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Patna : भागलपुर के खरीक प्रखंड में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर नदी का दबाव लगातार बना हुआ है। सोमवार तड़के करीब 2 बजे E-Nose के डाउनस्ट्रीम में नदी के तेज कटाव से राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का करीब 30 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद जल संसाधन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बचाव का काम तेज कर दिया है। दोनों कटे हुए सिरों को रोकने और पानी के फैलाव को नियंत्रित करने के लिए रिंग बांध बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
रातभर नदी से जूझती रही टीम, फिर भी नहीं थमा कटाव
जल संसाधन विभाग के अनुसार, 23 अगस्त की रात से ही E-Nose के डाउनस्ट्रीम हिस्से में गंगा का दबाव बहुत ज्यादा था। स्थिति को देखते हुए रात से ही लगातार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया जा रहा था। नदी की तेज धारा के कारण कर्मचारी और अभियंता लगातार कटाव रोकने में जुटे रहे, लेकिन सुबह करीब 2 बजे नदी ने बांध के करीब 30 मीटर हिस्से को नुकसान पहुंचा दिया।
कटाव के बाद विभाग ने दोनों कट-एंड को रोकने के लिए रिंग बांध बनाने का काम शुरू किया है। इसका मकसद पानी को फैलने से रोकना और क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करना है। विभाग का कहना है कि मौके पर लगातार काम चल रहा है और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।
कटाव को रोकने के लिए मौके पर करीब 2.50 लाख बालू भरे बोरे उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा 20 नाव, 16 ट्रैक्टर, एक पोकलेन और दो जेसीबी मशीन लगाई गई हैं। करीब 250 मजदूर दिन-रात काम में जुटे हुए हैं। अधिकारियों की निगरानी में लगातार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य कराया जा रहा है।
26 जुलाई से लगातार कटाव, पहले भी 110 मीटर हिस्सा हुआ था प्रभावित
काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध गंगा के बाएं किनारे पर बना है। इसकी कुल लंबाई करीब 6.50 किलोमीटर है और इस पर पांच नोज बने हुए हैं। बांध के दूसरी तरफ नदी के बीच में शोल बन जाने से गंगा की धारा का दबाव सीधे बांध की ओर बढ़ गया है। मानसून शुरू होने के बाद से ही यहां नदी का दबाव बना हुआ है।
26 जुलाई को गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी की अंडरमाइनिंग कार्रवाई के चलते D-Nose के पास करीब 110 मीटर लंबाई में कटाव दिखाई दिया था। सूचना मिलते ही मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता, बाढ़ नियंत्रण अंचल भागलपुर और अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने मौके पर कैंप कर दिन-रात बचाव कार्य कराया। 27 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे कटाव को नियंत्रित कर लिया गया था।
इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से को मजबूत करने के लिए 110 मीटर लंबाई में छह मीटर चौड़ा एनसी बेस तैयार किया गया। बंबू रोल और हाथी पांव लगाकर भी सुरक्षा का काम कराया गया। D-Nose के अपस्ट्रीम में नदी के दबाव को देखते हुए 250 मीटर लंबाई में 10 मीटर के अंतराल पर 25 स्लोपिंग बेड बार बनाए गए।
26 जुलाई से 24 अगस्त तक बांध के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर कटाव होता रहा। हर बार विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य कराया और प्रभावित हिस्से को सुरक्षित रखने की कोशिश की। लगातार बनी स्थिति को देखते हुए विभाग ने मौके पर अतिरिक्त अभियंताओं की तैनाती भी की है।
अधिकारियों की टीम कैंप कर रही, फरक्का बराज के गेट खोलने की मांग
बांध की सुरक्षा के लिए पहले से तैनात एक सहायक अभियंता और चार कनीय अभियंताओं के अलावा पालीवार निगरानी के लिए एक सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंताओं की टीम लगाई गई है। एक अतिरिक्त कार्यपालक अभियंता की भी तैनाती की गई है। 17 अगस्त से अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की विशेष टीम मौके पर कैंप कर रही है। सभी अधिकारी पालीवार स्थल की निगरानी कर रहे हैं।
भागलपुर के जिला पदाधिकारी और वरीय पुलिस अधीक्षक भी मौके का निरीक्षण कर चुके हैं। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार स्थिति की जानकारी ले रहे हैं। फिलहाल विभाग का पूरा ध्यान बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने और गंगा के पानी को फैलने से रोकने पर है।
गंगा में बढ़ते जलस्तर के बीच पानी की निकासी तेज करने के लिए फरक्का बराज को लेकर भी बिहार सरकार ने पहल की है। जल संसाधन विभाग ने फरक्का बराज के जीएम को पत्र भेजकर गंगा के जलश्राव की जल्द निकासी का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने भी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कर फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का अनुरोध किया है।
बराज के गेटों के संचालन की ताजा स्थिति की जानकारी लेने के लिए बिहार सरकार की ओर से एक टीम फरक्का बराज भेजी गई है। इधर, राघोपुर बांध पर बचाव कार्य लगातार जारी है। विभाग के अधिकारी और मजदूर मौके पर कैंप कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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