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Ranchi : रांची में अपराध की दुनिया का एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया। एक तरफ छड़-सिमेंट कारोबारी पर 20 लाख की सुपारी लेकर जानलेवा हमला कराया गया, तो दूसरी तरफ चर्चित अनिल टाइगर हत्याकांड की साजिश भी उसी नेटवर्क से जुड़ी निकली। इस पूरे मामले एक शख्स का नाम उछल कर सामने आया… वह है अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ सूरज सिन्हा। उम्र करीब 32 साल। एसपी गौरव गोस्वामी के मुताबिक, सूरज सिर्फ एक अपराधी नहीं, बल्कि ऐसा शख्स बन चुका था जो पैसों के बदले हत्या की साजिश रचता, शूटरों का जुगाड़ करता और फिर खुद पर्दे के पीछे छिप जाता था। कोलकाता से गिरफ्तारी के बाद अब रांची पुलिस की जांच में अपराध, जमीन विवाद, सुपारी किलिंग और गैंग नेटवर्क की कई परतें खुल रही हैं।
कटहल मोड़ की वो दोपहर, जब गोलियों से दहल उठा इलाका
15 अक्टूबर 2025… कटहल मोड़ का इलाका हमेशा की तरह व्यस्त था। दुकानों पर ग्राहक थे, सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही चल रही थी। इसी बीच सांभवी इंटरप्राइजेज के मालिक राधेश्याम साहु अपनी दुकान के बाहर खड़े थे। तभी बाइक पर सवार दो युवक वहां पहुंचे। किसी को कुछ समझ आता, उससे पहले ताबड़तोड़ गोलियां चलने लगीं। आसपास मौजूद लोग दहशत में इधर-उधर भागने लगे। कुछ ही सेकेंड में पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा। राधेश्याम साहु खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। हमलावर मौके से फरार हो गए, जबकि स्थानीय लोग घायल कारोबारी को अस्पताल लेकर भागे। उस दिन कटहल मोड़ में सिर्फ एक हमला नहीं हुआ था, बल्कि यह संदेश देने की कोशिश थी कि अपराधियों का नेटवर्क कितना संगठित और खतरनाक हो चुका है।
पुलिस के लिए चुनौती बन गया था ‘सूरज’
हमले के बाद रांची पुलिस हरकत में आई। एसएसपी के निर्देश पर एसआईटी बनाई गई। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, मोबाइल लोकेशन ट्रैक की गई और अपराधियों के नेटवर्क पर नजर रखी गई। जांच में धीरे-धीरे दो शूटर पुलिस के हत्थे चढ़ गए। लेकिन हर पूछताछ में एक ही नाम सामने आ रहा था, सूरज सिन्हा। एसआईटी को पता चला कि हमला सिर्फ रंगदारी या पुरानी दुश्मनी का मामला नहीं था। इसके पीछे बाकायदा सुपारी दी गई थी। एसपी के मुताबिक, सूरज सिन्हा खुद सामने नहीं आता था। वह शूटरों का इंतजाम करता, ठिकाने तय करता और पूरी योजना को दूर बैठकर ऑपरेट करता था। घटना के बाद वह लगातार ठिकाने बदल रहा था।
कोलकाता में छिपा था मास्टरमाइंड
रांची पुलिस की टेक्निकल सेल लगातार सूरज की लोकेशन ट्रैक कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि वह कोलकाता में पनाह ले रखा है। इसके बाद एक स्पेशल टीम बनाई गई। कई दिनों तक निगरानी के बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जब पूछताछ शुरू हुई, तो अपराध की ऐसी कहानी सामने आई जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। सूरज ने कबूल किया कि राधेश्याम साहु की हत्या के लिए उसे 20 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। उसने शूटरों की व्यवस्था की और हमले की पूरी प्लानिंग तैयार करवाई।
अनिल टाइगर हत्याकांड से जुड़ गया पूरा मामला
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को एक और बड़ा सुराग मिला। सूरज सिन्हा का नाम चर्चित अनिल महतो उर्फ अनिल टाइगर हत्याकांड में भी सामने आया। 26 मार्च 2025 को कांके चौक स्थित शिव मंदिर के पास एक होटल में अनिल टाइगर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस घटना ने रांची में सनसनी फैला दी थी। अनिल टाइगर इलाके में दबंग छवि वाला व्यक्ति माना जाता था। उसका स्थानीय जमीन विवादों में दखल रहता था और कई लोग उसे मध्यस्थ के तौर पर देखते थे। पुलिस जांच में पता चला कि कांके के चामगुरु मौजा में 10 एकड़ जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। अनिल टाइगर स्थानीय जोतकारों की ओर से बातचीत कर रहा था। लेकिन विवाद खत्म नहीं हो पा रहा था।
जमीन, पैसे और हत्या की साजिश
पुलिस का दावा है कि जमीन पर कब्जा और बिक्री में लगातार दिक्कत आने के बाद अनिल टाइगर को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई। यहीं से सूरज सिन्हा की एंट्री हुई। एसपी गौरव गोस्वामी के अनुसार, देवव्रत नाथ शाहदेव ने सूरज के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। इसके लिए पांच लाख रुपये की सुपारी तय हुई। जांच में बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे भेजने के सबूत भी मिले हैं। पुलिस का कहना है कि हत्या की प्लानिंग रांची और कोलकाता दोनों जगहों पर हुई थी। सूरज को मोबाइल और सिम कार्ड तक उपलब्ध कराए गए। इसके बाद अनिल टाइगर की गतिविधियों की रेकी करवाई गई और फिर होटल के पास उसकी हत्या कर दी गई।
अपराध की दुनिया में तेजी से बना नेटवर्क
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सूरज सिन्हा के खिलाफ रांची, बोकारो और हजारीबाग समेत कई जिलों में गंभीर मामले दर्ज हैं। हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और आपराधिक साजिश जैसे केसों में उसका नाम सामने आ चुका है। जांच अधिकारियों का कहना है कि सूरज धीरे-धीरे ऐसे अपराधी के रूप में उभर रहा था, जो सीधे वारदात में कम और पर्दे के पीछे रहकर नेटवर्क चलाने में ज्यादा सक्रिय था। पुलिस को शक है कि उसका संपर्क राज्य के बाहर सक्रिय अपराधियों से भी था। यही वजह है कि वह हर बड़ी घटना के बाद झारखंड छोड़कर दूसरे राज्यों में छिप जाता था। एसपी ने बताया कि फिलहाल पुलिस सूरज सिन्हा से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि क्या हाल के दिनों में हुई अन्य आपराधिक घटनाओं में भी इस गिरोह की भूमिका रही है। सुनें क्या बता गया रांची के रुरल एसपी गौरव गोस्वामी…
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— News Samvad (@newssamvaad) May 16, 2026
सरहानीय रही इनकी भूमिका
इस सुपारी सिंडिकेट को ध्वस्त करने में ASP सह कांके थानेदार साक्षी जमुआर, सीनियर डीएसपी अमर कुमार पांडेय, डीएसपी अरविंद कुमार, दलादली टीओपी प्रभारी सत्य प्रकाश उपाध्याय, एसआई संदीप राज, एएसआई अरूण कुमार अकेला और बलेन्द्र कुमार की भूमिका सराहनीय रही।
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