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Chapra : बिहार के सारण जिले में खाद्यान्न और राहत सामग्री बांटने के दौरान खाकी का अमानवीय चेहरा सामने आया है। मकेर थानेदार सब-इंस्पेक्टर संग्राम कुमार सिंह पर जनता की सुरक्षा के बजाय उन पर ही सरकारी पिस्टल तानने का गंभीर आरोप लगा है। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रोशन कुमार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए थानेदार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
राहत सामग्री बांटने के दौरान तान दी थी पिस्टल
वायरल वीडियो के अनुसार इलाके में आई बाढ़ के कारण लोग पहले से ही परेशान थे और प्रशासन की तरफ से राहत सामग्री बांटी जा रही थी। राहत सामग्री लेने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण जमा हुए थे। भीड़ अधिक होने के कारण वहां धक्का-मुक्की और अव्यवस्था का माहौल बनने लगा। मौके पर कानून-व्यवस्था संभालने पहुंचे मकेर थानेदार संग्राम कुमार सिंह हालात को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित करने के बजाय अपना आपा खो बैठे। बात इतनी बढ़ गई कि उन्होंने कमर से अपनी सरकारी पिस्टल निकाली और सीधे मदद की उम्मीद में खड़े ग्रामीणों की ओर तान दी।
थानेदार द्वारा पिस्तौल ताने जाने की इस घटना को वहां मौजूद कुछ युवकों ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया। कुछ ही घंटों में यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा गया और सोशल मीडिया पर पुलिस के इस व्यवहार की तीखी आलोचना होने लगी। लोगों का कहना था कि मुश्किल वक्त में मदद देने आई पुलिस का यह रवैया बेहद अमानवीय और गैर-जिम्मेदाराना था।

घोर लापरवाही और मनमाना आचरण माना गया
मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में आते ही इसकी प्राथमिक जांच कराई गई। एसएसपी रोशन कुमार के जारी आदेश में स्पष्ट किया गया कि ड्यूटी के दौरान आम नागरिकों पर हथियार तानना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता, घोर लापरवाही और मनमानेपन को दर्शाता है। पुलिस का काम जनता में सुरक्षा का भाव पैदा करना है, न कि संकट के समय उन्हें डराना। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर इसे खाकी की गरिमा के खिलाफ माना गया। आरोपों की पुष्टि होने के बाद मकेर थानेदार संग्राम कुमार सिंह को फौरन सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका पुलिस लाइन मुख्यालय निर्धारित किया गया है। आदेश के मुताबिक, अब उन्हें केवल सामान्य जीवन-यापन भत्ता ही दिया जाएगा, और यह राशि भी मुख्यालय में उनकी दैनिक उपस्थिति दर्ज होने के आधार पर ही मिलेगी। इधर विभाग ने साफ कर दिया है कि जनता के साथ गलत बर्ताव करने वाले किसी भी पुलिसकर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।
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