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Khagaul/Danapur : दानापुर के पूर्व विधायक और राजद नेता रीतलाल यादव पर संगठित आपराधिक गिरोह चलाने और सरकारी व निजी जमीनों पर कब्जा कर करोड़ों की अवैध संपत्ति जुटाने का आरोप लगा है। यह खुलासा पटना पुलिस की जांच रिपोर्ट में हुआ है। पुलिस ने यह रिपोर्ट ED यानी प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दी है, जिसके आधार पर अब ED पूर्व विधायक के खिलाफ मामला दर्ज करेगी। पुलिस रीतलाल और उनके गिरोह के कई सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है।
सरकारी जमीन पर कब्जे का खुलासा
पुलिस और एसआईटी ने जांच के दौरान पाया कि रीतलाल यादव और उनके सहयोगियों ने दानापुर क्षेत्र में बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन पर कब्जा कर रखा है।
- कोथवां मौजा में 3 एकड़ गैर-मजरुआ सरकारी जमीन पर कब्जा कर लगभग 4000 वर्गफीट की चहारदीवारी खड़ी की गई।
- इसी गांव में उनके स्वर्गीय पिता के नाम पर बनाया गया रामाशीष चौक भी सरकारी भूमि पर बने होने की बात जांच में सामने आई।
- दानापुर इलाके में उनके और उनके रिश्तेदारों के नाम पर कई महंगी जमीनें और फ्लैट मिले हैं।
स्थानीय लोग रीतलाल के प्रभाव और भय के कारण शिकायत दर्ज कराने से कतराते रहे।
सिंडिकेट के जरिए रंगदारी व वसूली
पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व विधायक दानापुर क्षेत्र में जमीन कब्जा करने, रंगदारी वसूलने और धमकाने वाला एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट चलाते हैं। उनके प्रमुख सहयोगियों में टिंकू, विनोद, श्रवण, चिकू, मंटू, सुनील, सन्नी, सिंटू सहित कई अन्य लोग शामिल बताए गए हैं।
50 लाख रंगदारी केस में जेल
बिल्डर कुमार गौरव से 50 लाख रुपये रंगदारी मांगने और नहीं देने पर जान से मारने की धमकी देने के मामले में रीतलाल, उनके भाई पिंकू और अन्य आरोपी जेल में बंद हैं। यह मामला बिल्डर ने 10 अप्रैल 2025 को खगौल थाने में दर्ज कराया था। इसके बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर रीतलाल पर संगठित गिरोह चलाने का एक और केस दर्ज किया गया।
76 डिसमिल जमीन पर 16 दुकानें बनाई
जांच रिपोर्ट के अनुसार, मुस्तफापुर मौजा में सूर्य विहार अपार्टमेंट और देवलोक मंदिर के बीच 76 डिसमिल जमीन पर दबंगई से कब्जा कर 16 दुकानें बनवा दी गईं। इन दुकानों को किराये पर देकर हर महीने सिंटू और सन्नी उर्फ रोहित किराया वसूलते थे। जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद 15 मई 2025 को यह भूमि कब्जामुक्त कराई गई।
ED की कार्रवाई जल्द
पुलिस द्वारा ED को भेजी गई रिपोर्ट के बाद अब रीतलाल यादव की अवैध संपत्तियों और काली कमाई को लेकर केंद्रीय एजेंसी जांच शुरू करने जा रही है। पुलिस का दावा है कि अवैध धन का उपयोग कर गिरोह से जुड़े युवाओं को अपराध करने के लिए उकसाया जाता था।
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