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Ranchi : रात का वक्त था। आसपास के घरों में लोग गहरी नींद में थे। घड़ी की सुई करीब 1:30 बजे का वक्त बता रही थी। तभी हरमू के इलाही नगर में इम्तियाज के घर से धधकती आग की लपटों ने सबको चौंका दिया। देखते ही देखते आग इतनी तेज हो गई कि परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी चल रही थी, वही घर कुछ ही देर में आग के हवाले हो गया।
इम्तियाज के लिए यह सिर्फ एक घर का जलना नहीं है। यह उस जिंदगी का उजड़ना है, जिसे उन्होंने दिन-रात मेहनत करके धीरे-धीरे खड़ा किया था। ठेला चलाकर परिवार का पेट पालने वाले इम्तियाज ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि एक रात ऐसी भी आएगी, जब सुबह आंख खुलेगी तो घर की पहचान ही राख के ढेर में बदल चुकी होगी।
रात में लगी आग, सबकुछ कर गया खाक
आग लगने की खबर मिलते ही परिवार में खलबली मच गई। रात के अंधेरे में सबसे पहले जान बचाने की चिंता हुई। आग ने इतनी तेजी से घर को अपनी चपेट में लिया कि सामान निकालने का मौका ही नहीं मिला। देखते ही देखते घर में रखा जरूरी सामान जलने लगा।
कपड़े, बिस्तर और रोजमर्रा की जरूरत का सामान आग की लपटों में समाता चला गया। परिवार के लोग अपनी आंखों के सामने अपनी गृहस्थी को जलते देखते रहे। गरीब परिवार के लिए जिस सामान को जुटाने में महीनों और वर्षों की मेहनत लगती है, वह कुछ ही देर में राख हो गया।
सुबह हुई तो इम्तियाज के सामने एक ऐसा मंजर था, जिसे देखना भी शायद उनके लिए आसान नहीं था। घर में बिखरी राख और जला हुआ सामान उस रात की पूरी कहानी बयां कर रहा था। कभी जिस जगह परिवार बैठता था, वहीं अब उजड़ी हुई गृहस्थी दिखाई दे रही थी।
ठेला चलाकर कमाते हैं, अब घर दोबारा बसाने की चिंता
इम्तियाज ठेला चलाकर परिवार का गुजारा करते हैं। उनकी रोज की कमाई ही परिवार की जिंदगी का सहारा है। सुबह से शाम तक मेहनत करने के बाद जो पैसा मिलता है, उससे घर का राशन आता है और बच्चों की जरूरतें पूरी होती हैं। बड़ी कमाई नहीं है, लेकिन उसी छोटी कमाई से उन्होंने अपने परिवार की जिंदगी को किसी तरह आगे बढ़ाया है।
गरीबी में घर बसाना आसान नहीं होता। एक-एक चीज जोड़कर गृहस्थी तैयार होती है। कभी थोड़ा पैसा बचाकर बिस्तर खरीदा होगा, कभी जरूरत का कोई दूसरा सामान। कई चीजें शायद पुरानी थीं, लेकिन परिवार के लिए उनका महत्व बहुत बड़ा था। अब आग ने उन सभी चीजों को एक झटके में खत्म कर दिया।
इम्तियाज के सामने अब दोहरी चिंता है। एक तरफ परिवार का पेट पालना है और दूसरी तरफ जली हुई गृहस्थी को फिर से खड़ा करना है। जिस कमाई से रोज का चूल्हा जलता है, उसी कमाई से घर का सामान जुटाना उनके लिए कितना मुश्किल होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
राख के बीच खड़ी उम्मीद, अब मदद का इंतजार
इस हादसे के बाद परिवार की नजर अब प्रशासन और समाज की मदद पर है। पीड़ित परिवार ने सरकार और जिला प्रशासन से आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा देने की मांग की है। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से परिवार की स्थिति का जायजा लेकर राहत पहुंचाने की अपील की है।
इम्तियाज के लिए मदद का मतलब सिर्फ कुछ पैसे मिल जाना नहीं है। इसका मतलब है फिर से घर में चूल्हा जलना, परिवार के लिए जरूरी सामान जुटना और जिंदगी का पहिया दोबारा पटरी पर आना।
गरीबी में जी रहे परिवार के लिए आग ने सिर्फ सामान नहीं जलाया है, बल्कि कई दिनों की चैन छीन ली और आने वाले दिनों की चिंता भी बढ़ा दी है। फिर भी उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। इम्तियाज आज भी मेहनत करना जानते हैं। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इस मुश्किल वक्त में कोई उनका हाथ थाम ले।
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