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Ramgarh (Dharmendra Pradhan, Bhurkunda) : 77वें गणतंत्र दिवस की सुबह भुरकुंडा और भदानीनगर थाना परिसर में कुछ अलग ही एहसास लेकर आई। आमतौर पर कानून और अनुशासन की पहचान माने जाने वाले ये परिसर इस दिन बच्चों की हंसी, राष्ट्रगान की स्वर लहरियों और तिरंगे की गरिमा से भर उठे। माहौल ऐसा था, जैसे पुलिस और आम लोगों के बीच की दूरी अपने आप सिमट गई हो।

जब तिरंगे को सलामी देते दिखे कानून के पहरेदार
भुरकुंडा थाना प्रभारी उपेंद्र कुमार ने जैसे ही राष्ट्रीय ध्वज फहराया, पुलिस अधिकारियों और जवानों ने पूरे सम्मान के साथ सलामी दी। राष्ट्रगान के दौरान हर आंख तिरंगे पर टिकी थी। वर्दी में खड़े जवानों के चेहरों पर गर्व साफ झलक रहा था, तो पास खड़े बच्चों के लिए यह पल यादगार बन गया।
थाना, जो घर जैसा लगा
गणतंत्र दिवस के मौके पर थाना परिसर को फूलों और रंग बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था। यह सजावट केवल दिखावे तक सीमित नहीं थी, बल्कि संदेश दे रही थी कि थाना सिर्फ शिकायत दर्ज कराने की जगह नहीं, बल्कि लोगों के साथ खड़े रहने का भरोसेमंद ठिकाना भी है। झंडोत्तोलन के बाद स्कूली बच्चों और आगंतुकों के बीच प्रसाद का वितरण हुआ। बच्चे पुलिस जवानों से घुलते-मिलते दिखे, कुछ ने सवाल पूछे, तो कुछ ने मोबाइल से तस्वीरें भी खींचीं।

देशभक्ति में एक साथ गूंजे स्वर
स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों द्वारा सामूहिक रूप से राष्ट्रगान की प्रस्तुति ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया। कुछ पल के लिए ऐसा लगा मानो पूरा इलाका एक ही धड़कन के साथ देश के प्रति अपनी आस्था जता रहा हो।
भदानीनगर ओपी में संविधान का संदेश
भदानीनगर ओपी परिसर में ओपी प्रभारी अख्तर अली ने तिरंगा फहराया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ संविधान ही हमारी लोकतांत्रिक ताकत की नींव है। इसी संविधान ने नागरिकों को बोलने, सोचने और अपने अधिकार रखने की आजादी दी है। उन्होंने लोगों से संविधान का सम्मान करने और देश की तरक्की में सहयोग करने की अपील की।
एक दिन, जो भरोसा मजबूत कर गया
यह गणतंत्र दिवस सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। यह पुलिस और समाज के बीच विश्वास को मजबूत करने का अवसर भी बना। जब बच्चे तिरंगे के नीचे मुस्कुरा रहे थे और जवान गर्व से सलामी दे रहे थे, तब यह साफ दिखा कि संविधान की आत्मा सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि ऐसे ही छोटे-छोटे मानवीय पलों में जीवित रहती है।
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