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Ranchi : राजधानी रांची के कांके थाना क्षेत्र के सुदर्शन चौबे के लिए नौकरी सिर्फ रोजगार नहीं थी, बल्कि घर की उम्मीद थी। परिवार की जिम्मेदारी, भविष्य की चिंता और बेहतर जिंदगी का सपना लेकर वह लगातार कोशिश कर रहे थे कि किसी बड़ी कंपनी में नौकरी मिल जाए। इसी उम्मीद ने उन्हें उस रास्ते पर पहुंचा दिया, जहां भरोसा बिक रहा था और सपने को धीरे-धीरे लूटा जा रहा था। उनके सामने जब CCL जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी का ऑफर आया, तो यह किसी वरदान से कम नहीं लगा। भरोसेमंद मेल, कंपनियों के नाम का जिक्र और 100 प्रतिशत गारंटी जैसी बातें सुनकर उन्होंने बिना ज्यादा सवाल किए पैसे देना शुरू कर दिया। उन्हें क्या पता था कि जिस नौकरी के लिए वह पैसे जमा कर रहे हैं, वह नौकरी नहीं बल्कि ठगी का पूरा खेल है।
भरोसे की सबसे बड़ी कमजोरी बना सपना
ASP साक्षी जमुआर के मुताबिक, आरोपी देवाशीष मिश्रा बेहद चालाक था। वह ऐसे मेल भेजता था जो देखने में बिल्कुल असली लगते थे। मेल में भाषा भी सरकारी और कंपनी स्टाइल की होती थी। जिससे किसी को शक नहीं होता था। पीड़ितों को लगता था कि बात किसी कंपनी के एचआर या अधिकारी से हो रही है।
धीरे-धीरे निकलते रहे पैसे, और बढ़ता रहा भरोसा
सुदर्शन चौबे की शिकायत में बताया गया कि शुरुआत में रकम कम मांगी गई। कहा गया कि यह प्रोसेसिंग फीस है, फिर मेडिकल जांच के नाम पर पैसे मांगे गए। इसके बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, ट्रेनिंग चार्ज, और ज्वाइनिंग लेटर के नाम पर लगातार रकम निकलती रही। हर बार उन्हें भरोसा दिलाया गया कि बस अब आखिरी स्टेप बाकी है। बस कुछ दिन में नौकरी लग जाएगी। यही बात सुनकर वह अपने पैसे जोड़ते रहे। कभी दोस्तों से उधार लिया, कभी रिश्तेदारों से मदद मांगी, और कभी अपनी बचत तोड़ी। कई बार जब उन्होंने सवाल किया, तो आरोपी ने उन्हें डराया भी। कहा गया कि अगर ज्यादा पूछताछ करोगे तो नौकरी कैंसिल हो जाएगी। ऐसे में डर और उम्मीद दोनों ने उन्हें चुप रहने पर मजबूर कर दिया।
परिवार को भी बनाया ठगी का हिस्सा
इस मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने पैसे अपने खाते में नहीं मंगवाए। जांच में सामने आया कि वह रकम अपने बेटे प्रियांशु मिश्रा, पत्नी ज्योति मिश्रा और बहन वंदना मिश्रा के बैंक खातों में मंगवाता था। इसका मकसद साफ था, ताकि जब जांच हो तो वह खुद को बचा सके और यह दिखा सके कि पैसे उसके खाते में नहीं आए। पुलिस ने इसी आधार पर पूरे परिवार को प्राथमिकी में अभियुक्त बनाया है।
जब उम्मीद टूट गई, तब पहुंचा मामला थाने तक
काफी समय बीत जाने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली और न ही पैसे लौटाए गए, तब सुदर्शन चौबे को यह एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है। नौकरी का सपना अब बोझ बन चुका था। पैसे भी चले गए और भरोसा भी टूट गया। इसके बाद उन्होंने कांके थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने बुलाया, पूछताछ हुई और खुल गया राज
ASP साक्षी जमुआर ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपी देवाशीष मिश्रा को थाने बुलाकर पूछताछ की गई। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। उसने पुलिस को बताया कि कैसे वह बड़ी कंपनियों के नाम पर फर्जी ईमेल बनाकर लोगों को जाल में फंसाता था और फिर अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे पैसे ऐंठता था।
ASP का साफ संदेश- मेहनत की कमाई लूटने वालों को नहीं बख्शेंगे
ASP साक्षी जमुआर ने इस मामले को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे अपराधियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि लोग नौकरी के नाम पर किसी को पैसा देने से पहले पूरी जांच करें, क्योंकि ऐसे ठग बड़े नामों का इस्तेमाल कर लोगों को भ्रमित कर देते हैं।
सलाखों के पीछे पहुंचा मुख्य आरोपी
पुलिस ने आरोपी देवाशीष मिश्रा और अन्य नामजद अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। साथ ही कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को जेल भेज दिया गया है।
अब पुलिस को शक, और भी कई लोग हो सकते हैं शिकार
मामले के जांच अधिकारी मोहम्मद कपिल अहमद के अनुसार आरोपी ने पूछताछ में पूरी बात स्वीकार कर ली है। पुलिस अब बैंक ट्रांजैक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को नौकरी का सपना दिखाकर ठगा है। संभावना है कि इस तरह के कई और पीड़ित सामने आ सकते हैं।
ASP की अपील
ASP साक्षी जमुआर ने लोगों से अपील की है कि अगर कोई शख्स नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगे, या 100 प्रतिशत गारंटी की बात करे, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं। ऐसे मामलों की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके। एएसपी का कहना है कि इस केस में आगे भी कई खुलासे हो सकते हैं और जल्द ही अन्य नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी भी की जाएगी।
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