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Home » नरेंद्र मोदी की जनसेवा के बेमिसाल 25 साल, जानें क्या बोल गए बाबूलाल
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नरेंद्र मोदी की जनसेवा के बेमिसाल 25 साल, जानें क्या बोल गए बाबूलाल

September 18, 2026No Comments7 Mins Read
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Ranchi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उनके राजनीतिक सफर और देश में हुए बदलावों का उल्लेख किया है। अपने लेख में मरांडी ने नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनने तक के सफर को सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन केवल पद संभालने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने खास तौर पर झारखंड में स्वास्थ्य, हवाई सेवा और जनजातीय गौरव से जुड़ी पहलों का जिक्र किया है।

मरांडी ने लिखा है कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन था। यह दिन भगवान विश्वकर्मा की जयंती के साथ भी जुड़ा है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में 25 साल का सफर किसी भी नेता के लिए लंबा पड़ाव होता है। इस दौरान लिए गए फैसले, शासन का तरीका और किए गए काम यह तय करते हैं कि उसका राजनीतिक प्रभाव कितना व्यापक रहा।

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गुजरात के सीएम से देश के प्रधानमंत्री तक का सफर

मरांडी ने अपने लेख में कहा है कि 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। करीब 13 साल तक गुजरात का नेतृत्व करने के बाद 2014 में वे देश के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद से केंद्र की सत्ता में लगातार उनका नेतृत्व रहा है।

लेख में कहा गया है कि मोदी की राजनीतिक यात्रा को केवल पदों के बदलाव के तौर पर देखना सही नहीं होगा। एक संगठन कार्यकर्ता से मुख्यमंत्री और फिर प्रधानमंत्री बनने तक की इस यात्रा में सेवा को राजनीति का आधार बताया गया है। मरांडी के मुताबिक, मोदी ने विकास को सिर्फ आंकड़ों या सरकारी घोषणाओं तक सीमित रखने के बजाय आम लोगों की जिंदगी में बदलाव से जोड़ने की कोशिश की।

उन्होंने जनधन योजना, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, गरीबों के आवास और डिजिटल सेवाओं जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना रहा है। मरांडी ने लिखा कि गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को विकास की चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश हुई।

झारखंड में एम्स और एयरपोर्ट को बताया बदलाव का आधार

बाबूलाल मरांडी ने अपने लेख में झारखंड के संदर्भ में देवघर एम्स और देवघर एयरपोर्ट को खास तौर पर रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक झारखंड को मुख्य रूप से खनिज संपदा के लिए जाना गया, जबकि राज्य में स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, तकनीक और मानव संसाधन के क्षेत्र में भी बड़ी संभावनाएं हैं।

लेख के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 2018 में देवघर में एम्स की स्थापना को मंजूरी दी थी। इसके लिए 1,103 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था। प्रस्तावित संस्थान में 750 बेड का अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं का प्रावधान किया गया। वर्ष 2022 में यहां इन-पेशेंट और ऑपरेशन थिएटर सेवाओं की शुरुआत हुई। इसी दौरान देवघर में 16,800 करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया।

मरांडी ने देवघर एयरपोर्ट को भी झारखंड की कनेक्टिविटी और पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनके लेख के अनुसार, 12 जुलाई 2022 को प्रधानमंत्री मोदी ने एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था। करीब 400 करोड़ रुपए की लागत से बने इस एयरपोर्ट में डीआरडीओ की ओर से 200 करोड़ रुपए का अनुदान शामिल था। एयरपोर्ट शुरू होने के बाद दिल्ली और देवघर के बीच सीधी हवाई सेवा शुरू हुई।

मरांडी ने लिखा कि एयरपोर्ट का असर सिर्फ हवाई यात्रा तक सीमित नहीं है। इससे बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के साथ पर्यटन, होटल, स्थानीय कारोबार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

