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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : “पात्र रैयतों को मुआवजा मिलने में किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। अगर कहीं फाइल अटकी है तो उसकी वजह पता कर तुरंत दूर करें।” सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में भू-अर्जन मामलों की समीक्षा के दौरान डीसी ऋतुराज ने अधिकारियों को यह साफ संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जमीन अधिग्रहण के बाद मुआवजे के लिए रैयतों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। दस्तावेज पूरे हैं तो भुगतान की प्रक्रिया भी समय पर पूरी होनी चाहिए। किसी स्तर पर लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
डीसी ने जिला भू-अर्जन कार्यालय के कामकाज की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान एनएचएआई, भारतमाला, चुटूपालू घाटी, ललकीघाटी, बरलांगा-कसमार और एनएच-33 मांडू से जुड़े जमीन अधिग्रहण और मुआवजा मामलों की स्थिति जानी गई। उन्होंने अधिकारियों से लंबित मामलों की जानकारी ली और निर्देश दिया कि जिन मामलों में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है, उन्हें बिना देर किए निपटाया जाए।
रैयतों को दफ्तर के चक्कर नहीं, विशेष कैंप में होगी सुनवाई
डीसी ऋतुराज ने कहा कि मुआवजे से जुड़े लंबित मामलों को खत्म करने के लिए संबंधित क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाए जाएं। इन कैंपों में रैयतों की समस्या मौके पर सुनी जाएगी। उनके दस्तावेजों की जांच की जाएगी और जहां जो प्रक्रिया बाकी है, उसे पूरा कराने की कोशिश होगी। इसका मकसद यही है कि छोटी-छोटी वजहों से महीनों से अटकी फाइलों का जल्द निपटारा हो सके।
उन्होंने अधिकारियों को रैयतों की वंशावली, भू-स्वामित्व प्रमाण-पत्र और दूसरे जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन तेजी से करने को कहा। कागजात सही पाए जाने के बाद मुआवजा राशि सीधे संबंधित रैयत के बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। अगर किसी दस्तावेज में कमी है तो रैयत को इसकी जानकारी देकर उसे समय पर पूरा कराने को कहा गया है।
डीसी ने अधिकारियों को यह भी समझाया कि जमीन देने वाले रैयतों को अपने हक के पैसे के लिए अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रशासनिक प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन उसका असर पात्र लोगों के भुगतान पर नहीं पड़ना चाहिए। जिन मामलों में कोई कानूनी या दस्तावेजी अड़चन नहीं है, उन्हें प्राथमिकता से निपटाने को कहा गया।
सीमांकन की अड़चन दूर होगी तो तेज होगा विकास कार्य
समीक्षा बैठक में जमीन के सीमांकन से जुड़े विवादों पर भी चर्चा हुई। चुटूपालू घाटी, ललकीघाटी, एनएच-33 मांडू, बरलांगा-कसमार और भारतमाला परियोजनाओं में जहां भू-अर्जन या सीमांकन को लेकर परेशानी है, वहां जल्द समाधान निकालने का निर्देश दिया गया। डीसी ने कहा कि जमीन से जुड़ी प्रक्रिया पूरी होने में देरी का असर सीधे विकास परियोजनाओं पर पड़ता है। इसलिए संबंधित विभाग और अंचल अधिकारी आपसी समन्वय से मामलों का समाधान करें।
उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित निगरानी करने और तय समय-सीमा में कार्रवाई पूरी करने को कहा। साथ ही स्पष्ट किया कि मुआवजा भुगतान या भू-अर्जन की प्रक्रिया में बेवजह देरी मिली तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि पात्र रैयतों को उनका मुआवजा समय पर मिले और जमीन अधिग्रहण से जुड़ी बाधाएं दूर होने के बाद विकास परियोजनाओं का काम भी तेजी से आगे बढ़े।
बैठक में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पथ निर्माण विभाग और एनएचएआई के प्रतिनिधि, संबंधित अंचलाधिकारी तथा भू-अर्जन शाखा के कर्मचारी मौजूद थे। उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
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