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Pakur (Jaydev Kumar) : कहते हैं कि कुदरत जब अपने रंग दिखाती है, तो इंसान बस देखता रह जाता है। कुछ ऐसा ही अनोखा मंजर झारखंड के पाकुड़ जिले में देखने को मिला, जिसने रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच मानो वक्त की रफ्तार को कुछ देर के लिए थाम दिया। जगह थी हिरणपुर प्रखंड का सेंट ल्यूक्स मिशन अस्पताल परिसर, जहां अचानक ही लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी। कोई कौतूहल से भरा था, तो किसी के चेहरे पर अचरज था। वजह थी अस्पताल के पास की झाड़ियों में चल रहा कुदरत का एक बेहद अनूठा और दुर्लभ खेल। वहां झाड़ियों के बीच सांपों का एक जोड़ा एक-दूसरे से पूरी तरह लिपटकर अटखेलियां करता दिखा। दोनों की लंबाई इतनी कि देखने वालों की सांसें थम जाएं… कम से कम 7 से 8 फीट लंबे!
कैमरे चमके, सांसें थमीं, पर नहीं हुई कोई छेड़छाड़
जैसे ही अस्पताल परिसर में यह खबर फैली कि झाड़ियों में सांपों का जोड़ा ‘रोमांस’ कर रहा है, वैसे ही आसपास के गांवों से लोग दौड़े-चले आए। देखते ही देखते वहां मेला सा लग गया। आमतौर पर सांप को देखते ही लोग लाठी-डंडा उठा लेते हैं, लेकिन यहां नजारा एकदम जुदा था। लोगों ने गजब की समझदारी दिखाई। सबने आपस में तय किया कि कोई भी सांपों के करीब नहीं जाएगा और न ही उन्हें डराकर भगाने की कोशिश करेगा। भीड़ ने एक सुरक्षित दूरी बनाई और हर कोई इस पल को अपने मोबाइल में कैद करने में जुट गया। युवाओं ने वीडियो बनाए, तस्वीरें खींचीं और देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई। दोनों सांप भी दुनिया से बेखबर, काफी देर तक उसी शांत कोने में एक-दूसरे के साथ लिपटे रहे।
पाकुड़ के हिरणपुर में दिखा कुदरत का बेहद दुर्लभ नजारा! सेंट ल्यूक्स अस्पताल के पास झाड़ियों में 7 से 8 फीट लंबे सांपों का जोड़ा एक साथ लिपटा हुआ नजर आया। ग्रामीणों ने बिना कोई छेड़छाड़ किए दूर से ही इस पल को कैमरे में कैद किया। #Pakur #JharkhandNews #Wildlife #Snake #Monsoon pic.twitter.com/6Wt6GMRGtS
— News Samvad (@newssamvaad) July 3, 2026
जब आस्था ने जोड़े हाथ और मांगी मन्नतें
हमारे समाज में सांपों को सिर्फ एक जीव नहीं, बल्कि आस्था से जोड़कर देखा जाता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी यह दृढ़ मान्यता है कि सांपों के जोड़े का एक साथ दिखना बेहद शुभ होता है। बस फिर क्या था, इस दुर्लभ नजारे को देखकर लोगों की धार्मिक भावनाएं जाग उठीं। भीड़ में शामिल कई बुजुर्गों और महिलाओं ने दूर से ही हाथ जोड़कर नाग देवता को नमन किया। कई लोगों ने तो इस पल को गनीमत मानकर अपने दिल की मुरादें और मनोकामनाएं भी मांग डालीं। लोगों का मानना था कि साक्षात नाग देवता ने उन्हें दर्शन दिए हैं।
विज्ञान की नजर : मानसून का ‘रोमांटिक’ सीजन
इस पूरी घटना के पीछे जहां ग्रामीणों की अपनी आस्था थी, वहीं वन्यजीव विशेषज्ञों और जानकारों का नजरिया थोड़ा वैज्ञानिक था। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मानसून का यह मौसम सांपों के लिए बहुत खास होता है। यही वह वक्त होता है जब सांपों का प्रजनन (मेटिंग) काल चलता है। इस दौरान सांप अक्सर किसी शांत, सुनसान और ऐसी जगह की तलाश करते हैं जहां इंसानी दखल कम हो। सर्दियों के दिनों में तो ये जीव जमीन के नीचे या सुरक्षित अंधेरी जगहों पर ‘हाइबरनेशन’ (शीतनिद्रा) में चले जाते हैं, लेकिन जैसे ही बारिश की बूंदें धरती को भिगोती हैं और मौसम सुहाना होता है, ये अपने साथी की तलाश में बाहर आ जाते हैं। यही कारण है कि पाकुड़ में यह खूबसूरत और दुर्लभ नजारा देखने को मिला।
कौतूहल अपनी जगह, सुरक्षा अपनी जगह
इस पूरे वाकये के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने लोगों की समझदारी की तारीफ तो की, लेकिन साथ ही एक जरूरी सलाह भी दी। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान सांप काफी एक्टिव रहते हैं। ऐसे में अगर कभी भी घर के आसपास या झाड़ियों में सांप दिखाई दें, तो उनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए। उन्हें छेड़ने या खुद से पकड़ने का जोखिम भारी पड़ सकता है। कुदरत के इन अनमोल जीवों का सम्मान करना जरूरी है, लेकिन अपनी सुरक्षा की कीमत पर नहीं।
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