अपनी मनपसंद भाषा में पढ़ें :
News Samvad : बारिश का मौसम शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में सांप निकलने और सांप के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। जलभराव, खेतों में काम करने और घरों में पानी घुसने के दौरान लोगों का सांपों से सामना होने का खतरा ज्यादा रहता है। सांप के काटने के बाद समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। कई बार सरकारी अस्पताल में तुरंत इलाज नहीं मिल पाता, ऐसे में मरीजों को निजी अस्पताल का रुख करना पड़ता है। निजी अस्पताल में इलाज का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है। ऐसे में लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि अगर सांप काट ले तो क्या इलाज का खर्च हेल्थ इंश्योरेंस से मिल सकता है? अगर सांप के काटने से किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो क्या परिवार को जीवन बीमा या टर्म इंश्योरेंस का लाभ मिलेगा? बीमा विशेषज्ञों के मुताबिक, कई मामलों में इन सवालों का जवाब हां है, लेकिन अंतिम फैसला पॉलिसी की शर्तों और कवरेज पर निर्भर करता है।
हेल्थ इंश्योरेंस में सांप के काटने का इलाज कवर हो सकता है
बीमा विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में सांप के काटने जैसी अचानक हुई दुर्घटना के इलाज को कवर किया जाता है। अगर सांप के काटने के बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, तो अस्पताल में भर्ती होने का खर्च, डॉक्टर की फीस, जांच, दवाइयां और इलाज से जुड़े अन्य खर्च पॉलिसी के नियमों के तहत कवर हो सकते हैं। कई मामलों में मरीज को एंटीवेनम इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। अगर यह इलाज अस्पताल में भर्ती होकर कराया जाता है, तो इसका खर्च भी पॉलिसी के कवरेज के अनुसार बीमा कंपनी उठा सकती है। मरीज की हालत गंभीर होने पर आईसीयू में भर्ती करना पड़े तो आईसीयू का खर्च भी पॉलिसी की सीमा और नियमों के तहत कवर किया जा सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर पॉलिसी के नियम अलग होते हैं। कुछ पॉलिसियों में अस्पताल में भर्ती होने की न्यूनतम अवधि, कमरे का किराया, इलाज की अधिकतम सीमा और अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं। इसलिए इलाज कराने से पहले या पॉलिसी खरीदते समय इन बातों को ध्यान से समझना जरूरी है।
क्या सांप के काटने पर वेटिंग पीरियड लागू होता है?
सांप का काटना एक अचानक हुई दुर्घटना मानी जाती है। आमतौर पर दुर्घटना से जुड़े इलाज पर बीमारी जैसी लंबी वेटिंग पीरियड की शर्त लागू नहीं होती। लेकिन पॉलिसी में दुर्घटना संबंधी कवरेज किस तरह दिया गया है, यह जरूर देखना चाहिए। अगर पॉलिसी एक्टिव है और उसमें ऐसी दुर्घटनाओं से जुड़े इलाज का कवरेज शामिल है, तो मरीज को इलाज का खर्च मिल सकता है। कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध होने पर बीमा कंपनी के नेटवर्क अस्पताल में सीधे इलाज भी कराया जा सकता है। अगर अस्पताल नेटवर्क में नहीं है, तो कई मामलों में पहले खुद भुगतान करके बाद में रीइंबर्समेंट का दावा किया जा सकता है।
सांप के काटने से मौत होने पर क्या मिलेगा जीवन बीमा का लाभ?
अगर सांप के काटने से किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो कई जीवन बीमा पॉलिसियों में इसे आकस्मिक या दुर्घटनाजन्य मृत्यु माना जाता है। ऐसी स्थिति में नामित व्यक्ति यानी नॉमिनी बीमा राशि के लिए दावा कर सकता है। टर्म इंश्योरेंस में भी सांप के काटने से हुई मौत पर आमतौर पर दावा किया जा सकता है, बशर्ते पॉलिसी चालू हो और उसकी सभी शर्तें पूरी होती हों। अगर पॉलिसी में दुर्घटना मृत्यु लाभ भी शामिल है, तो कुछ मामलों में बेस कवर के अलावा अतिरिक्त राशि का लाभ भी मिल सकता है। हालांकि, बीमा कंपनी दावा स्वीकार करने से पहले मौत के कारणों की जांच करती है। इसलिए यह साबित होना जरूरी होता है कि मौत वास्तव में सांप के काटने के कारण हुई है।
इन दस्तावेजों को संभालकर रखना बेहद जरूरी
सांप के काटने से मौत के मामले में बीमा क्लेम के लिए कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है। इनमें अस्पताल की रिपोर्ट, डॉक्टर का प्रमाण पत्र, इलाज से जुड़े दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस रिपोर्ट और मृत्यु प्रमाण पत्र शामिल हो सकते हैं। बीमा कंपनी मामले की परिस्थितियों और मौत के कारणों का सत्यापन कर सकती है। इसलिए परिवार को इलाज और घटना से जुड़े सभी दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए। दस्तावेजों की कमी होने पर क्लेम की प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
राज्य सरकार से भी मिल सकती है आर्थिक सहायता
सांप के काटने से होने वाली मौत के मामलों में कुछ राज्य सरकारों की ओर से भी आर्थिक सहायता का प्रावधान होता है। यह सहायता राज्य की आपदा राहत नीति और स्थानीय नियमों के अनुसार दी जा सकती है। इसके लिए मृतक के परिवार को संबंधित प्रशासनिक कार्यालय में आवेदन करना पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में परिवार को केवल बीमा कंपनी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। जिला प्रशासन, राजस्व विभाग या संबंधित सरकारी कार्यालय से भी जानकारी लेनी चाहिए कि सरकार की ओर से किसी तरह की आर्थिक सहायता का प्रावधान है या नहीं।
पॉलिसी खरीदने से पहले इन बातों को जरूर समझें
बीमा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी इंश्योरेंस पॉलिसी का लाभ उसकी शर्तों पर निर्भर करता है। इसलिए हेल्थ, लाइफ या टर्म इंश्योरेंस खरीदते समय सिर्फ प्रीमियम देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पॉलिसी में दुर्घटना से जुड़े इलाज, अस्पताल में भर्ती, आईसीयू, एंटीवेनम जैसी दवाओं और दुर्घटनाजन्य मृत्यु के कवरेज की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। पॉलिसी के दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ना और जरूरत पड़ने पर बीमा एजेंट या कंपनी से लिखित जानकारी लेना भी फायदेमंद रहता है। बारिश के मौसम में सांप के काटने जैसी आपात स्थिति किसी के साथ भी हो सकती है। ऐसे समय में सबसे पहले मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। इसके बाद इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर हेल्थ इंश्योरेंस या जीवन बीमा का दावा करने में परेशानी न हो।
इसे भी पढ़ें : NEET पेपर लीक विवाद के बीच, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी हटाए गए

