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Dhanbad : झरिया के पूर्व विधायक और भाजपा नेता संजीव सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या मामले में करीब सात साल से जेल में बंद संजीव सिंह को आज जमानत मिल गई। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
संजीव सिंह 11 अप्रैल 2017 से जेल में बंद थे। उन पर आरोप है कि 21 मार्च 2017 को सरायढेला में पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह और उनके तीन साथियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे झारखंड की राजनीति को हिला दिया था। 23 मार्च 2017 को नीरज सिंह के भाई अभिषेक सिंह ने सरायढेला थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें पिंटू सिंह, मनीष सिंह, महंत पांडेय, गया प्रताप सिंह और अन्य के नाम शामिल थे।
पुलिस जांच के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर तत्कालीन विधायक संजीव सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। तब से वह लगातार जेल में थे।
इस दौरान संजीव सिंह ने जमानत के लिए निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की, जो खारिज हो गई। आखिरकार उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद आज उन्हें जमानत मिल गई।
नीरज सिंह की हत्या का मामला झारखंड की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। नीरज सिंह न केवल धनबाद नगर निगम के पूर्व डिप्टी मेयर थे, बल्कि एक युवा और प्रभावशाली नेता के रूप में भी पहचाने जाते थे। दिनदहाड़े हुई इस घटना में अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया था और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
संजीव सिंह, जो उस समय झरिया से भाजपा विधायक थे, नीरज सिंह के राजनीतिक प्रतिद्वंदी माने जाते थे। हत्या मामले में उनका नाम आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई थी। गिरफ्तारी के बाद से ही वह न्यायिक हिरासत में थे और मुकदमे का सामना कर रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद संजीव सिंह के समर्थकों में खुशी का माहौल है। हालांकि, यह मामला अब भी विचाराधीन है और अदालत में इसकी सुनवाई जारी रहेगी। जमानत मिलने के बावजूद संजीव सिंह को मामले के सभी कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा।
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