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Ranchi : सुबह का वक्त था। मांडर प्रखंड कार्यालय परिसर में भीड़ धीरे-धीरे बढ़ रही थी। कुछ लोग हाथ में फाइल दबाए खड़े थे, कुछ अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच साधारण से पहनावे में, बिना किसी औपचारिक मंचीय शोर के राकेश रौशन शिविर स्थल पर पहुंचे और सीधे उन काउंटरों की ओर बढ़ गए, जहां लोग अपनी समस्याएं लेकर खड़े थे। वह रांची जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव हैं। लेकिन इस दिन वह सिर्फ एक अधिकारी नहीं थे, बल्कि सैकड़ों लोगों के लिए उम्मीद की आवाज बनकर सामने थे। राकेश रौशन वहां न्यायामूर्ति सह झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा निर्देश पर सदस्य सचिव झालसा कुमारी रंजना अस्थाना और न्यायायुक्त सह रांची डालसा के अध्यक्ष अनिल कुमार मिश्रा-1 के मार्गदर्शन में पहुंचे थे।
कागजों के पीछे छिपी परेशानियों को सुनते हुए
शिविर में राकेश रौशन हर काउंटर पर रुकते रहे। कहीं किसी वृद्ध महिला की पेंशन रुकी हुई थी, तो कहीं मजदूर का श्रम कार्ड नहीं बन पाया था। वे खुद लोगों से पूछते रहे, “अब तक आवेदन कहां अटका है?” “किस विभाग से परेशानी हो रही है?” उनका तरीका सीधा था। पहले पूरी बात सुनना और फिर संबंधित विभाग के अधिकारी से वहीं समाधान निकालने की कोशिश करना।
अधिकारी नहीं, समाधानकर्ता की भूमिका में
इस मेगा कानूनी सशक्तिकरण शिविर का आयोजन डालसा यानी जिला विधिक सेवा प्राधिकार, रांची द्वारा किया गया था। कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। राकेश रौशन की जिम्मेदारी सिर्फ आयोजन तक सीमित नहीं थी। वे पहले से ही पीएलवी के माध्यम से गांव-गांव ऐसे लोगों की पहचान कराने में जुटे थे, जो वर्षों से सरकारी योजनाओं से बाहर रह गए थे। इसी तैयारी का असर शिविर में साफ दिखाई दे रहा था।

मांडर में जब 1158 लोगों को मिला सीधा लाभ
मांडर प्रखंड में आयोजित शिविर में 1158 लाभुकों के बीच लगभग 7 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया। इसमें अलग-अलग विभागों की योजनाओं से जुड़ी सामग्री, स्वीकृति पत्र और सहायता शामिल थीं। राकेश रौशन ने मंच से ज्यादा समय लोगों के बीच बिताया। उन्होंने कहा कि यह शिविर केवल लाभ सामग्री बांटने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उन लोगों को व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास है, जो अब तक किसी कारण से पीछे रह गए थे।
“कानून सबके लिए है”, यही बात बार-बार दोहराते रहे
शिविर के दौरान डालसा सचिव बार-बार एक ही बात कहते दिखे कि गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए कानून तक पहुंच आसान बनाना ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार का असली काम है। उन्होंने लोगों को बताया कि अगर किसी को जमीन विवाद, घरेलू समस्या, मजदूरी, पेंशन या किसी अन्य विषय में कानूनी परेशानी हो, तो वे बिना किसी शुल्क के सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
अनुच्छेद 39-ए को जमीन पर उतारने की कोशिश
डालसा सचिव राकेश रौशन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत हर नागरिक को न्याय तक समान पहुंच का अधिकार है और जिला विधिक सेवा प्राधिकार उसी उद्देश्य को व्यवहार में उतारने का प्रयास कर रहा है। उनके अनुसार, केवल कानून की किताबों में अधिकार होना काफी नहीं है, जरूरी यह है कि गांव के अंतिम व्यक्ति तक उसकी जानकारी पहुंचे।
टोल फ्री नंबर और लोक अदालत की जानकारी भी दी
शिविर में मौजूद लोगों को नालसा यानी राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल फ्री नंबर 15100 की जानकारी भी दी गई, ताकि किसी भी कानूनी समस्या में लोग सीधे सहायता ले सकें। साथ ही आगामी 14 मार्च को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के बारे में भी बताया गया, जहां मामलों का त्वरित और आपसी सहमति से समाधान किया जाता है।
एक दिन, पूरा जिला और एक ही सोच
इस मेगा शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि एक ही दिन पूरे रांची जिले के सभी 18 प्रखंडों में एक साथ शिविर आयोजित किए गए। इनमें अनगड़ा, बेड़ो, बुंडू, बुड़मू, ईटकी, कांके, खेलारी, मांडर, नगड़ी, नामकुम, ओरमांझी, राहे, रातू, सोनाहातू और तमाड़ भी शामिल थे। राकेश रौशन की निगरानी में सभी प्रखंडों में पहले से लाभुकों की सूची तैयार की गई थी। इसका नतीजा यह रहा कि शिविर में वही लोग पहुंचे, जिन्हें वास्तव में मदद की जरूरत थी।
जब काउंटर से लौटते लोगों के चेहरे बदले हुए थे
दोपहर ढलने लगी थी। कई लोग अपने कागज संभालते हुए बाहर निकल रहे थे। किसी के हाथ में स्वीकृति पत्र था, तो किसी को पहली बार यह जानकारी मिली थी कि उसे मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है। राकेश रौशन दूर खड़े यह दृश्य देख रहे थे। उनसे पूछा गया कि इतने बड़े आयोजन के बाद उन्हें सबसे बड़ी संतुष्टि क्या है। उन्होंने संक्षेप में कहा, “अगर आज किसी एक परिवार को भी यह भरोसा मिला है कि वह अकेला नहीं है, तो हमारा काम सफल है।” इस मेगा कानूनी सशक्तिकरण शिविर में उनका नाम मंच से ज्यादा लोगों की बातचीत में सुनाई दिया। शायद इसलिए, क्योंकि राकेश रौशन एक अधिकारी से ज्यादा, व्यवस्था और आम आदमी के बीच सेतु बनकर खड़े थे।
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