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Patna : अशोक राजपथ से गुजरते हुए जब आप PMCH यानी पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के परिसर में कदम रखते हैं, तो दशकों पुरानी धूल, सीलन और तीमारदारों की बेबसी वाली तस्वीर अब धीरे-धीरे पीछे छूटती दिखती है। गंगा किनारे खड़े इस ऐतिहासिक अस्पताल की पहचान अब सिर्फ पुराने इतिहास से नहीं, बल्कि चमचमाती बहुमंजिला इमारतों और अत्याधुनिक मशीनों से हो रही है। सोमवार को जब सीएम सम्राट चौधरी ने पुनर्विकास योजना के तहत बने नए टावर-3 का शिलापट्ट हटाकर उद्घाटन किया, तो बिहार और पड़ोसी राज्यों से उम्मीद लेकर आने वाले लाखों गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा और आधुनिक सुविधाओं का द्वार खुल गया। अब यहां एक साथ ढाई हजार मरीजों को भर्ती कर इलाज देने की व्यवस्था तैयार हो चुकी है।
“अस्पताल की इमारतें और मशीनें चाहे जितनी आधुनिक हो जाएं, लेकिन असली सुकून तभी मिलेगा जब हर विभाग में तालमेल पुख्ता हो और किसी भी मरीज या उसके परिजन को इलाज के लिए भटकना न पड़े। अब 2500 बेड पर आधुनिक इलाज तो मिलेगा ही, व्यवस्था ऐसी रखनी होगी कि आम आदमी को अस्पताल में पूरा सम्मान और त्वरित राहत मिले।” -सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार
लंबी कतारों से मुक्ति दिलाएगा डिजिटल काउंटर, बच्चों के लिए बना आधुनिक पीकू वार्ड
नए टावर-3 में घुसते ही सबसे बड़ा बदलाव ग्राउंड फ्लोर पर दिखता है। पहले जहां पर्ची कटाने के लिए सुबह चार बजे से पसीने में लथपथ होकर कतार में खड़ा होना पड़ता था, अब वहां स्मार्ट कियोस्क और व्यवस्थित काउंटरों का ढांचा तैयार है। मुख्यमंत्री ने खुद ग्राउंड फ्लोर पर पहुंचकर रजिस्ट्रेशन और मरीजों के लिए बने कैफेटेरिया की व्यवस्था समझी। इसके बाद लिफ्ट से सीधे पांचवें फ्लोर का रुख किया गया, जहां बच्चों की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बने खास पीकू वार्ड का फीता काटा गया। यह वही अस्पताल है जहां बच्चों की नाजुक हालत में वेंटिलेटर या मॉनिटर वाला बेड मिलना सबसे बड़ी चुनौती माना जाता था। नए भवन में पीकू के साथ-साथ महिलाओं के लिए बना विशेष आईसीयू, प्रसवोत्तर वार्ड, नर्स स्टेशन और मरीजों के परिजनों के बैठने का प्रतीक्षालय पूरी तरह वातानुकूलित और आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है।

छठे तल पर सर्जरी का नया ढांचा, पहले फ्लोर पर रेडियोलॉजी की जांचें
अस्पताल की पांचवीं और छठी मंजिल को पूरी तरह से क्रिटिकल केयर और सर्जरी के लिए तैयार किया गया है। छठे फ्लोर पर बने 22 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से सर्जरी से जुड़े उपकरणों की जानकारी ली। मॉड्यूलर ओटी होने का सीधा मतलब यह है कि ऑपरेशन के दौरान इन्फेक्शन का खतरा न के बराबर रहेगा। स्त्री रोग से जुड़ी जटिल सर्जरी के लिए भी अलग से ओटी ब्लॉक बनाए गए हैं। जांच के लिए मरीजों को अब बाहर के निजी सेंटरों पर जेब ढीली नहीं करनी पड़ेगी, क्योंकि पहले फ्लोर पर रेडियोलॉजी विभाग को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने नीचे आकर बीमार बच्चों को दुलारा और उन्हें पोषण किट बांटी। डॉक्टरों के साथ बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि मशीनें और इमारतें चाहे जितनी शानदार बन जाएं, असली सुकून तभी मिलेगा जब डॉक्टर और स्टाफ का व्यवहार मरीजों के दर्द पर मरहम लगाने जैसा हो।

विभागों में तालमेल की हिदायत और आगे की तैयारी
नए भवन के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि पुरानी व्यवस्था की खामियां इस नए परिसर में नहीं दिखनी चाहिए। ओपीडी, जांच घर, वार्ड और दवा काउंटर के बीच ऐसा तालमेल बने कि मरीज को किसी एक पर्ची के लिए एक कोने से दूसरे कोने तक चक्कर न काटने पड़ें। उन्होंने अस्पताल के नियमित मेंटेनेंस और बाकी बचे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया।

इस ऐतिहासिक मौके पर सरकार और प्रशासन का पूरा अमला मौजूद रहा। दोनों उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव, स्वास्थ्य मंत्री निशांत, सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव, स्थानीय विधायक और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत सहित PMCH के तमाम सीनियर डॉक्टर इस नई शुरुआत के गवाह बने। सालों से स्ट्रेचर और बेड के अभाव का दंश झेलने वाले पीएमसीएच के लिए यह नया टावर स्वास्थ्य सेवा की एक नई सुबह की तरह नजर आता है।

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“अस्पताल की इमारतें और मशीनें चाहे जितनी आधुनिक हो जाएं, लेकिन असली सुकून तभी मिलेगा जब हर विभाग में तालमेल पुख्ता हो और किसी भी मरीज या उसके परिजन को इलाज के लिए भटकना न पड़े। अब 2500 बेड पर आधुनिक इलाज तो मिलेगा ही, व्यवस्था ऐसी रखनी होगी कि आम आदमी को अस्पताल में पूरा सम्मान और त्वरित राहत मिले।” -सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार