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Garhwa (Nityanand Dubey) : गढ़वा जिले के मेराल प्रखंड के लोगों के लिए राज्य खाद्य निगम का गोदाम सिर्फ अनाज का भंडार नहीं था, बल्कि भूख से लड़ने की एक दीवार थी। इस दीवार में दरार तब पड़ी जब गोदाम का हिसाब खुला… और उसमें से 2765.84 क्विंटल राशन गायब निकला। यह खबर उन ग्रामीणों के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी जो हर महीने अपने हिस्से का अनाज पाने के लिए सरकारी योजना पर निर्भर रहते हैं।
जनसेवक से गुनहगार बनने का सफर
इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को तत्कालीन सहायक गोदाम प्रबंधक सह जनसेवक दीपक कुमार चंचल को गिरफ्तार कर लिया। कभी जनता की सेवा का दायित्व संभालने वाला यह अधिकारी अब उसी जनता के हक के निवाले को डकार मालामाल होने के इल्जाम में जेल भेजा गया है। उसे गढ़वा के जोबरइया स्थित उसके नए आवास से पकड़ा गया। थानेदार विष्णुकांत के अनुसार, दीपक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और ईसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। इल्जाम है कि उसने सरकारी गोदाम से करोड़ों का राशन गबन किया।
94 लाख की वसूली का मामला कोर्ट में लंबित
सीओ यशवंत नायक ने बताया कि इस गबन मामले में करीब 94.03 लाख रुपये की वसूली का मामला कोर्ट में लंबित है। यह रकम प्रति किलो 34 रुपये के हिसाब से तय की गई है। यानी कागज पर जो राशन गरीबों के हिस्से में था, वह किसी और की जेब की खनक बन गया।
एक मामूली जांच ने खोल दिया घोटाले का बड़ा राज
फरवरी में जब गोदाम का प्रभार बदला जा रहा था, तो अचानक अनाज का स्टॉक मेल नहीं खाया। लगभग 3450 क्विंटल का अंतर देखकर तत्कालीन जिला आपूर्ति पदाधिकारी राम गोपाल पांडेय ने जांच शुरू की। जांच में साफ हुआ कि 2765.84 क्विंटल अनाज का कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह सिर्फ कागजों में मौजूद था। डीसी शेखर जमुआर ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए और 4 मार्च को प्राथमिकी दर्ज की गई।
ग्रामीणों की थाली से गायब हुआ हक का निवाला
मेराल के ग्रामीण बताते हैं कि कई महीनों तक उन्हें राशन वितरण में देरी हुई या कम मात्रा में अनाज मिला। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि इसका कारण गोदाम में गबन हो सकता है। गांव के ही एक शख्स ने कहा, “हम तो समझे सरकार से देरी हो रही है, पर अब पता चला कि हमारा हिस्सा ही गायब था।”
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