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Ranchi : “सरकारी योजनाओं का असली मतलब तब है, जब उसका लाभ आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे। गरीब का राशन नहीं रुकना चाहिए और शहरों में काम करने वाले मजदूरों को सस्ता और भरपेट भोजन मिलना चाहिए।” कुछ इसी अंदाज में सीएम हेमंत सोरेन ने खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया। झारखंड मंत्रालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में सीएम ने राशन वितरण व्यवस्था से लेकर दाल-भात केंद्रों, धान खरीद, गोदाम निर्माण और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि गरीब, जरूरतमंद और वंचित वर्ग तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचे। इसके लिए विभाग को तकनीक का अधिक इस्तेमाल करना होगा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाना होगा।
राशन व्यवस्था में लापरवाही नहीं चलेगी
बैठक में सीएम हेमंत सोरेन ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी पीडीएस की स्थिति पर खास जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लाखों परिवार हर महीने मिलने वाले राशन पर निर्भर हैं। ऐसे में वितरण व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि पात्र लाभुकों तक समय पर खाद्यान्न पहुंचे, नए जरूरतमंद परिवारों को राशन कार्ड से जोड़ा जाए और अपात्र लोगों को सूची से हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित कर पूरी व्यवस्था को जवाबदेह बनाया जाए।

शहरों में मजदूरों के लिए बढ़ेंगे दाल-भात केंद्र
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री दाल-भात योजना पर भी चर्चा हुई। सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि पांच रुपये में भरपेट भोजन देने वाली यह योजना गरीबों और मजदूरों के लिए काफी मददगार साबित हुई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के विभिन्न शहरों में ऐसे स्थानों की पहचान की जाए, जहां बड़ी संख्या में श्रमिक और दैनिक मजदूर काम करते हैं। वहां नए दाल-भात केंद्र खोले जाएं ताकि किसी भी मजदूर को भूखे पेट काम न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने मॉडल दाल-भात केंद्र विकसित करने की भी बात कही, जहां साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था और भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
आदिम जनजाति परिवारों तक घर पहुंचता रहे राशन
बैठक में पीवीटीजी डाकिया योजना की भी समीक्षा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले आदिम जनजाति परिवारों तक खाद्यान्न की आपूर्ति लगातार जारी रहनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डोर स्टेप डिलीवरी व्यवस्था में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और हर पात्र परिवार को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।
किसान से सीधे पूछा- समय पर पैसा मिला या नहीं
धान अधिप्राप्ति की समीक्षा के दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने सीधे एक किसान से बात कर जमीनी हकीकत जानने की कोशिश की। उन्होंने कारीमाटी गांव के किसान निगम प्रसाद उपाध्याय से ऑनलाइन बातचीत की। किसान ने बताया कि उन्होंने पैक्स के माध्यम से 160 क्विंटल धान बेचा था और बिक्री के बाद एक ही दिन में भुगतान उनके खाते में पहुंच गया। किसान की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने संतोष जताया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों के भुगतान में कहीं भी अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
गोदाम मजबूत होंगे तो सुरक्षित रहेगा अनाज
सीएम हेमंत सोरेन ने खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने पुराने गोदामों की मरम्मत और नए गोदामों के निर्माण कार्य की जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि गोदामों में अनाज के सुरक्षित रखरखाव की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि खाद्यान्न खराब होने से बचाया जा सके।
हर योजना समय पर पूरी करने का निर्देश
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026-27 की प्रस्तावित योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि सभी योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने सोना-सोवरन धोती-साड़ी वितरण योजना, मुख्यमंत्री नमक वितरण योजना और मुख्यमंत्री दाल-भात योजना जैसी कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री का साफ संदेश था कि सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका लाभ सीधे लोगों तक पहुंचे। यही सरकार की प्राथमिकता है और इसी दिशा में विभाग को पूरी गंभीरता के साथ काम करना होगा।
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