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Ranchi : JPSC की परीक्षाएं और नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को लेकर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार के आदेश को चुनौती देने वाले प्रार्थियों को बड़ी राहत देते हुए आदेश पर रोक लगा दी है। इससे JPSC के जरिए चयनित होकर नौकरी कर रहे अधिकारियों को फिलहाल राहत मिल गई है। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत के सामने पक्ष रखा।
हाईकोर्ट से राहत पाने वालों में सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी शामिल हैं। इन सभी ने सरकार के उस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसके तहत JPSC से जुड़ी कई परीक्षाओं और नियुक्तियों पर कार्रवाई की गई थी। इनके अलावा भी JPSC परीक्षा से चयनित होकर नौकरी कर रहे कई लोगों ने सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की हैं।
सरकार के फैसले से नौकरी पर मंडरा रहा था संकट
दरअसल, राज्य सरकार ने सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार की ओर से कहा गया था कि जिन परीक्षाओं में परीक्षा एजेंसी TDPL की भूमिका रही है, उनमें गड़बड़ी के तथ्यों को देखते हुए कार्रवाई जरूरी है। इसके साथ ही वर्ष 2014 के बाद हुई नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की बात भी कही गई थी।
सरकार के फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों और नवनियुक्त अधिकारियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई थी, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा दी थी, चयनित हुए और इसके बाद सरकारी नौकरी ज्वाइन की थी। उन्हें आशंका थी कि परीक्षा और नियुक्ति रद्द होने का सीधा असर उनकी नौकरी पर पड़ सकता है। इसी वजह से प्रभावित लोगों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
22 परीक्षाएं रद्द, 6 की प्रक्रिया स्थगित करने का था फैसला
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में 22 परीक्षाओं को रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने की बात कही गई थी। यह कार्रवाई सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों और नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए की गई थी।
सरकार के इस फैसले के बाद JPSC की परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर पहले से चल रहा विवाद और गहरा गया था। एक तरफ सरकार का तर्क था कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी की जांच जरूरी है, वहीं प्रभावित अभ्यर्थियों और अधिकारियों का कहना था कि बिना उनकी गलती के उनकी नौकरी और भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले ने लिया नया मोड़
गुरुवार को हाईकोर्ट की ओर से सरकार के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद मामले में नया मोड़ आ गया है। अदालत से राहत मिलने के बाद याचिका दाखिल करने वाले नवनियुक्त अफसरों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। हालांकि, पूरे मामले का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। आगे की सुनवाई में कोर्ट सरकार के फैसले, सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों और प्रभावित अधिकारियों के पक्ष पर विस्तार से विचार करेगा।
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