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News Samvad : देश में सोना और चांदी की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। बाजार में तेजी इतनी तेज है कि एक ही दिन में चांदी करीब 18 हजार रुपये प्रति किलो महंगी हो गई, जबकि सोने के दाम में भी 9 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम तक की छलांग देखने को मिली। बढ़ती कीमतों ने आम खरीदारों के साथ-साथ ज्वेलरी कारोबारियों की भी चिंता बढ़ा दी है।इस समय चांदी की कीमत करीब 3 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच चुकी है। वहीं 24 कैरेट सोना औसतन 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा है। 22 कैरेट सोना 1,45,160 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना 1,20,500 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।
हैदराबाद में क्या हैं ताजा रेट
हैदराबाद के बाजार में भी सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर बनी हुई हैं।
- 24 कैरेट सोना: ₹16,398 प्रति ग्राम
- 22 कैरेट सोना: ₹14,515 per ग्राम
- 18 कैरेट सोना: ₹12,305 प्रति ग्राम
अलग-अलग शहरों में टैक्स और स्थानीय डिमांड के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं सोने-चांदी के दाम
सोना और चांदी महंगे होने के पीछे कई बड़ी वजहें हैं। सबसे बड़ा कारण भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर के बीच लगातार हो रहा उतार-चढ़ाव माना जा रहा है। डॉलर मजबूत होने से आयात महंगा हो जाता है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मांग और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी कीमतों को ऊपर पहुंचा दिया है। निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।सरकार की ओर से आयात शुल्क बढ़ाए जाने का असर भी अब बाजार में साफ दिखाई देने लगा है।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना से बढ़ी चिंता
वित्त मंत्रालय ने 13 मई से सामाजिक कल्याण अधिभार यानी एसडब्ल्यूएस और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर यानी एआईडीसी में बढ़ोतरी की है। इसके बाद सोने पर कुल सीमा शुल्क बढ़कर 15 प्रतिशत हो गया है।सरकार का कहना है कि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने और आयात खर्च को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी विदेशी मुद्रा बचाने के लिए लोगों से फिलहाल सोने की खरीद और विदेश यात्रा टालने की अपील की है।
विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दबाव
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था, लेकिन एक मई को समाप्त सप्ताह में यह घटकर 690 अरब डॉलर रह गया।विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल और अन्य आयात महंगे हुए हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है। यही वजह है कि सरकार आयात पर नियंत्रण की कोशिश कर रही है।
ज्वेलरी कारोबारियों की बढ़ी मुश्किल
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी काउंसिल यानी जीजेसी ने सरकार के फैसले पर चिंता जताई है। जीजेसी के अध्यक्ष राजेश रोकड़े का कहना है कि आयात शुल्क बढ़ने से ज्वेलरी कारोबार मुश्किल हो जाएगा और इससे अवैध बाजार को बढ़ावा मिल सकता है।उनके मुताबिक पहले सोने पर टैक्स और शुल्क मिलाकर करीब 13,500 रुपये प्रति 10 ग्राम अतिरिक्त खर्च आता था, जो अब बढ़कर लगभग 27,000 रुपये तक पहुंच सकता है।उन्होंने आशंका जताई कि इससे तस्करी बढ़ सकती है और समानांतर बाजार खड़ा होने का खतरा भी पैदा हो सकता है।
हल्के गहनों की तरफ बढ़ सकते हैं ग्राहक
सेन्को गोल्ड एंड डायमंड्स के एमडी और सीईओ सुवंकर सेन का मानना है कि पश्चिम एशिया संकट खत्म होने तक सोने की कीमतों में बड़ी राहत मिलना मुश्किल है।उनका कहना है कि अगले एक साल तक कीमतें इसी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। हालांकि खरीदारी की मात्रा कम हो सकती है, क्योंकि लोग अब भारी गहनों की जगह हल्के वजन वाले आभूषण खरीदना पसंद करेंगे।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सोने का आयात
भारत का सोने का आयात 2025-26 में 24 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात में 4.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 721.03 टन रहा।इससे साफ है कि सोना कम मात्रा में आया, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण कुल आयात बिल काफी बढ़ गया।