बिरसा मुंडा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल का जिक्र

झारखंड के जनजातीय समाज और भगवान बिरसा मुंडा को लेकर भी मरांडी ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा झारखंड के लिए सिर्फ एक जनजातीय नायक नहीं, बल्कि स्वाभिमान, संघर्ष और स्वतंत्रता के प्रतीक हैं।

मरांडी ने बताया कि केंद्र सरकार ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। इसी दिन 2021 में रांची में भगवान बिरसा मुंडा स्मृति उद्यान सह स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन भी हुआ।

अपने लेख में उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा की स्मृति को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने से जनजातीय समाज के संघर्ष और योगदान को व्यापक पहचान मिली है। उनके मुताबिक, भारतीय इतिहास में जनजातीय समाज के संघर्ष, बलिदान और योगदान भी राष्ट्र निर्माण की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

विकास का मतलब खनिज से आगे बढ़ाने की बात

मरांडी ने कहा कि झारखंड को सिर्फ खनिजों की भूमि के रूप में देखने के बजाय मानव संसाधन, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने देवघर एम्स को स्वास्थ्य, एयरपोर्ट को पर्यटन और कारोबार तथा बिरसा मुंडा से जुड़ी पहलों को जनजातीय पहचान से जोड़ते हुए इनका उल्लेख किया।

उन्होंने यह भी कहा कि इन परियोजनाओं का पूरा लाभ तभी मिलेगा, जब उन्हें रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाए। झारखंड के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, जनजातीय प्रतिभाओं को शिक्षा और तकनीक से जोड़ने और पर्यटन स्थलों पर बेहतर सुविधाएं विकसित करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।

अनुच्छेद 370 से जीएसटी तक फैसलों का जिक्र

मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन का उल्लेख करते हुए मरांडी ने कई बड़े नीतिगत फैसलों को भी गिनाया है। इनमें अनुच्छेद 370 में बदलाव, नई शिक्षा नीति, जीएसटी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आत्मनिर्भर भारत, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण, महिला सशक्तीकरण से जुड़े कानून और कोविड के दौरान टीकाकरण अभियान शामिल हैं।

मरांडी ने माना कि इन फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस और मतभेद भी रहे हैं। हालांकि, उनके लेख में कहा गया है कि मोदी सरकार के दौर में लंबे समय के लक्ष्यों पर आधारित फैसलों और शासन व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर जोर रहा।

वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका का उल्लेख

लेख में भारत की वैश्विक भूमिका का भी जिक्र किया गया है। मरांडी ने जी-20 की अध्यक्षता, ग्लोबल साउथ से जुड़े मुद्दों और भारत की अर्थव्यवस्था, डिजिटल क्षमता, अंतरिक्ष कार्यक्रम तथा रक्षा उत्पादन का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की भूमिका बढ़ी है।

उनके मुताबिक, इसका असर राज्यों पर भी पड़ता है। मजबूत अर्थव्यवस्था, बेहतर बुनियादी ढांचा और नए बाजार राज्यों में निवेश और रोजगार के अवसरों के लिए आधार तैयार कर सकते हैं। झारखंड के लिए भी उन्होंने इसी तरह की संभावनाओं का उल्लेख किया है।

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र

बाबूलाल मरांडी ने नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष को आगे की यात्रा की शुरुआत के तौर पर बताया है। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड के सामने भी कई बड़ी चुनौतियां और अवसर हैं।

उन्होंने पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन, जनजातीय समाज की भागीदारी, युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी तथा स्वास्थ्य और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने को जरूरी बताया है। साथ ही केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय को भी विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मरांडी ने अपने लेख के अंत में नरेंद्र मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को सेवा, सुशासन और सशक्तिकरण की यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि देवघर एम्स, देवघर एयरपोर्ट, भगवान बिरसा मुंडा से जुड़ी पहल और जनजातीय गौरव दिवस जैसी योजनाएं झारखंड में विकास और राष्ट्रीय विमर्श में जनजातीय समाज की बढ़ती पहचान के उदाहरण हैं। लेख में उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य में झारखंड की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

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