 से 65 रुपए किलो तक पहुंच गई है। कारोबारियों का कहना है कि सीजन के आखिरी दौर में चीनी का पुराना स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। इसके मुकाबले बाजार में नई आपूर्ति पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि मांग और आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है और इसका सीधा असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है। अभी त्योहारों का सिलसिला शुरू भी नहीं हुआ है, ऐसे में आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
15 दिन में 15 रुपए बढ़ा भाव, पहली बार 60 के पार पहुंची चीनी
न्यू हैदराबाद के फुटकर किराना व्यापारी संतोष गुप्ता बताते हैं कि करीब 15 दिन पहले चीनी 48 से 50 रुपए किलो बिक रही थी। अब यही चीनी 65 रुपए किलो तक पहुंच गई है। अचानक हुई इस बढ़ोतरी से ग्राहक भी हैरान हैं। रोजमर्रा की जरूरत की चीज होने के कारण लोग कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन चीनी की जरूरत पूरी तरह टालना भी संभव नहीं है। फतेहगंज के थोक कारोबारी संजय जयसवानी के मुताबिक, पहली बार चीनी के भाव 60 रुपए किलो से ऊपर पहुंचे हैं। बाजार में मांग की तुलना में करीब आधी ही चीनी की आपूर्ति हो पा रही है। जब दुकानदारों को ही पर्याप्त माल नहीं मिल रहा है तो खुदरा बाजार में कीमत बढ़ना स्वाभाविक है। कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल बाजार में उपलब्ध स्टॉक ही मांग पूरी करने का मुख्य सहारा है। चीनी कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, इस बार उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब पांच फीसदी कम रहा है। उत्पादन घटने के कारण सीजन के अंतिम दौर में उपलब्ध स्टॉक पर दबाव बढ़ गया है। वहीं, चीनी का नया पेराई सत्र अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में शुरू होता है। यानी तब तक बाजार को मौजूदा स्टॉक और उपलब्ध आपूर्ति के सहारे ही चलना होगा।
एथेनॉल की बढ़ी मांग का भी असर, चीनी उत्पादन पर पड़ा दबाव
कारोबारियों का कहना है कि इस बार चीनी उत्पादन प्रभावित होने की एक वजह एथेनॉल की बढ़ी मांग भी रही। चीनी मिलों के सामने गन्ने से चीनी बनाने के साथ एथेनॉल उत्पादन का विकल्प रहा। पेट्रोल और शराब बनाने वाली कंपनियों की ओर से एथेनॉल की मांग बढ़ने के कारण मिलों ने इसका उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। इसका असर चीनी की उपलब्धता पर पड़ा और बाजार में स्टॉक अपेक्षाकृत कम रह गया। अब इसका असर सीधे मिठाई कारोबार पर पड़ने लगा है। अगले एक महीने में रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, जन्माष्टमी और इसके बाद दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। त्योहारों में मिठाई की बिक्री बढ़ती है और मिठाई बनाने में चीनी की खपत भी काफी ज्यादा होती है। ऐसे में कारोबारियों को डर है कि मांग बढ़ने के साथ चीनी की कीमत और ऊपर जा सकती है। मिठाई कारोबारी और यूपी आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अविनाश त्रिपाठी के मुताबिक, अगले एक महीने में कई बड़े त्योहार हैं। इस दौरान मिठाई की मांग बढ़ना तय है, लेकिन बाजार में चीनी की कमी बनी हुई है। मिठाई बनाने में करीब 20 फीसदी तक चीनी का इस्तेमाल होता है। एक किलो खोये से बनी मिठाई में करीब 200 ग्राम चीनी लग जाती है। ऐसे में चीनी के दाम बढ़ने का असर मिठाई की लागत पर सीधे पड़ता है।
मिठाई की लागत बढ़ी, कारोबारियों के मुनाफे पर दबाव
मिठाई कारोबारियों के लिए परेशानी सिर्फ चीनी के बढ़ते दाम तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि कच्चे माल की लागत पहले ही 25 से 30 फीसदी तक बढ़ चुकी है। इसके अलावा व्यावसायिक सिलिंडर पर सरकार की ओर से मिली 375 रुपए की राहत भी बढ़ी हुई लागत के सामने ज्यादा असरदार साबित नहीं हो रही है। कारोबारियों के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ त्योहारों के कारण मिठाई की मांग बढ़ने वाली है, वहीं दूसरी तरफ चीनी समेत कच्चे माल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। अगर चीनी की कीमत इसी तरह बढ़ती रही तो मिठाई की लागत और बढ़ेगी। कारोबारी पूरी बढ़ी हुई लागत ग्राहक पर डालते हैं तो मिठाई महंगी हो सकती है और अगर कीमत नहीं बढ़ाते हैं तो उनका मुनाफा कम होगा। बाजार के जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में चीनी की कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि मिलों से बाजार में कितनी आपूर्ति होती है और त्योहारों के दौरान मांग कितनी बढ़ती है। फिलहाल बाजार में स्टॉक सीमित है और नया पेराई सत्र शुरू होने में अभी समय है। ऐसे में त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है।
इसे भी पढ़ें : CM सम्राट बोले- बिहार का मखाना बना ग्लोबल सुपरफूड, दुनिया की थाली तक पहुंचा













