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Lucknow : उम्र बढ़ने के साथ अक्सर महिलाओं की दुनिया घर तक सिमट जाती है। कहीं मायके जाना हो, किसी रिश्तेदार से मिलने जाना हो या किसी धार्मिक जगह की यात्रा करनी हो, तो सबसे पहले आने-जाने के किराए का हिसाब लगाया जाता है। अब उत्तर प्रदेश की 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं के लिए यह चिंता काफी हद तक खत्म होने वाली है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना’ शुरू कर बुजुर्ग महिलाओं को जिंदगीभर मुफ्त बस यात्रा की सौगात दी।
सीएम ने कहा कि यह योजना सिर्फ बस का किराया माफ करने की योजना नहीं है। यह महिलाओं को सुरक्षा से सम्मान, सम्मान से स्वावलंबन और स्वावलंबन से नेतृत्व तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योगी सरकार का यह फैसला इसलिए भी खास है, क्योंकि इसका सीधा फायदा उन महिलाओं को मिलेगा जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और जिनके लिए सफर का खर्च कई बार रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बन जाता है। योजना की शुरुआत के मौके पर सीएम ने बुजुर्ग महिलाओं को सांकेतिक कार्ड दिए। उनके चेहरे पर खुशी थी। कार्यक्रम में महिलाओं से मुख्यमंत्री ने बातचीत भी की और विशेष बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

रक्षाबंधन पर तीन दिन मुफ्त सफर, साथ में एक व्यक्ति भी
बुजुर्ग महिलाओं के लिए जिंदगीभर मुफ्त यात्रा की सुविधा तो इस योजना का स्थायी हिस्सा है, लेकिन रक्षाबंधन पर सरकार ने प्रदेश की सभी महिलाओं को भी खास तोहफा दिया है। 27, 28 और 29 अगस्त को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम और सिटी बस सेवा की बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा मिलेगी। महिला अपने साथ एक सहयात्री को भी मुफ्त यात्रा करा सकेगी। यानी भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए बहनों को इस बार किराए की चिंता नहीं करनी होगी। यह पहल उस समय और मायने रखती है, जब रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में महिलाएं अपने मायके और भाई के घर जाती हैं। बस अड्डों पर भीड़ के बीच मुफ्त यात्रा की सुविधा उनके लिए राहत लेकर आएगी।
29 अगस्त के बाद 60 प्लस महिलाओं को जिंदगीभर फायदा
मुख्यमंत्री ने साफ किया कि रक्षाबंधन की तीन दिन की सुविधा के बाद 29 अगस्त से 60 वर्ष से अधिक उम्र की उत्तर प्रदेश की सभी महिलाओं को लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना के तहत परिवहन निगम की बसों में आजीवन मुफ्त यात्रा मिलेगी। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए महिलाओं को अपना वोटर आईडी या आधार कार्ड दिखाना होगा। इसके बाद सफर का किराया सरकार वहन करेगी। सीधी सी बात है, उम्र के इस पड़ाव पर जब कई महिलाओं की अपनी नियमित आय नहीं होती, तब सफर का किराया बचना उनके लिए छोटी बात नहीं है। सरकार का यह फैसला उनकी जरूरत और सम्मान दोनों से जुड़ा नजर आता है।

नाम भी ऐसा, जो महिलाओं के आत्मसम्मान की कहानी कहता है
योजना का नाम लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर महिला स्वावलंबन, सुशासन, न्याय और भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की महान प्रतीक थीं। उन्होंने काशी विश्वनाथ, सोमनाथ समेत देश के कई धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ऐसे व्यक्तित्व के नाम पर योजना शुरू करना अपने आप में इस बात का संकेत है कि सरकार महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति के रूप में देखती है। इसी सोच के साथ कामकाजी महिलाओं के लिए बनाए जा रहे छात्रावासों का नाम भी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर रखा जा रहा है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, काशी और झांसी समेत कई शहरों में ऐसे छात्रावास बनाए जा रहे हैं।
सीएम योगी बोले- बेटी सिर्फ सुरक्षित न रहे, आगे भी बढ़े
मुख्यमंत्री की बातों में एक बात बार-बार दिखाई दी कि महिलाओं को सिर्फ सुरक्षा देने से काम नहीं चलेगा। उन्हें आगे बढ़ने का मौका भी देना होगा। सीएम योगी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल यह नहीं है कि बेटी घर पहुंचने के बाद सुरक्षित रहे। वह घर से निकले, नौकरी करे, कारोबार करे और जरूरत पड़े तो रात में काम करके भी सुरक्षित अपने घर लौटे। इसी सोच के साथ महिलाओं को सुरक्षा प्रावधानों के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने का अवसर देने के लिए नीतिगत बदलाव किए गए हैं। सीएम के मुताबिक 2017 से पहले प्रदेश में करीब 12 प्रतिशत महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी थीं। अब यह आंकड़ा 36 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। सरकार इसे कम से कम 50 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।

