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Telangana : तेलंगाना पुलिस मुख्यालय के एक शांत कमरे में जब एक महिला ने हथियार रख दिए, तो वहां मौजूद अधिकारियों को भी कुछ पल के लिए यक़ीन नहीं हुआ। सामने खड़ी यह वही महिला थी, जिसे पुलिस सालों से बड़ी शिद्दत से ढूंढ रही थी। वही नाम, जो नक्सल आंदोलन की किताबों में खौफ बनकर दर्ज था। वह थी खूंखार सुजाता… नक्सली संगठन की ‘आयरन लेडी’।
नाम सुनते ही थर्रा उठते लोग
सुजाता नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी की सदस्य और दक्षिण सब-जोनल ब्यूरो की प्रमुख थी। वह लंबे समय से बस्तर के जंगलों में एक्टिव रही। उसके नाम से ही सुरक्षा बल चौकन्ने हो जाते थे। सरकार ने उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम रखा था। बताया जाता है कि बस्तर के कुख्यात नक्सली हिड़मा को ट्रेनिंग देने वाली भी वही थी। उसकी तुलना कई बार कुख्यात चंदन तस्कर ‘वीरप्पन’ से की गई।

पति किशनजी की मौत के बाद हुई और कठोर
अपनी जवानी के दिनों में नैन-नख्स से खूबसूरत मगर बेहद खूंखार सुजाता ने माओवादी कमांडर किशनजी से शादी की थी। पश्चिम बंगाल में हुए एक एनकाउंटर में किशनजी मारा गया था। पति किशनजी की मौत के बाद सुजाता और ज्यादा कठोर, क्रूर एवं खूंखार हो गयी। वह पहले से ज्यादा एक्टिव हो गयी और संगठन में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। लेकिन इस कठोर चेहरे के पीछे शायद एक गहरी बेचैनी पल रही थी।
2024 में उड़ी थी गिरफ्तारी की अफवाह
बीत 17 अक्टूबर 2024 में यह खबर उड़ी कि तेलंगाना पुलिस ने सुजाता को गिरफ्तार कर लिया है। खबर सुर्खियों में आई, लेकिन बाद में अफवाह साबित हुई। खुद सुजाता ने उस समय बयान जारी कर कहा था – “मेरी गिरफ्तारी की खबर झूठ है। मैं इलाज कराने आई थी।”
पर एक साल बाद वही सुजाता अब सचमुच हथियार डाल चुकी है।
सुजाता के हुक्म तय करते थे जिंदगी और मौत का फासला
नक्सली संगठन में उसे ‘आयरन लेडी’ कहा जाता था। उसके आदेश से हमले होते थे, और उसके हुक्म मौत और जिंदगी का फासला तय करते थे। लेकिन सरेंडर के वक्त उसके चेहरे पर न वह सख्ती थी, न कठोरता। वहां एक थकी हुई महिला थी, जो अब इंसानियत की ओर लौटना चाहती थी।
“बंदूक ने मुझे ताक़त दी, पर सुकून नहीं”
सरेंडर के बाद सुजाता ने कहा… “बंदूक ने मुझे ताक़त दी, पर सुकून नहीं। अब मैं चाहती हूं कि मेरी ज़िंदगी से दूसरे सीख लें। अगर मैं लौट सकती हूं, तो कोई भी लौट सकता है।”
नक्सल संगठन की हिल गयी रीढ़
आला पुलिस अधिकारियों का मानना है कि सुजाता का सरेंडर नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका है। नक्सल संगठन की रीढ़ हिल गयी है। सुजाता का सरेंडर न सिर्फ संगठन की रणनीति को कमजोर करेगा, बल्कि उन युवाओं के लिए भी एक संदेश है जो अब भी बंदूक की राह पर चल रहे हैं।
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