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Sitamarhi : कमरे के भीतर मेज पर रखा एक देसी कट्टा, छह चमचमाती गोलियां, चाय की कुछ खाली प्यालियां और बीच में फैला किसी माइक्रो फाइनेंस कंपनी का नाम लिखा पोस्टर। दीवार घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही थी और चार जोड़ी आंखें लूट के उस बड़े खेल की उलटी गिनती गिन रही थीं, जिसे कुछ ही घंटों में अंजाम दिया जाना था। बदमाशों को लग रहा था कि उनका चक्रव्यूह तैयार है, लेकिन वे इस बात से पूरी तरह बेखबर थे कि बाहर खाकी ने उनके गिरेबान तक पहुंचने का जाल पहले ही बिछा दिया है।
दिल्ली से हरियाणा तक छका रहा था, रुन्नीसैदपुर में बिछाई बिसात
यह पूरी कहानी शुरू होती है कुख्यात अपराधी फेकन कुमार से। रीगा थाना इलाके के लूटकांड का यह शातिर कैदी पुलिस को चकमा देकर जेल और पुलिस कस्टडी से फरार हो चुका था। पुलिस महकमे के लिए उसकी फरारी नाक का सवाल बन चुकी थी। सीतामढ़ी पुलिस की स्पेशल टीमें दिन-रात खाक छान रही थी। हरियाणा की तंग गलियों से लेकर दिल्ली के ठिकानों तक, पुलिस ने दर्जनों जगहों पर दबिश दी, लेकिन फेकन हर बार पुलिस के पहुंचने से चंद मिनट पहले फिसल जाता था। वह जानता था कि राज्य के बाहर उस पर नजर है, इसलिए वह अपने ही इलाके में लौट आया और एक नए, बड़े कांड की तैयारी में जुट गया।
बैरगनिया में चूका निशाना, तो विवाह भवन को बनाया ठिकाना
फेकन सीधे रुन्नीसैदपुर नहीं पहुंचा था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पहले उसने अपने गिरोह के साथ बैरगनिया इलाके में एक बड़ी डकैती डालने का खाका खींचा था। लेकिन वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम और हालात अनुकूल न देखकर उसने ऐन वक्त पर प्लान बदला। इसके बाद गिरोह का नया ठिकाना बना रुन्नीसैदपुर का क्रांति विवाह भवन। शादी-ब्याह के लिए बने इस परिसर के एक शांत कोने में चारों बदमाश जमा हुए। निशाने पर थी इलाके की एक बड़ी माइक्रो फाइनेंस कंपनी, जहां हर शाम लाखों का कैश जमा होता था।
जब शादी के मंडप वाले परिसर में गूंजे पुलिस के बूट
लूट का समय तय हो चुका था, हथियार लोड थे, तभी जिला आसूचना इकाई यानी डीआईयू को विवाह भवन में संदिग्ध हलचल की पक्की खबर मिली। बिना एक पल गंवाए रुन्नीसैदपुर थाने की पुलिस और डीआईयू के जांबाजों ने पूरे इलाके को घेर लिया। विवाह भवन के मुख्य रास्ते से लेकर पीछे की गलियों तक, पुलिस की पोजीशन लॉक हो चुकी थी। एक झटके में कमरे का दरवाजा खुला और पुलिस अंदर दाखिल हुई। बदमाशों को संभलने या हथियार उठाने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिला। मौके पर ही फेकन कुमार, उसका खासमखास विकाश उर्फ रॉकी और शिवहर का शूटर कृष्ण कुमार दबोच लिए गए।
लाइनर की चालाकी भी नहीं आई काम, खुला जुर्म का पूरा कच्चा चिट्ठा
कमरे से हथियार और बाइक जब्त करने के बाद पुलिस ने जब कड़ाई से पूछताछ की, तो इस साजिश का चौथा किरदार भी बेनकाब हो गया। यह था अभिषेक, जो बाहर खड़े होकर फाइनेंस कंपनी की आवाजाही और पुलिस की गश्त पर नजर रख रहा था, यानी गिरोह का लाइनर। पुलिस ने तुरंत जाल बिछाकर उसे भी धर दबोचा। पूछताछ में बदमाशों ने कबूल कर लिया कि वे कंपनी को लूटने की आखिरी तैयारी कर रहे थे।
रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि फेकन कोई साधारण लुटेरा नहीं है, बल्कि उसके नाम पर रीगा, परसौनी, मेजरगंज और सीतामढ़ी के थानों में लूट, आर्म्स एक्ट, अवैध शराब और पुलिस हिरासत से भागने के कुल 11 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। वहीं रॉकी पर भी हथियारों और रंगदारी के तीन केस पहले से चल रहे हैं। हथियारों के दम पर सीतामढ़ी को दहलाने निकला यह गिरोह अब सलाखों के पीछे पहुंच गया।


