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Palamu : झारखंड के पलामू जिले के पांकी थाना क्षेत्र के टिटही टोला में रविवार की रात एक ऐसी खामोशी उतरी, जिसने एक परिवार की दुनिया हमेशा के लिए बदल दी। 38 वर्षीय उदय यादव की मौत उस रात बस एक वारदात नहीं थी, बल्कि एक ऐसे भावनात्मक संघर्ष का अंत थी, जो पिछले डेढ़ साल से एक घर की दीवारों में धीरे-धीरे पनप रहा था। गांव का शांत माहौल उस समय सनसनी में बदल गया जब सोमवार दोपहर पुलिस ने उदय के शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा। परिजनों की आंखों में गुस्सा भी था, धोखे की चुभन भी, और सबसे ज्यादा एक ऐसा दर्द जो शब्दों में नहीं समाता।
उदय की मौत कोई दुर्घटना नहीं थी। इल्जाम है कि उसके अपने ही घर में, उसी की पत्नी रंजू देवी ने अपने आशिक चंदन पासवान के साथ मिलकर उसकी सांसें छीन लीं। परिजनों के अनुसार, दोनों के बीच डेढ़ साल से इश्क का लफड़ा चल रहा था, जिसे छिपाने की कोशिशें अब झगड़े, आरोप–प्रत्यारोप और धमकियों तक जा पहुंची थीं। भाई संजय यादव बताता है कि रंजू देवी अक्सर उदय को मरने की धमकी देती थी, लेकिन किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि धमकी सच हो जाएगी। गांव की गलियों में यह बात पहले से चर्चा में थी कि चंदन काम के सिलसिले में गांव आता-जाता रहता था और धीरे-धीरे दोनों की नजदीकियां बढ़ती गईं। चंदन पेशे ने ड्राइवर था।
रविवार की आधी रात जब गांव सो रहा था, उदय का घर एक खामोश साजिश का गवाह बन रहा था। उदय गहरी नींद में था, और शायद इस बात से पूरी तरह अनजान कि कोई ऐसा कदम उठाया जाने वाला है जो उसकी जिंदगी पर पूर्ण विराम लगा देगा। आरोप है कि रंजू और उसका आशिक कमरे में दाखिल हुए, रस्सी उसके गले में डाल दी, और कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया। घटना के बाद रंजू ने मासूमियत का दिखावा भी किया, रोई, चिल्लाई, लेकिन कमरे में पड़ी रस्सी और विरोधाभासी बातें उसके अभिनय को ज्यादा समय तक बचा नहीं सकीं। गांव के लोगों ने दोनों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया, और इसी के साथ एक खौफनाक सच सामने आ गया।
लेकिन इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा उदय की मौत नहीं उसके पीछे छूट गए दो बच्चे हैं, जिनमें एक 11 साल का है और दूसरा 8 साल का। सोमवार को जब लोग घर में जमा थे, दोनों बच्चे स्तब्ध आंखों से एक ही सवाल पूछते घूम रहे थे “पापा नहीं आएंगे?” उनकी आंखों में जो खालीपन था, वह किसी को भी अंदर तक हिला देने के लिए काफी था। उदय की बूढ़ी मां दरवाजे पर बैठी दूर तक सड़कों को ताक रही थीं, जैसे उन्हें अभी भी उम्मीद हो कि उनका बेटा कहीं से चलकर आएगा। लेकिन अब उस घर में सिर्फ यादें बची हैं और एक ऐसी चुभन, जिसे कोई शब्द नहीं भर सकता।
गांव के लोग कहते हैं कि प्रेम कभी-कभी इंसान को अंधा कर देता है, लेकिन यहां मोहब्बत के नाम पर जो हुआ, उसने इंसानियत तक को शर्मिंदा कर दिया है। एक प्रेम कहानी का अंत इस कदर दर्दनाक होगा, किसी ने सोचा भी नहीं था। टिटही टोला आने वाले कई सालों तक इस रात को याद रखेगा, वह रात, जब आशिक और माशूका की चाहत ने एक मासूम परिवार को उजाड़ दिया।
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