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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी के कड़े नियमों और पाबंदियों का सरेआम मजाक बनाया जा रहा है। जब पूरा शहर गहरी नींद में सो रहा होता है, तब दामोदर की छाती चीरकर बालू का अवैध धंधा पूरी रफ्तार पकड़ लेता है। सिरका, अरगड्डा और बुंडू के घाटों से हर रोज तड़के चार बजे बालू से लदे ट्रैक्टरों का काफिला निकलता है। हैरानी की बात यह है कि ये ट्रैक्टर किसी सुनसान पगडंडी से नहीं, बल्कि रामगढ़ थाना के ठीक बगल से सीना तानकर शहर के भीतर दाखिल होते हैं। सुबह आठ बजे तक चलने वाला यह खुला खेल जिले की पुलिस और खनन महकमे की मुस्तैदी के सारे दावों की हवा निकाल रहा है।
थाने की नाक के नीचे से खेल, फिर भी गश्ती दल बेखबर
अंधेरे का फायदा उठाकर शुरू होने वाला यह खेल सुबह होते-होते पूरी तरह बेखौफ हो जाता है। स्थानीय बाशिंदों की मानें तो भोर के वक्त बालू लदे ट्रैक्टरों की कतारें आम हो चुकी हैं। यह सवाल हर किसी की जुबान पर है कि आखिर 24 घंटे अलर्ट रहने का दावा करने वाली पुलिस को थाने की दीवार से सटकर गुजरते दर्जनों ट्रैक्टर क्यों नहीं दिखते। अगर इन गाड़ियों के पास वैध चालान और जरूरी कागजात हैं, तो दिन के उजाले में इनकी जांच क्यों नहीं की जाती। और अगर यह सब अवैध है, तो फिर खाकी की खामोशी मिलीभगत के गंभीर आरोपों को हवा दे रही है। शहर में गश्त लगाने वाली गाड़ियां भी इस दौरान सड़कों पर होती हैं, लेकिन उनकी नजरें इन ट्रैक्टरों पर कभी नहीं पड़ती।


हादसों से भी नहीं जागा महकमा, लोगों में भारी गुस्सा
अभी कुछ ही दिन पहले नई सराय के पास इसी तरह अंधाधुंध दौड़ रहे एक बालू लदे ट्रैक्टर ने एक मासूम बच्चे की जान ले ली थी। उस दर्दनाक हादसे के बाद भी न तो रफ्तार पर लगाम लगी और न ही अवैध ढुलाई का यह धंधा थमा। सुबह टहलने निकलने वाले बुजुर्गों और स्कूल जाने की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए ये बेकाबू ट्रैक्टर साक्षात यमराज बनकर सड़कों पर दौड़ते हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने जांच का जो पुराना रटा-रटाया भरोसा दिया था, वह अब ठंडे बस्ते में नजर आ रहा है।
कागजात खंगालने और साठगांठ की जांच की उठी मांग
शहर के लोगों ने अब जिला प्रशासन और उच्चाधिकारियों से आर-पार की जांच की मांग उठाई है। लोगों का साफ कहना है कि घाट से लेकर शहर के गोदामों तक चलने वाले इस पूरे नेटवर्क को बेनकाब किया जाए। तड़के निकलने वाले एक-एक ट्रैक्टर को रोककर उसके बालू के स्रोत, खनन की अनुमति और परिवहन चालान की कड़ी जांच होनी चाहिए। साथ ही इस बात की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है कि बालू माफिया को किसका संरक्षण हासिल है और थाने के पास से बिना रोक-टोक गुजरने की छूट उन्हें किस कीमत पर मिल रही है।
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