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Ranchi : अक्सर अदालतों का जिक्र होते ही जेहन में तारीख पर तारीख, पुलिस की गाड़ियां और फाइलों के अंबार की सख्त दुनिया उभरती है। लेकिन शनिवार को रांची के व्यवहार न्यायालय परिसर में लगी तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत ने यह साबित कर दिया कि कानून की किताबों के भीतर एक बेहद संवेदनशील दिल भी धड़कता है। यहां 367 करोड़ रुपये से ज्यादा के पुराने वित्तीय विवाद सुलझाए गए। साथ ही बरसों से टूटे हुए इंसानी रिश्तों और उजड़ चुकी जिंदगियों को एक नई सुबह भी मिली।
सलाखों के पीछे बीती आधी उम्र, अब समाज में सिर उठाकर जीने की राह मिली
इस लोक अदालत में सबसे भावुक कर देने वाली कहानी मोगो कच्छप की रही। एक हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मोगो ने अपनी जिंदगी के 16 लंबे साल जेल की चारदीवारी के पीछे गुजारे। जब वे रिहा होकर बाहर आए, तो दुनिया पूरी तरह बदल चुकी थी। अपनों की बेरुखी और समाज की नज़रों में चुभते सवालों के बीच उनके लिए मुख्यधारा में लौटना पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल हो गया था। निराशा के इस दौर में जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के काउंसलर पीएन सिंह ने उनका हाथ थामा।


पूरे एक हफ्ते तक चली काउंसलिंग ने मोगो के भीतर जीने की उम्मीद दोबारा जगाई। शनिवार को जब मोगो मंच पर पहुंचे, तो उनके हाथ खाली नहीं थे। डालसा की पहल पर श्रम विभाग ने उनका जॉब कार्ड बनवाया, दो लाख रुपये का बीमा कराया और बेटी के भविष्य के लिए कन्यादान योजना से जोड़ा। एनएलयू के सहयोग से 10 हजार रुपये की फौरी आर्थिक मदद का चेक सौंपा गया। इसके साथ ही राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और अबुआ आवास की प्रक्रिया भी मौके पर ही शुरू कराई गई, ताकि मोगो फिर कभी खुद को लाचार न समझें।
दर्द के उस खौफनाक मंजर पर मरहम, राहुल को मिले 12 लाख रुपये
तेजाब का हमला सिर्फ शरीर को नहीं झुलसाता, बल्कि इंसान के पूरे वजूद को हिलाकर रख देता है। ऐसे ही एक दर्दनाक हादसे का दंश झेल रहे राहुल कुमार को झारखंड पीड़ित मुआवजा योजना के तहत 12 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा गया। मंच पर जब यह चेक सौंपा गया, तो वहां मौजूद हर आंख नम थी। यह रकम राहुल के पुराने दर्द को मिटा तो नहीं सकती, लेकिन इलाज के भारी खर्च और आगे के सफर में उनके लिए एक बड़ा संबल जरूर बनेगी। इसके अलावा हत्या के एक मामले में पीड़िता सुशीला देवी को भी 5 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक न्यायायुक्त द्वारा दिया गया।

अदालत के गलियारे में भूली गईं पुरानी तल्खियां, माला पहनाकर फिर थामे एक-दूसरे के हाथ
कानून की चौखट कभी-कभी बिछड़े हुए दिलों को मिलाने का जरिया भी बन जाती है। खुशबू साहू और उनके पति संजय कुमार के बीच चल रहा विवाद फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण के मुकदमे तक जा पहुंचा था। दोनों के बीच कड़वाहट इतनी बढ़ चुकी थी कि बात तलाक की कगार पर थी। लेकिन लोक अदालत में जब मध्यस्थों ने दोनों को आमने-सामने बैठाकर बातचीत कराई, तो पुरानी गलतफहमियों की परतें उतरती चली गईं। दोनों ने अपनी गलतियां मानीं और नई शुरुआत करने पर राजी हो गए। जब दोनों ने न्यायायुक्त के सामने एक-दूसरे को फूल-माला पहनाई, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
सड़क हादसे के पीड़ित को 37 लाख तो चेक बाउंस के भारी विवाद में भी बनी सहमति
एक सड़क दुर्घटना में अपनों को खोने या गंभीर रूप से घायल होने वाले परिवार को 37 लाख 34 हजार 770 रुपये का मुआवजा दिलाया गया, जिससे पीड़ित परिवार को कानूनी लड़ाई के लंबे फेर से राहत मिली। वहीं व्यापारिक खींचतान और 96 लाख रुपये के चेक बाउंस का एक पुराना और उलझा हुआ मामला भी नालसा की मध्यस्थता मुहिम के जरिए महज 54 लाख रुपये में शांतिपूर्वक सुलझा लिया गया। बिना किसी कटुता के दोनों कारोबारियों ने हाथ मिलाया और अपने-अपने रास्ते बढ़ गए।

9 लाख से ज्यादा वादों का निस्तारण, आपसी समझौते से जीती इंसानियत
हाईकोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद द्वारा धनबाद से वर्चुअल उद्घाटन के बाद रांची में 58 अलग-अलग बेंचों पर दिनभर मामलों की सुनवाई चली। न्यायायुक्त अनिल कुमार मिश्रा प्रथम और डालसा सचिव राकेश रौशन की देखरेख में कोर्ट के 48,076 लंबित और 8.65 लाख से ज्यादा प्री-लिटिगेशन मामलों का शांतिपूर्वक निपटारा हुआ। अदालत का यह दिन सिर्फ आंकड़ों के बड़े रिकॉर्ड के लिए नहीं, बल्कि उन चेहरों की मुस्कान के लिए याद रखा जाएगा, जिन्होंने यहां से जाते वक्त राहत की सांस ली।
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