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Pakur (Jaydev Kumar) : पाकुड़ जिले के बाजार समिति परिसर में मंच पर प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे, सामने दर्जनों कर्मचारी बैठे थे। ये वही लोग थे, जो फाइलों, नोटिंग्स और आदेशों के बीच प्रशासनिक मशीनरी को गति देते हैं। आज वे सिर्फ काम करने नहीं, सीखने और समझने आए थे कि बेहतर प्रशासन की असली ताकत क्या होती है… टीमवर्क और समर्पण।
सम्मान और सीख का संगम
जिला प्रशासन की ओर से आयोजित “जिला अनुसचिवीय कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम” सिर्फ औपचारिक आयोजन नहीं था। यह कर्मचारियों के वर्षों के परिश्रम और योगदान का सम्मान भी था। कार्यक्रम में उन लिपिकों को सम्मानित किया गया जो वर्षों तक अपनी सेवाएं देकर सेवानिवृत्त हुए। किसी के चेहरे पर गर्व था, तो किसी की आंखों में अपने पुराने दिनों की झलक। सम्मान स्वरूप शाल और पौधा देकर यह संदेश भी दिया गया कि सेवा की जड़ें समाज में ऐसे ही मजबूत होती हैं।

जब डीडीसी ने कहा– 31 साल बाद पदोन्नति, बदलाव दिख रहा है
डीडीसी महेश कुमार संथालिया का संबोधन कर्मचारियों के दिल को छू गया। उन्होंने कहा, “डीसी सर के आने के बाद कार्य संस्कृति में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। अब कोई फाइल महीनों तक पड़ी नहीं रहती। समयबद्ध निपटारा हमारी नई पहचान है।” उन्होंने 31 वर्षों बाद 22 लिपिकों को प्रधान लिपिक के पद पर पदोन्नति मिलने को प्रशासनिक ईमानदारी और पारदर्शिता की मिसाल बताया। यह सुनते ही हॉल तालियों से गूंज उठा, मानो वर्षों का इंतजार आज सार्थक हो गया हो।
कर्मदान, रक्तदान और ज्ञानदान ही सच्चा योगदान : डीसी मनीष कुमार
मुख्य अतिथि के रूप में डीसी मनीष कुमार ने कहा कि बेहतर प्रशासन तभी संभव है जब हम लगातार सीखते रहें। कर्मदान, रक्तदान और ज्ञानदान
– ये तीन बातें सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन की बुनियाद हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पाकुड़ की टीम आज जिस लगन और निष्ठा से काम कर रही है, वह किसी भी जिले के लिए उदाहरण है। उनके शब्दों में प्रोत्साहन था, लेकिन साथ ही जिम्मेदारी का भाव भी।
फाइलों के पीछे के चेहरे भी जरूरी हैं
कार्यक्रम के दौरान जब वरिष्ठ अधिकारियों ने सभी कर्मचारियों को एक परिवार की तरह संबोधित किया, तो लगा कि यह सिर्फ एक प्रशासन नहीं, बल्कि एक साथ काम करने वालों का समुदाय है। डीसी ने सभी शाखाओं को फाइल प्रबंधन की चेकलिस्ट बनाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह बात सुनकर कई कर्मचारियों ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया, मानो वे कह रहे हों… “अब बदलाव सचमुच आ रहा है।”
ओंमकार और रामविलास ने संभाली जिम्मेदारी
कार्यक्रम का संचालन ओंमकार कुमार ने सहजता से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रामविलास यादव ने दिया। दोनों की प्रस्तुति में एक अपनापन था, जो यह दिखाता है कि प्रशासनिक कार्यों के बीच भी मानवीय जुड़ाव बना रह सकता है।
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