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Simdega : खाकी वर्दी देखते ही आमतौर पर लोगों के मन में पुलिस, थाना और कार्रवाई की तस्वीर बनती है। लेकिन सिमडेगा में पुलिस की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। यहां पुलिस सिर्फ अपराध होने के बाद मौके पर पहुंचने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उससे पहले लोगों के बीच पहुंचकर उनकी बात सुन रही है, उन्हें समझा रही है और जरूरत के समय मदद का भरोसा भी दे रही है। एसपी श्रीकांत सुरेश राव खोटरे के निर्देशन में चल रहा कम्यूनिटी पुलिसिंग अभियान ‘मोर पुलिस मोय पुलिस’ इसी मानवीय सोच की झलक दिखाता है। 27 अगस्त से 2 सितंबर तक जिले के सभी थाना और ओपी क्षेत्रों में चले जनजागरूकता अभियान में पुलिसकर्मी गांवों और लोगों के बीच पहुंचे। ग्राम सभाओं में बैठकर ग्रामीणों से बातचीत की गई। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों, आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को भी इस अभियान से जोड़ा गया। इस दौरान कानून की जानकारी देने के साथ लोगों की समस्याएं सुनी गईं और उन्हें भरोसा दिलाया गया कि मुश्किल समय में पुलिस उनके साथ खड़ी है।
एसपी खोटरे ने पुलिसिंग को लोगों के करीब लाने पर दिया जोर
पुलिस और आम आदमी के बीच दूरी अक्सर छोटी-छोटी वजहों से बढ़ जाती है। कई लोग परेशानी होने के बावजूद थाना जाने से हिचकते हैं। किसी को लगता है कि शिकायत करने से विवाद बढ़ जाएगा, तो कोई कानून की जानकारी नहीं होने के कारण चुप रहना बेहतर समझता है। ऐसे माहौल में पुलिस का खुद लोगों के बीच पहुंचना काफी मायने रखता है। एसपी श्रीकांत सुरेश राव खोटरे के निर्देशन में चल रहे ‘मोर पुलिस मोय पुलिस’ अभियान की यही सबसे बड़ी खासियत है। पुलिस गांवों में जाकर लोगों से सीधे बात कर रही है। अधिकारियों और जवानों का ग्रामीणों के साथ बैठना और उनकी परेशानियां सुनना यह संदेश देता है कि पुलिस सिर्फ कार्रवाई करने वाली संस्था नहीं, बल्कि जरूरत के समय मदद करने वाली व्यवस्था भी है।
किसी महिला को ‘डायन’ बताकर जिंदगी बर्बाद करना अपराध
अभियान के दौरान डायन प्रथा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी पुलिस ने खुलकर बात की। ग्रामीणों को बताया गया कि किसी महिला या व्यक्ति को डायन बताकर प्रताड़ित करना, मारपीट करना या सामाजिक रूप से अलग-थलग करना अपराध है। यह सिर्फ कानून का मामला नहीं, बल्कि किसी इंसान की जिंदगी और सम्मान से जुड़ा सवाल है। पुलिस ने लोगों से कहा कि बीमारी या किसी पारिवारिक परेशानी का कारण किसी महिला को मानकर उसे प्रताड़ित करने के बजाय डॉक्टर और कानून की मदद लें। अंधविश्वास और अफवाहों के कारण किसी की जिंदगी खराब न हो, इसके लिए ग्रामीणों को जागरूक किया गया। मानव तस्करी को लेकर भी पुलिस ने ग्रामीणों को सावधान किया। नौकरी या किसी दूसरे बहाने से महिलाओं और बच्चों को बाहर ले जाने वाले संदिग्ध लोगों की जानकारी पुलिस को देने की अपील की गई। महिला और बच्चों के खिलाफ अपराध की जानकारी छिपाने के बजाय पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया।
युवाओं के भविष्य की चिंता, नशे से दूर रहने का संदेश
इस अभियान में युवाओं पर भी खास ध्यान दिया गया। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों से बातचीत कर पुलिस ने उन्हें नशे के नुकसान समझाए। पुलिस ने युवाओं से कहा कि नशे की शुरुआत भले ही छोटी लगे, लेकिन इसका असर पढ़ाई, परिवार, नौकरी और पूरे भविष्य पर पड़ सकता है। युवाओं की समितियां बनाकर उन्हें नशे और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता अभियान से जोड़ा गया। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि युवा सिर्फ इस अभियान के लाभार्थी नहीं, बल्कि अपने गांव और समाज में बदलाव लाने वाले साथी भी बन सकते हैं।
हादसे में मदद से लेकर साइबर ठगी तक, हर जरूरी बात समझाई
पुलिस ने ग्रामीणों को सड़क सुरक्षा और आपात स्थिति में मदद की जानकारी भी दी। किसी सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय तुरंत 112 पर सूचना देने की अपील की गई। सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय समय पर अस्पताल पहुंचाने की सलाह दी गई। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में साइबर ठगी से बचने के तरीके भी बताए गए। लोगों को अनजान लिंक से सावधान रहने, ओटीपी और बैंक संबंधी जानकारी किसी से साझा नहीं करने की सलाह दी गई। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करने और साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल का इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई।
सिमडेगा के गांवों में ‘मोर पुलिस मोय पुलिस’ का संदेश दरअसल बहुत सीधा है, पुलिस जनता से अलग नहीं है। जब गांव का कोई व्यक्ति परेशान हो, कोई बच्चा खतरे में हो, कोई महिला प्रताड़ित हो रही हो या कोई परिवार किसी संकट में फंसा हो, तो उसे अकेले नहीं लड़ना है। पुलिस तक बात पहुंचानी है।
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