अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : किसी थाने में FIR दर्ज होती है। पुलिस जांच शुरू करती है। गवाहों से पूछताछ होती है, घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए जाते हैं, वैज्ञानिक जांच के लिए नमूने भेजे जाते हैं। इसके बाद केस की फाइल एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुंचती रहती है। कई बार इसी प्रक्रिया में काफी समय निकल जाता है और केस की जांच लंबी खिंच जाती है। अब रामगढ़ पुलिस इस तस्वीर को बदलने की तैयारी में है।
पुलिस ने जांच की इसी पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से जोड़ने के लिए PRISM यानी Police Review of Investigation Status & Monitoring नाम का नया प्लेटफॉर्म तैयार किया है। पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत के नेतृत्व में गुरुवार को इसका शुभारंभ किया गया। अब पुलिस के लिए किसी केस की प्रगति जानना सिर्फ फाइल खोलकर देखने तक सीमित नहीं रहेगा। एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केस की पूरी स्थिति देखी जा सकेगी।
मतलब साफ है, FIR दर्ज होने के बाद केस में क्या हुआ, कौन सा साक्ष्य मिला, किस अधिकारी को जांच सौंपी गई, जांच कितनी आगे बढ़ी और चार्जशीट कब तक दाखिल करनी है, इन सबकी जानकारी एक जगह रहेगी।

केस की फाइल कहां पहुंची, अब यह सवाल नहीं रहेगा
अक्सर किसी मामले में पीड़ित या उसके परिवार की सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि आखिर जांच चल कहां तक रही है। पुलिस से पूछने पर उन्हें इंतजार करने की बात कही जाती है। जांच के दौरान कई प्रक्रियाएं होती हैं और हर केस की अपनी अलग जरूरत होती है। इसी बीच अगर किसी स्तर पर काम धीमा पड़ गया तो केस भी लंबा खिंच सकता है।
PRISM इसी समस्या को दूर करने की कोशिश है। इस प्लेटफॉर्म पर केस की शुरुआत से लेकर अंतिम रिपोर्ट या चार्जशीट तक की जानकारी दर्ज की जाएगी। कांड विशेष है या सामान्य, जांच किस अधिकारी के पास है, अब तक कौन-कौन से साक्ष्य जुटाए गए हैं और वैज्ञानिक या तकनीकी जांच की क्या स्थिति है, इन सभी बातों को डिजिटल रिकॉर्ड में रखा जाएगा।
इसका एक बड़ा फायदा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को मिलेगा। एसपी से लेकर एसडीपीओ, पुलिस निरीक्षक और थाना प्रभारी तक केस की प्रगति देख सकेंगे। अगर किसी मामले में जांच अपेक्षा के मुताबिक आगे नहीं बढ़ रही है तो अधिकारी वहीं से अनुसंधानकर्ता को जरूरी दिशा निर्देश दे सकेंगे।
यानी किसी केस की फाइल अलमारी में रखी है या किसी टेबल पर पड़ी है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण अब यह होगा कि डिजिटल सिस्टम में उसकी स्थिति क्या है।

60 और 90 दिन की घड़ी भी रहेगी नजर में
आपराधिक मामलों की जांच में समय काफी महत्वपूर्ण होता है। कई मामलों में कानून के तहत निर्धारित समय के भीतर चार्जशीट दाखिल करना जरूरी होता है। जांच के दौरान अगर 60 या 90 दिन की समय-सीमा नजदीक आ गई और जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई तो परेशानी बढ़ सकती है।
PRISM में इसी बात को ध्यान में रखते हुए डिजिटल रिमाइंडर की व्यवस्था की गई है। समय-सीमा खत्म होने से पहले ही सिस्टम संबंधित अधिकारी और अनुसंधानकर्ता को अलर्ट करेगा। यानी किसी केस की तारीख अचानक याद आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सिस्टम पहले ही बता देगा कि अब समय कम बचा है और जरूरी कार्रवाई पूरी करनी है।
इससे जांच में होने वाली देरी पर नजर रखना आसान होगा। खासकर लंबे समय से लंबित मामलों में अधिकारी यह देख सकेंगे कि जांच किस वजह से आगे नहीं बढ़ रही है और उसे पूरा करने के लिए क्या कदम उठाने की जरूरत है।
पुलिस की नजर सिर्फ केस पर नहीं, अपनी जांच की रफ्तार पर भी
PRISM को सिर्फ केस की जानकारी रखने वाला पोर्टल नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए पुलिस अपनी जांच की गति और कामकाज की स्थिति भी देख सकेगी। किसी केस में अगर साक्ष्य जुटाने का काम पूरा नहीं हुआ है, वैज्ञानिक जांच की रिपोर्ट बाकी है या चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया लंबित है तो इसकी जानकारी अधिकारियों के सामने रहेगी।
रामगढ़ पुलिस का फोकस NCLI यानी New Criminal Laws Implementation Portal पर जिले की रैंकिंग और प्रदर्शन को बेहतर करने पर भी रहेगा। नए आपराधिक कानूनों के लागू होने के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया में समय पर कार्रवाई और सही तरीके से रिकॉर्ड रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में PRISM को उसी दिशा में एक उपयोगी व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है।
SP मुकेश कुमार लुनायत का कहना है कि PRISM के जरिए FIR से लेकर फाइनल रिपोर्ट तक हर केस की एकीकृत ट्रैकिंग सुनिश्चित होगी। उनका उद्देश्य तकनीक के माध्यम से नागरिकों के लिए पारदर्शी और जवाबदेह पुलिसिंग को मजबूत करना है, ताकि जांच समय पर पूरी हो और पीड़ितों को ससमय न्याय मिल सके।
अब इस डिजिटल व्यवस्था की असली परीक्षा इसके इस्तेमाल में होगी। अगर पुलिसकर्मी नियमित रूप से केस की जानकारी अपडेट करते हैं और वरिष्ठ अधिकारी उसकी लगातार निगरानी करते हैं, तो लंबित मामलों पर दबाव बनेगा और जांच की रफ्तार भी बढ़ सकती है। सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि किसी केस की फाइल आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ कागजी प्रक्रिया का इंतजार न करना पड़े, बल्कि हर स्तर पर उसकी स्थिति अधिकारियों की नजर में रहे। यही PRISM की सबसे बड़ी भूमिका होगी।
इसे भी पढ़ें : चलती कार में झपकी ले रही मां का बेटी ने रेत डाला गला













