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Nepal : नेपाल में पिछली भीषण तबाही को अभी दो महीने भी पूरे नहीं हुए थे कि रविवार को एक बार फिर जल प्रलय ने दस्तक दे दी। गोरखा जिले में बूढ़ी गंडक नदी अचानक उफान पर आ गई और देखते ही देखते चारों तरफ हाहाकार मच गया। तड़के करीब चार बजे जब लोग गहरी नींद में थे, तभी सैलाब गांवों में घुसने लगा। जान बचाने के लिए ग्रामीण आनन-फानन में अपने घरों को छोड़कर ऊंचाई वाले इलाकों की तरफ भागे। इस अचानक आई बाढ़ में कई बस्तियां जलमग्न हो गईं, 35 से अधिक मकान और संपर्क पुल पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गए। हादसे के बाद से चार लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में स्थानीय प्रशासन और राहत दल जुटे हुए हैं।
बुढीगण्डकी नदीमा आएको बाढीपश्चात् खोज तथा उद्धार कार्यका लागि नेपाली सेनाको फौज हवाई तथा स्थल मार्गबाट खटिई पहिरोको जोखिममा रहेको जगत इलाकाबाट ६ जनाको हवाई उद्धार गरेको । काठमाडौँमा रहेको composite quick reaction team समेत हवाई साधनबाट उक्त इलाकामा तैनाथ भएको । https://t.co/nCCqo5zdCB
— Nepali Army (@NepaliArmyHQ) October 11, 2026
भूस्खलन से बनी झील फटने की आशंका
नदी के जलस्तर में अचानक आए इस भयानक उछाल की वजह पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है, लेकिन शुरुआती जांच में पहाड़ों पर लैंडस्लाइड को जिम्मेदार माना जा रहा है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, सिउरीबास के ऊपरी हिस्से में बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ था। स्थानीय लोगों का मानना है कि चुमनुब्री इलाके में बूढ़ी गंडक की सहायक नदी स्यार का रास्ता मलबे से बंद हो गया था। रास्ता रुकने से ऊपर पानी जमा होने लगा और एक अस्थाई झील बन गई। जब पानी का दबाव बढ़ा तो यह झील टूट गई और लाखों क्यूसेक पानी प्रचंड वेग के साथ नीचे की ओर बह निकला, जिससे रास्ते में आने वाली हर चीज तबाह हो गई।
नेपाल की बूढ़ी गंडकी नदी में फिर से बाढ़ आई है। पानी का फ्लो देखिए, एकदम भयावाह है। 20 से ज्यादा घर बाढ़ में बह गए हैं। सरकार ने अलर्ट जारी करते हुए लोगों से ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए कहा है। https://t.co/fliQRx5tmg
— Sachin Gupta (@Sachingupta) October 11, 2026
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह, दर्जनों परिवार बेघर
चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के वार्ड अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बाढ़ के थपेड़ों से सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी किनारे बसे कई आशियाने पूरी तरह उजड़ गए हैं। गांवों को जोड़ने वाला मुख्य पुल बह जाने से इलाके का संपर्क भी कट गया है। इस आपदा की मार गंडकी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर भी पड़ी है, जहां पानी घुसने से भारी मशीनें और कीमती उपकरण बह गए। चुमनुब्री नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुंग का कहना है कि नुकसान इतना व्यापक है कि उसका सही अंदाजा लगाना फिलहाल मुमकिन नहीं है। राहत की बात यह है कि समय रहते भागने की वजह से अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बेघर हुए परिवारों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
दो महीने पुराने जख्म फिर से हरे हुए
इस ताजा सैलाब ने स्थानीय लोगों के दिलों में दो महीने पुरानी त्रासदी की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं। इससे पहले 26 अगस्त को जब त्रिशूली और भोटेकोशी नदी में प्रलय आई थी, तब पूरे के पूरे गांव नक्शे से मिट गए थे। उस आपदा में 1455 से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी और 5 हजार से अधिक लोग अब भी लापता हैं। उस महाविनाश के घाव अभी भरे भी नहीं थे कि बूढ़ी गंडक के इस नए कहर ने नेपाल के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें और डर दोनों को कई गुना बढ़ा दिया है।
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