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Hazaribagh : हजारीबाग का उरीमारी कोलियरी क्षेत्र आम दिनों में अपनी रफ्तार से चलता है। शिफ्ट बदलती है, मजदूर आते जाते हैं और खदान की मशीनों की आवाज माहौल में घुली रहती है। लेकिन इसी इलाके में एक ऐसी साजिश पल रही थी, जो अगर समय रहते न रोकी जाती, तो खूनखराबे और दहशत में बदल सकती थी। यह साजिश थी कुख्यात राहुल दूबे गैंग की, जिसका मकसद था रंगदारी न देने वालों को गोलीबारी कर डराना।
एसपी को मिली गुप्त सूचना, जिसने बदल दी तस्वीर
हजारीबाग पुलिस कप्तान अंजनी अंजन को एक गुप्त सूचना मिली। खबर साफ थी कि कुछ अपराधी हथियारों के साथ उरीमारी इलाके में बड़ी वारदात को अंजाम देने वाले हैं। ऐसी सूचनाएं अक्सर आती हैं, लेकिन इस बार इनपुट सटीक था और समय कम था। एसपी ने बिना देरी किए बड़कागांव एसडीपीओ पवन कुमार के नेतृत्व में SIT का गठन कर दिया। टीम को साफ निर्देश थे, घटना से पहले अपराधियों तक पहुंचना है।
होटल के पास पहला झटका
पुलिस टीम ने इलाके में सघन निगरानी शुरू की। इसी दौरान रिलैक्स होटल के पास एक संदिग्ध युवक पर नजर पड़ी। घेराबंदी कर जब उसे पकड़ा गया, तो उसके पास से लोडेड पुलिस कार्बाइन और एक देशी पिस्टल बरामद हुई। गिरफ्तार युवक की पहचान राजदीप कुमार साव के रूप में हुई, जो लातेहार जिले के बालुमाथ थाना क्षेत्र का रहने वाला है। हथियार देखकर साफ हो गया कि मामला साधारण नहीं है।
पूछताछ में खुलने लगी परतें
कड़ाई से पूछताछ करने पर राजदीप टूट गया। उसने कबूल किया कि वह राहुल दूबे और आशीष साव के हुक्म पर उरीमारी पहुंचा था। मकसद था कोलियरी क्षेत्र में फायरिंग कर रंगदारी के लिए दबाव बनाना। पूछताछ में उसने एक और अहम खुलासा किया। गैंग की महिला सदस्य मुनिका कुमारी के पास और हथियार छुपे हुए हैं।
एक घर, कई हथियार
पुलिस टीम तुरंत केरेडारी थाना क्षेत्र के हेन्देगीर गांव पहुंची। मुनिका कुमारी के घर की तलाशी ली गई तो वहां से हथियार और गोलियां निकल आयी। एक लोडेड देशी पिस्टल, AK-47 की चार मैग्जीन, SLR की पांच मैग्जीन और जिन्दा राउंड बरामद किए गए। एक छोटे से घर में छुपाया गया यह सामान बताता था कि गैंग किसी छोटी वारदात की नहीं, बल्कि बड़े डर का माहौल बनाने की तैयारी में था।
महिला की भूमिका और गैंग का नेटवर्क
इस मामले में महिला आरोपी की गिरफ्तारी ने पुलिस को भी चौंकाया। मुनिका कुमारी सिर्फ गैंग की सदस्य नहीं थी, बल्कि हथियारों को छुपाने और सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी उसी के पास थी। गैंग का नेटवर्क योजनाबद्ध और संगठित तरीके से काम कर रहा था।
समय पर कार्रवाई, बड़ा नुकसान टला
अगर यह फायरिंग होती, तो कोलियरी क्षेत्र में तहलका मच सकता था। मजदूरों की जान खतरे में पड़ती और इलाके में दहशत का माहौल बन जाता। लेकिन पुलिस की सतर्कता और तेज कार्रवाई ने इस साजिश को कागज पर ही खत्म कर दिया।
टीमवर्क से मिली सफलता
इस पूरे ऑपरेशन में बड़कागांव एसडीपीओ पवन कुमार, सर्किल इंस्पेक्टर ललित कुमार, गिद्दी थानेदार राणा भानु प्रताप सिंह, उरीमारी ओपी प्रभारी स्थु उरांव और केरेडारी थानेदार विवेक कुमार की अहम भूमिका रही। पुलिस ने साफ कर दिया है कि जिले में रंगदारी और हथियार के दम पर दहशत फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।
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