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Ranchi : रांची की तनुश्री नायक अब कभी घर नहीं लौटेगी। 29 सितंबर की सुबह, जब PHED पहाड़ के पास कुछ लोगों ने एक युवती का शव देखा, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह वही तनुश्री है, जो कुछ दिन पहले तक अपने पैसों की वापसी के लिए जद्दोजहद कर रही थी।
तनुश्री की उम्र बहुत ज़्यादा नहीं थी, लेकिन सपने बड़े थे। मेहनत से कमाए पाई-पाई की कीमत वह जानती थी। उसी पैसे में उसका दर्द छिपा था… 80000 रुपये, जो उसने अपने पहचान के एक शख्स जयपाल सिंह को दिए थे। लेकिन यह भरोसा ही उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। पैसा लौटाने के बजाय जयपाल ने उसे धोखे की ऐसी सजा दी, जिसकी कल्पना भी तनुश्री ने नहीं की होगी।
तनुश्री बार-बार अपने पैसों की मांग करती रही। एक दिन उसने जयपाल से कहा — “भाई, बस मेरे पैसे लौटा दो, मुझे बहुत ज़रूरत है।” लेकिन जयपाल के मन में अब अपराध का अंधेरा उतर चुका था। उसने अपने दो बेटों धीरज और करण के साथ मिलकर तनुश्री को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पहले तनुश्री के फोन पे अकाउंट से जबरन ₹50,000 अपने खाते में ट्रांसफर किए, फिर उसी फोन को सबूत मिटाने के लिए इस्तेमाल किया। तनुश्री ने विरोध किया — और उसी विरोध ने उसकी जान ले ली।
हत्या के बाद जब उसका शव फुचका टोली में फेंक दिया गया, तो वह सिर्फ एक “अज्ञात युवती” बनकर रह गई। तीन दिन तक उसका शव रिम्स के शीतगृह में पहचान का इंतज़ार करता रहा। फिर तकनीकी साक्ष्य और पुलिस की अथक कोशिशों से उसका नाम सामने आया — तनुश्री नायक, ओरमांझी की बेटी।
सदर थानेदार कुलदीप कुमार ने कांड का खुलासा करने में पूरी ताकत झोंक दी । डीएसपी संजीव बेसरा के नेतृत्व में बनी टीम ने आरोपी जयपाल सिंह, धीरज कुमार सिंह और करण कुमार सिंह को गिरफ्तार किया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल चाकू, मृतका का सिम, और दो स्मार्टफोन बरामद किए। यही सबूत थे जिन्होंने तनुश्री को इंसाफ की राह पर वापस लाया।
एसएसपी राकेश रंजन के आदेश और सिटी एसपी पारस राणा की देखरेख में काम कर रही यह टीम कई दिनों से अपराधियों के ठिकानों पर निगरानी कर रही थी। तकनीकी शाखा और FSL की मदद से जुटाए गए साक्ष्यों ने केस की पूरी परतें खोल दीं।
तनुश्री की हत्या सिर्फ एक जघन्य अपराध नहीं, बल्कि उसके भरोसे का कत्ल भी था। जिस इंसान को उसने मदद की, उसी ने उसके जीवन की डोर काट दी। अब पुलिस ने तीनों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। लेकिन तनुश्री के घर में आज भी उसकी तस्वीर के आगे जलती दीपक की लौ एक सवाल पूछती है — “क्या किसी का भरोसा इतना महंगा पड़ सकता है।
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