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News Samvad : बदरीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी का मामला अब उत्तराखंड की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। मामले के सामने आने के करीब पांच दिन बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया है। प्रारंभिक जांच में चढ़ावे में गड़बड़ी के संकेत मिलने के बाद यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही सरकार और मंदिर समिति दोनों पर पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।बीकेटीसी की ओर से बताया गया कि प्रमोद नौटियाल को पहले 3 जुलाई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह माना गया कि उनके पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। हालांकि, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि नौटियाल उनके पर्सनल सेक्रेटरी नहीं, बल्कि मंदिर समिति के कर्मचारी थे।
मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जांच समिति को 15 दिनों के भीतर पूरी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।बदरीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने इस मुद्दे को लेकर मौन धरना दिया और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अयोध्या के बाद अब बदरीनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल पर चढ़ावे में गड़बड़ी की खबर आना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे।बुटोला ने दावा किया कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों की शह के बिना इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव नहीं है। उन्होंने कपाट खुलने के दिन से अब तक की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की भी मांग की। उनका कहना है कि इससे वीआईपी दर्शन और चढ़ावे से जुड़े पूरे लेनदेन की तस्वीर सामने आ सकती है।
मायावती ने की एसआईटी जांच की मांग
अब इस विवाद में बसपा प्रमुख मायावती भी कूद पड़ी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर अयोध्या और बदरीनाथ दोनों मामलों की एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मायावती ने कहा कि धर्म स्थलों के मुख्य प्रबंधकों की भूमिका की भी गहराई से जांच होनी चाहिए, क्योंकि आम चर्चा है कि निचले स्तर पर हुई गड़बड़ियों में या तो उनकी मिलीभगत रही है या फिर गंभीर लापरवाही हुई है।
बीकेटीसी अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग तेज
उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने भी बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की है। कांग्रेस का आरोप है कि दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने मंदिर में चढ़े सोना-चांदी और अन्य दान का सार्वजनिक लेखा-जोखा जारी करने, सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने और वर्तमान जांच समिति की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं।कांग्रेस ने घोषणा की है कि राज्यभर में उपवास और सत्याग्रह कर मंदिरों में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई जाएगी। फिलहाल सभी की नजर 15 दिनों में आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यह रिपोर्ट तय करेगी कि कथित चढ़ावा चोरी का मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

