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Nepal : नेपाल में बुधवार सुबह भूकंप के कुछ ही मिनट बाद आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि बुधवार सुबह स्थानीय समय के अनुसार 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद फ्लैश फ्लड की सूचना मिली। इतनी कम समय में आई बाढ़ ने कई इलाकों में लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया। सड़कें और पुल बह गए, घर और वाहन पानी में बह गए और कई इलाकों का संपर्क टूट गया।
सबसे ज्यादा तबाही रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके में बताई जा रही है। भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर नीचे की ओर आई। हालात ऐसे थे कि कई जगह लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का मौका तक नहीं मिला। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
भूकंप के तीन मिनट बाद आई बाढ़, ग्लेशियल झील फटने की आशंका
भूकंप और बाढ़ के बीच महज तीन मिनट का अंतर होने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनद झील के फटने की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि भूकंप के झटकों से ऊपरी इलाके में किसी हिमनद झील या जलस्रोत में हलचल हुई और अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर बह निकला। हालांकि, बाढ़ के वास्तविक कारण की पुष्टि के लिए जांच जारी है।
नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। संचार और सड़क संपर्क टूटने के कारण कई जगहों से सही जानकारी जुटाना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बदल रही है।
100 मीटर ऊंची पानी की दीवार देखकर भागे अधिकारी
तिमुरे बाजार में बाढ़ की भयावहता का अंदाजा रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना के बयान से लगाया जा सकता है। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, ढुंगाना ने बताया कि बाढ़ आते समय वह बाहर की ओर भागे। तभी उन्होंने ऊपर की तरफ से पानी की एक विशाल दीवार को तिमुरे बाजार की ओर तेजी से बढ़ते देखा। पानी के पीछे धुएं जैसे गुबार भी दिखाई दे रहे थे।
उन्होंने नेपाली मीडिया को बताया कि पानी करीब 100 मीटर ऊंची लहर की तरह बाजार में घुसा और कुछ ही पलों में पूरा बाजार उसकी चपेट में आ गया। बाढ़ इतनी तेज थी कि देखते ही देखते बाजार का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।
162 शव बरामद, करीब 700 लोग अब भी लापता
नेपाल सरकार के मुताबिक अब तक 162 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें धाडिंग में 27, नुवाकोट में 12, रसुवा में 2, गोरखा में 20, नवालपारासी पूर्व में 26, तानाहुन में 9 और चितवन में 64 शव मिले हैं। नवालपारासी पश्चिम से भी शव बरामद किए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में थोड़ा अंतर है, क्योंकि कई प्रभावित इलाकों तक राहत टीमें अभी पूरी तरह नहीं पहुंच सकी हैं।
करीब 700 लोगों के अब भी लापता होने की जानकारी सामने आ रही है। इनमें नेपाली सेना के 44 जवान, नेपाल पुलिस के 28 जवान और नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के 12 जवान भी शामिल हैं। नेपाल के पर्यटन विभाग के अनुसार 579 पर्यटक भी लापता बताए गए हैं। इनमें 466 विदेशी और 113 नेपाली पर्यटक शामिल हैं। सरकार के अनुसार 132 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। इनमें 111 नेपाली और 21 विदेशी नागरिक हैं। बाढ़ में 63 लोगों के घायल होने की भी जानकारी है।
14 सस्पेंशन पुल और 25 बड़े पुल बहे
भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ में 14 सस्पेंशन पुल और 25 परिवहन पुल क्षतिग्रस्त या बह गए हैं। करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़क भी तबाह हो गई है। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूटने से राहत सामग्री पहुंचाना और लोगों को सुरक्षित निकालना चुनौती बन गया है। तिमुरे और स्याफ्रुबेसी में कई बस्तियां पानी और मलबे की चपेट में आई हैं। नदी किनारे रहने वाले लोगों को लगातार सतर्क रहने को कहा गया है।
रात से ही राहत अभियान में जुटी नेपाली सेना
नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि बुधवार को बाढ़ आने के तुरंत बाद नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स की टीमें बचाव कार्य में जुट गई थीं। सेना और निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टरों की मदद से भी लोगों को निकालने का काम शुरू किया गया। नेपाली सेना की टीमों ने पूरी रात प्रभावित इलाकों में अभियान चलाया।
सेना ने बुधवार रात ही जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन, पानी, टेंट और दवाइयां जैसी जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई। गुरुवार सुबह तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नदी के किनारे के इलाकों में पैदल टीमों के साथ हेलीकॉप्टरों को भी ज्यादा सक्रिय किया गया। लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को निकालने का काम जारी है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि सरकार का पूरा ध्यान फिलहाल राहत, बचाव और खोज अभियान पर है। नदी किनारे रहने वाले लोगों से किसी भी खतरे को हल्के में नहीं लेने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की गई है।
नेपाल की बाढ़ का पानी बिहार के गंडक बैराज तक पहुंचा
नेपाल में आई बाढ़ का असर बिहार तक भी पहुंचा है। बुधवार देर रात नेपाल से आया पानी गंडक बैराज, वाल्मीकिनगर पहुंच गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार रात करीब 8:30 बजे तक बैराज पर जलश्राव में करीब 20 हजार क्यूसेक की वृद्धि दर्ज की गई।
विभाग का अनुमान है कि रात करीब 11 बजे तक गंडक में पानी का प्रवाह अपने चरम पर पहुंच सकता है। इसके बाद जलश्राव में कमी आने की संभावना है। फिलहाल गंडक नदी में अधिकतम जलश्राव करीब 2 लाख क्यूसेक रहने का अनुमान है। विभाग ने मौजूदा स्थिति को सामान्य बताया है, लेकिन निगरानी बढ़ा दी गई है।
बैराज, तटबंधों और नियंत्रण कक्षों में अधिकारियों और कर्मचारियों को अलर्ट रखा गया है। नदी के जलस्तर और जलश्राव पर लगातार नजर रखी जा रही है। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से आने वाले पानी की जानकारी भी लगातार जुटाई जा रही है।
इस साल 14 जुलाई को 2.24 लाख क्यूसेक पहुंचा था पानी
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल 14 जुलाई को गंडक नदी में अधिकतम जलश्राव 2 लाख 24 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया था। वहीं 2024 में 28 सितंबर को गंडक का जलश्राव 5 लाख 62 हजार 500 क्यूसेक तक पहुंच गया था। इसकी तुलना में इस बार संभावित अधिकतम जलश्राव काफी कम रहने का अनुमान है।
इसके बावजूद नेपाल में अचानक आई बाढ़ को देखते हुए बिहार सरकार किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। संबंधित जिलों में अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
बिहार में सरकार अलर्ट, लोगों से कहा- घबराएं नहीं
नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड और गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार सरकार ने संबंधित इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को कहा कि नेपाल से आने वाले जलप्रवाह की लगातार जानकारी ली जा रही है और संभावित स्थिति से निपटने के लिए विभाग तैयार है।
फिलहाल बिहार में स्थिति सामान्य बताई जा रही है। अधिकारियों को तटबंधों की निगरानी के साथ-साथ नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
नेपाल में आई इस अचानक बाढ़ ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदा के खतरे को सामने ला दिया है। वहां राहत और बचाव अभियान जारी है, वहीं बिहार में प्रशासन की नजर गंडक के जलप्रवाह पर बनी हुई है। फिलहाल सरकार का संदेश साफ है, घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नदी और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को पूरी तरह सतर्क रहना होगा।
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