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Patna : राजधानी पटना को अब बड़े शहरों की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बनाने का प्रस्ताव सामने आया है। नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एनबीसीसी ने सीएम सम्राट चौधरी के सामने इसका प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही शहर की कई सरकारी जमीनों पर नए निर्माण और पुराने भवनों के पुनर्विकास की भी योजना बनाई जा रही है। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं से पटना में करीब 4 हजार करोड़ रुपए का निवेश हो सकता है और लगभग 8 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की संभावना है।
सीएम सम्राट चौधरी ने गुरुवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में पटना की अलग-अलग सरकारी जमीन और वहां होने वाले निर्माण कार्यों की समीक्षा की। बैठक में उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शहर में उपलब्ध सरकारी जमीन और परिसंपत्तियों का अधिकतम इस्तेमाल किया जाए। विकास ऐसा हो कि आने वाले समय में पटना की बढ़ती आबादी और जरूरतों को भी संभाला जा सके।
कई इलाकों की सरकारी जमीन पर नए निर्माण की तैयारी
बैठक में एनबीसीसी ने पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर बनाने के साथ कई अन्य जमीनों के पुनर्विकास का प्रस्ताव भी रखा। इसमें बिहार म्यूजियम के सामने नेहरू पथ की जमीन, गर्दनीबाग, भूतनाथ सेक्टर-6 और बोरिंग कैनाल रोड की जमीन शामिल है। इन जगहों पर मौजूदा सरकारी परिसंपत्तियों का आकलन कर जरूरत के मुताबिक नए भवन और दूसरी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि पटना को आधुनिक शहर के रूप में विकसित करने के लिए ऐसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने पुराने और जर्जर सरकारी भवनों की पहचान कर उनकी जगह जरूरत के हिसाब से नए भवन बनाने के निर्देश दिए। साथ ही जिन सरकारी जमीनों का अभी पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उनका भी बेहतर उपयोग करने को कहा।
सरकार की योजना सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहेगी। गया, भागलपुर, बेगूसराय और दरभंगा में भी उपयुक्त सरकारी जमीन की पहचान की जाएगी। इन जमीनों पर शहर की जरूरत के हिसाब से विकास की योजना तैयार की जाएगी। इससे इन शहरों में भी सरकारी जमीन का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और विकास को एक तय योजना के तहत आगे बढ़ाया जा सकेगा।
2 हजार एकड़ में पाटलिपुत्र टाउनशिप की योजना
सीएम सम्राट चौधरी ने ‘पाटलिपुत्र टाउनशिप’ के लिए करीब 2 हजार एकड़ जमीन में विकास की कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। इसके अलावा दूसरे टाउनशिप के लिए करीब 1 हजार एकड़ जमीन को ध्यान में रखते हुए भी योजना बनाने का निर्देश दिया गया है। पटना के अलग-अलग इलाकों में मौजूद सरकारी जमीन को चिह्नित कर मास्टर प्लान तैयार करने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जमीन की पहचान और योजना बनाने का काम जल्द पूरा किया जाए, ताकि निर्माण और पुनर्विकास का काम बिना अनावश्यक देरी के शुरू किया जा सके। बैठक में निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ पर्यावरणीय मानकों का पालन करने पर भी जोर दिया गया। परियोजनाओं में ‘जीरो वेस्ट मॉडल’ अपनाने की बात कही गई, ताकि निर्माण और उसके बाद के संचालन में कचरे को कम से कम रखा जा सके।

4 हजार करोड़ का निवेश, 8 हजार करोड़ राजस्व का अनुमान
एनबीसीसी के प्रस्ताव के अनुसार पटना में अलग-अलग परियोजनाओं के जरिए करीब 4 हजार करोड़ रुपए के निवेश की संभावना है। इन परियोजनाओं से करीब 8 हजार करोड़ रुपए का राजस्व मिलने का अनुमान लगाया गया है। सरकार की कोशिश है कि सरकारी जमीन का इस्तेमाल सिर्फ भवन बनाने तक सीमित न रहे, बल्कि उससे शहर को बेहतर सुविधाएं और सरकार को लंबे समय में राजस्व भी मिल सके।
सीएम सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन को जल्द चिह्नित किया जाए और उसके बाद विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखते हुए काम को समय पर पूरा करने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना के समग्र और सुनियोजित विकास के लिए सरकारी जमीन और परिसंपत्तियों का सही तरीके से इस्तेमाल जरूरी है।
बैठक में नगर विकास एवं आवास सह सूचना प्रावैधिकी मंत्री नीतीश मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, ग्रामीण कार्य सह सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अनिमेष परासर, विशेष सचिव नीलेश रामचन्द्र देवरे, पटना के नगर आयुक्त यशपाल मीणा और एनबीसीसी के चेयरमैन डॉ. के.पी. महादेव स्वामी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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