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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : एक घर में किलकारी गूंजने वाली थी। परिवार के लोग नए मेहमान के स्वागत की तैयारियों में लगे थे। मां बनने जा रही दीपिका भी अपने आने वाले बच्चे को लेकर सपनों की दुनिया में थी। लेकिन किसे पता था कि जिस दिन खुशियों का नया सूरज उगना था, उसी दिन उस घर की रोशनी हमेशा के लिए बुझ जाएगी। रामगढ़ के रांची रोड स्थित पल्स अस्पताल में प्रसव के बाद बिगड़ी हालत और फिर रांची ले जाते समय हुई दीपिका कुमारी की मौत ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
तीन साल पहले सजी थी नई दुनिया
मुरपा कुज्जु गांव के शंभू लाल ठाकुर के घर उस दिन बहुत खुशी थी, जब करीब तीन साल पहले उनकी बेटी दीपिका की शादी अभिषेक कुमार से हुई थी। हर पिता की तरह उन्होंने भी अपनी बेटी के लिए एक खुशहाल जीवन का सपना देखा था। शादी के बाद जब खबर आई कि दीपिका मां बनने वाली है, तो दोनों परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई। घर में आने वाले नन्हे मेहमान को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही थीं। कोई कहता– “बेटा होगा तो दादा जैसा दिखेगा”, तो कोई कहता– “बेटी होगी तो बिल्कुल मां पर जाएगी।”
2 मार्च… खुशियों का दिन, जो कभी नहीं भूल पाएगा परिवार
2 मार्च की सुबह दीपिका को प्रसव के लिए रामगढ़ के रांची रोड स्थित पल्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार के लोगों को उम्मीद थी कि कुछ ही घंटों में बच्चे की किलकारी सुनाई देगी। शुरुआत में डॉक्टरों ने कहा कि सब कुछ सामान्य है और नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है। लेकिन बाद में डॉक्टरों ने ऑपरेशन करने की बात कही। परिवार ने भी मां और बच्चे की सुरक्षा को देखते हुए डॉक्टरों की सलाह मान ली। कुछ समय बाद खबर आई कि दीपिका ने बेटे को जन्म दिया है। यह सुनते ही परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
लेकिन खुशी ज्यादा देर टिक नहीं सकी
परिवार वालों के मुताबिक बच्चे के जन्म के कुछ ही समय बाद हालात बदलने लगे। दीपिका की तबीयत बिगड़ने लगी और परिजनों को उससे मिलने भी नहीं दिया गया। दीपिका के पिता शंभू लाल ठाकुर बताते हैं कि करीब चार घंटे तक उन्हें अपनी बेटी की हालत के बारे में कुछ भी साफ-साफ नहीं बताया गया। वे बार-बार डॉक्टरों से पूछते रहे, लेकिन हर बार उन्हें बस इतना कहा जाता रहा कि “सब ठीक है।” फिर अचानक डॉक्टरों ने कहा कि मरीज की हालत गंभीर है और उसे तुरंत रांची ले जाना होगा।
आधी रात की दौड़… लेकिन जिंदगी हार गई
परिजनों के मुताबिक जल्दबाजी में दीपिका को एंबुलेंस से रांची भेजा गया। रात के करीब 2 बजे उसे मेडिका अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार वालों की आंखों में उम्मीद अभी भी बाकी थी। उन्हें लग रहा था कि शायद अब सब ठीक हो जाएगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। इलाज शुरू होने के कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने दीपिका को मृत घोषित कर दिया।
पिता की टूटी आवाज और अधूरे सपने
जब यह खबर परिवार तक पहुंची, तो घर में कोहराम मच गया।
जिस बेटी को उन्होंने बचपन से प्यार और दुलार से पाला था, वह अब इस दुनिया में नहीं रही। पिता शंभू लाल ठाकुर की आवाज आज भी भर्रा जाती है। वे कहते हैं, “मेरी बेटी ऑपरेशन से पहले बिल्कुल ठीक थी। अस्पताल में अपने पैरों से चलकर गई थी… अगर सही समय पर इलाज मिलता तो शायद आज वह जिंदा होती।”
मां नहीं रही… जिंदगी के लिए लड़ रहा नवजात
इस पूरी घटना की सबसे मार्मिक तस्वीर वह है, जिसमें एक नवजात बच्चा अपनी मां की गोद के बिना जिंदगी की पहली लड़ाई लड़ रहा है। परिवार के मुताबिक बच्चे की हालत भी गंभीर बनी हुई है और वह वेंटिलेटर पर है। जिस बच्चे को जन्म के बाद मां की गोद मिलनी चाहिए थी, वह अस्पताल के उपकरणों के सहारे जिंदगी से जूझ रहा है।
अब न्याय की उम्मीद
दीपिका की मौत के बाद परिवार में गहरा शोक और गुस्सा दोनों है।
परिजन इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दीपिका के पिता शंभू लाल ठाकुर ने झारखंड सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय, रामगढ़ के उपायुक्त और सिविल सर्जन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि दोषी डॉक्टरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो, संबंधित डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द किया जाए, पल्स अस्पताल को सील किया जाए। पिता का कहना है कि उनकी बेटी तो अब वापस नहीं आएगी, लेकिन अगर इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है तो शायद भविष्य में किसी और बेटी की जान बचाई जा सकेगी।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
इस पूरे मामले में पल्स अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डिलीवरी के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ थे। अस्पताल के अनुसार कुछ घंटे बाद अचानक मरीज की तबीयत बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होते देख बेहतर इलाज के लिए उसे रांची के मेडिका अस्पताल रेफर किया गया था। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज की मौत रांची में इलाज के दौरान हुई है और इस मामले में अस्पताल की कोई लापरवाही नहीं है। उन्होंने परिजनों के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
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