सुरक्षा व्यवस्था में भी महिलाओं पर खास जोर
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति केंद्र, एआई आधारित सेफ सिटी नेटवर्क, 1090 और 112 जैसी व्यवस्थाएं काम कर रही हैं। महिला बीट पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है। उन्होंने बताया कि 2017 में प्रदेश में करीब 10 हजार महिला पुलिसकर्मी थीं। अब इनकी संख्या करीब 45 हजार हो गई है। नई भर्ती के बाद यह संख्या और बढ़ेगी। तीन महिला पीएसी बटालियन भी बनाई गई हैं। इनके नाम वीरांगना ऊदा देवी पासी, अवंतीबाई लोधी और झलकारीबाई कोरी के नाम पर रखे गए हैं। पिंक बूथ और वन स्टॉप सेंटर जैसी सुविधाएं भी महिलाओं के लिए शुरू की गई हैं।
घर की चाबी से लेकर बैंक खाते तक महिलाओं को अधिकार
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण की बात केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि महिला का सम्मान तभी पूरा होगा, जब उसके घर में शौचालय हो, रसोई धुआंमुक्त हो, बिजली और नल का पानी हो और सरकारी सहायता सीधे उसके खाते में पहुंचे। स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन और डीबीटी जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि इनसे महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को घरौनी के जरिए मालिकाना अधिकार मिलने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही। करीब 65 लाख परिवारों को आवास दिए गए हैं और इनमें महिलाओं को भी मालिकाना हक दिया गया है।
बेटी की पढ़ाई से शादी तक सरकार की योजनाएं
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के जरिए बेटी के जन्म से लेकर स्नातक स्तर तक पढ़ाई के अलग-अलग चरणों में आर्थिक मदद दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत बेटी की शादी के लिए एक लाख रुपये की सहायता का प्रावधान बताया गया। निराश्रित महिला पेंशन, वृद्धावस्था पेंशन और दिव्यांगजन पेंशन के जरिए करीब 1.10 करोड़ परिवारों को सालाना 12 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी भी दी गई। और अब एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्टूबर-नवंबर में स्नातक स्तर पर पढ़ाई कर रही 50 हजार बेटियों को स्कूटी उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
गांव की महिलाएं अब कारोबार की तरफ बढ़ रहीं
महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकालकर कमाई से जोड़ने के लिए स्वयं सहायता समूहों को खेती, पशुपालन, फूड प्रोसेसिंग, हैंडीक्राफ्ट और रिटेल जैसे कामों से जोड़ा जा रहा है। करीब 8 हजार न्याय पंचायतों में डिजिटल उद्यमी तैयार करने की योजना है। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं डिजिटल कारोबार से जुड़ेंगी। लखपति दीदी, बीसी सखी, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी और नमो ड्रोन दीदी जैसी योजनाओं के जरिए महिलाएं बैंकिंग, तकनीक और खेती से जुड़ रही हैं। प्रदेश के 31 जिलों में काम कर रहीं मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों के जरिए चार लाख से ज्यादा महिलाओं के आर्थिक रूप से आगे बढ़ने की बात मुख्यमंत्री ने कही।

फैसला सिर्फ बस यात्रा का नहीं, सोच बदलने का भी
लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना को अगर सिर्फ मुफ्त बस यात्रा की नजर से देखा जाए तो यह एक सरकारी सुविधा भर लगेगी। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे महिलाओं के जीवन से जोड़कर जिस तरह पेश किया, उसमें इसका दायरा बड़ा नजर आता है। एक बुजुर्ग महिला के लिए मुफ्त बस यात्रा का मतलब सिर्फ कुछ रुपये बचना नहीं है। इसका मतलब है कि वह अपने मायके जा सकती है, अपने बच्चों से मिलने जा सकती है, धार्मिक यात्रा कर सकती है और अपने जरूरी काम के लिए किसी दूसरे पर आर्थिक रूप से निर्भर हुए बिना सफर कर सकती है।
यही इस योजना की सबसे अच्छी बात है। सरकार ने 60 साल पार कर चुकी महिलाओं की एक ऐसी जरूरत को पहचाना है, जिसे अक्सर छोटी बात समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अब रक्षाबंधन पर तीन दिन मुफ्त यात्रा से शुरू हुई यह सुविधा 29 अगस्त के बाद जिंदगीभर साथ चलेगी।
कार्यक्रम में परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। योजना पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। मुख्यमंत्री ने महिलाओं से संवाद किया और विशेष बसों को रवाना किया। इस दौरान सांसद ब्रजलाल, विधान परिषद सदस्य इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, उमेश द्विवेदी, डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, विधायक डॉ. नीरज बोरा, ओपी श्रीवास्तव, अमरेश कुमार, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी और अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल समेत कई लोग मौजूद रहे।
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