अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
Ranchi : रांची के कांके थाना क्षेत्र में हुए राजन तिर्की हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित संजय गाड़ी समेत उसके दो साथियों आकाश महली उर्फ चुद्ध और नीतिन उरांव को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से हत्या में इस्तेमाल 7.65 एमएम की पिस्टल, एक जिंदा गोली, एक खोखा, बाइक और तीन मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। महज कुछ रुपयों के लिए दोस्तों के बीच हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक युवक की जान चली गई।
खून के धब्बे देख नदी तक पहुंची पुलिस, ड्रोन से तलाशा शव
डीएसपी अमर कुमार पांडेय के अनुसार, आठ सितंबर की रात पुलिस को चौड़ी बस्ती स्थित मसना के पास फायरिंग की सूचना मिली थी। जब गश्ती दल मौके पर पहुंचा तो वहां कोई घायल नहीं मिला, लेकिन सड़क पर ताजे खून के निशान बिखरे पड़े थे। पुलिस ने जब उन निशानों का पीछा किया तो वे पोटपोटो नदी के किनारे तक पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने अनहोनी की आशंका में नदी और आसपास के झाड़ियों में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। शव की तलाश के लिए ड्रोन कैमरे की भी मदद ली गई। तीन दिन की कड़ी मशक्कत के बाद 11 सितंबर की सुबह जयप्रकाश नगर के पास नदी में एक शव तैरता मिला। परिजनों ने मृतक की शिनाख्त कांके के चामा निवासी राजन तिर्की के तौर पर की। राजन के दाहिने कान के पास गोली लगने का गहरा घाव था।

कार के एडवांस से पार्टी मांगने पर भड़का विवाद
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपित संजय गाड़ी ने हाल ही में एक कार बेचने का सौदा किया था, जिसके एवज में उसे नौ हजार रुपये एडवांस मिले थे। राजन तिर्की और उसके साथी संजय पर इन्हीं रुपयों से पार्टी देने का दबाव बना रहे थे। आठ सितंबर की रात सभी लोग चौड़ी बस्ती मसना के पास जुटे थे। वहां पार्टी के दौरान रुपयों की बात को लेकर संजय और राजन के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। बात इतनी बिगड़ गई कि संजय ने आपा खो दिया और अपनी कमर में खोंसी 7.65 एमएम की पिस्टल निकालकर सीधे राजन पर फायर झोंक दिया। गोली लगते ही राजन की मौके पर ही मौत हो गई।
सबूत मिटाने के लिए पानी में बहा दी थी लाश
वारदात को अंजाम देने के बाद पकड़े जाने के डर से आरोपितों ने साक्ष्य मिटाने की योजना बनाई। संजय ने अपने साथी आकाश और नीतिन की मदद से राजन के शव को घसीटते हुए पोटपोटो नदी तक पहुंचाया और पानी के तेज बहाव में फेंक दिया। आरोपितों को लगा था कि शव बह जाएगा और किसी को कुछ पता नहीं चलेगा। पुलिस ने तकनीकी तफ्तीश और मुखबिरों से मिले सुराग के आधार पर तीनों को दबोच लिया। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्य आरोपित संजय गाड़ी का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ साल 2022 में सुखदेवनगर थाने में चोरी और चोरी का सामान रखने की धाराओं में केस दर्ज हुआ था। पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की छानबीन कर रही है।
इसे भी पढ़ें : BRICS सम्मेलन को बम धमाके की धमकी, जांच की आंच देवघर तक

