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Ranchi : बिजली जब समय पर आती है तो लोग राहत की सांस लेते हैं। लेकिन शायद ही कोई सोचता है कि तारों, ट्रांसफर्मर और फील्ड में खड़े उन लोगों के बारे में, जो हर मौसम में काम करते हैं। इन्हीं में बड़ी संख्या मानव दिवस कर्मियों की है, जो वर्षों से चुपचाप जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अब वही कर्मी आने वाली बहाली में अपने हक की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसी उम्मीद को लेकर झारखंड ऊर्जा विकास श्रमिक संघ का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक के. श्रीनिवासन से धुर्वा स्थित कार्यालय में मिला।
बारिश, धूप, तूफान… ड्यूटी हर हाल में
संघ के केंद्रीय अध्यक्ष अजय राय ने मुलाकात के दौरान कहा कि मानव दिवस कर्मियों ने कभी हालात का बहाना नहीं बनाया। तेज बारिश हो, कड़कड़ाती ठंड हो या चिलचिलाती धूप, ये कर्मी फील्ड में डटे रहे। कई बार जोखिम उठाकर बिजली आपूर्ति बहाल की, ताकि गांव और शहर अंधेरे में न रहें। कई ऐसे भी मामले हैं, जब ड्यूटी के दौरान हादसे हुए। कुछ कर्मियों ने अपनी जान तक गंवाई। ऐसे में संघ का कहना है कि जब नियमित बहाली की बात हो रही है, तो इन वर्षों की सेवा और अनुभव को नजरअंदाज करना ठीक नहीं होगा।
बहाली में प्राथमिकता की मांग क्यों
संघ ने ज्ञापन में साफ कहा है कि वर्ष 2016 और 2017 की तरह इस बार भी मानव दिवस कर्मियों को प्राथमिकता दी जाए। उस समय नियुक्ति प्रक्रिया में उन्हें मौका मिला था। अब भी वही व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। इसके साथ ही आयु सीमा में पांच साल की छूट देने की बात कही गई है। कई कर्मी लंबे समय से काम कर रहे हैं, लेकिन नियमित बहाली न होने के कारण उम्र सीमा पार करने की कगार पर हैं। उनका कहना है कि अगर अब मौका नहीं मिला तो वर्षों की मेहनत बेकार हो जाएगी।
2014 की सूची बने आधार
संघ ने यह भी मांग रखी कि वर्ष 2014 में विभागीय सर्वे के आधार पर तैयार सूची को सेवा गणना का आधार बनाया जाए। साथ ही 2014 के बाद से काम कर रहे कर्मियों को भी उनके वास्तविक अनुभव के आधार पर वरीयता मिले। संघ का तर्क है कि अनुभवी कर्मी विभाग की कार्यप्रणाली समझते हैं। उन्हें दोबारा से प्रशिक्षण देने की जरूरत कम होगी और काम भी तेजी से होगा।
एजेंसी व्यवस्था पर सवाल
एक और बड़ा मुद्दा एजेंसी व्यवस्था का है। संघ ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा होनी चाहिए। या तो प्रत्यक्ष नियुक्ति की पुरानी व्यवस्था लागू की जाए, या फिर एकल एजेंसी के जरिए पारदर्शी प्रणाली अपनाई जाए। कर्मियों का मानना है कि बार-बार एजेंसी बदलने से असुरक्षा की भावना बढ़ती है और स्थायित्व नहीं मिल पाता।
दिवंगत कर्मियों के परिवारों का सवाल
ड्यूटी के दौरान जिन दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की मृत्यु हो गई, उनके परिवार आज भी अनिश्चितता में हैं। संघ ने मांग की है कि ऐसे मामलों में आश्रितों को रोजगार देने के लिए स्पष्ट और मानवीय नीति बनाई जाए। उनका कहना है कि जो परिवार विभाग के लिए अपना सदस्य खो चुका है, उसे अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।

प्रबंधन ने दिया भरोसा
सीएमडी के. श्रीनिवासन ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभागीय हित और कर्मियों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाकर फैसला लिया जाएगा। बैठक के बाद संघ ने उम्मीद जताई कि इस बार बहाली प्रक्रिया में मानव दिवस कर्मियों के साथ न्याय होगा।
प्रतिनिधिमंडल में अजय राय के अलावा महामंत्री अमित कुमार कश्यप, अमित शुक्ला, अनिकेत सिंह, मुकेश साहू, श्याम दीप कुमार और रामू कुमार भी शामिल थे। जीएम एचआर सुनील दत्त खाखा को भी ज्ञापन सौंपा गया।
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