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News Samvad : भारत की विमानन कंपनियों के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती यात्रियों को लुभाने की नहीं, बल्कि बढ़ते खर्च को संभालने की है। महंगा विमान ईंधन, कमजोर होता रुपया और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने एयरलाइंस की कमाई पर ऐसा दबाव बनाया है कि अब चालू वित्त वर्ष में रिकॉर्ड 38 हजार करोड़ रुपये तक के घाटे का अनुमान लगाया गया है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की नई रिपोर्ट ने पूरे एविएशन सेक्टर की चिंता बढ़ा दी है।
महंगा ईंधन और कमजोर रुपया बना सबसे बड़ा सिरदर्द
भारत का एविएशन सेक्टर पहले से ही लागत बढ़ने की मार झेल रहा था, लेकिन अब हालात और मुश्किल हो गए हैं। आईसीआरए ने वित्त वर्ष 2027 के लिए घरेलू एयरलाइंस के शुद्ध घाटे का अनुमान बढ़ाकर 36 हजार से 38 हजार करोड़ रुपये कर दिया है। इससे पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि बेहतर यात्री संख्या के कारण घाटा घटकर 11 से 12 हजार करोड़ रुपये तक रह जाएगा, लेकिन बदले हालात ने पूरा अनुमान बदल दिया।
तीन वजहों ने बिगाड़ा पूरा गणित
एयरलाइंस के बढ़ते घाटे के पीछे कई कारण हैं, लेकिन तीन वजहें सबसे अहम मानी जा रही हैं।
पहली वजह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी है। ज्यादातर विमान लीज पर लिए जाते हैं और उनका भुगतान डॉलर में होता है। ऐसे में रुपया कमजोर पड़ने से कंपनियों का खर्च तेजी से बढ़ गया है।
दूसरी वजह नए विमानों की लगातार डिलीवरी है। बेड़े का विस्तार तो हो रहा है, लेकिन इसके साथ लीज रेंट का बोझ भी बढ़ता जा रहा है।
तीसरी वजह परिचालन लागत और टिकट किराये के बीच का असंतुलन है। एयरलाइंस का खर्च बढ़ रहा है, लेकिन वे उतनी तेजी से टिकट महंगे नहीं कर पा रही हैं क्योंकि इससे यात्रियों की संख्या घट सकती है।
पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई परेशानी
फरवरी 2026 के आखिर से पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का सीधा असर विमानन उद्योग पर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से जेट फ्यूल यानी एटीएफ महंगा हो गया। इसका असर एयरलाइंस की लागत पर साफ दिखाई दे रहा है।दूसरी ओर, महंगाई बढ़ने से लोग गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं। इसका असर हवाई यात्रा की मांग पर भी पड़ रहा है। कई यात्रियों ने अपनी यात्रा योजनाएं टाल दी हैं।
यात्रियों की संख्या बढ़ने का अनुमान भी घटा
आईसीआरए ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के यात्री यातायात के अनुमान में कटौती की है।घरेलू उड़ानों में पहले 6 से 8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान था, जिसे अब घटाकर 3 से 6 प्रतिशत कर दिया गया है।अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण दिख रही है। पश्चिम एशिया संकट के चलते अप्रैल 2026 में भारतीय एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में सालाना आधार पर 39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद पूरे वित्त वर्ष के लिए वृद्धि का अनुमान भी 8 से 10 प्रतिशत से घटाकर सिर्फ 0 से 3 प्रतिशत कर दिया गया है।हालांकि मई 2026 में घरेलू यात्री संख्या 11.3 प्रतिशत बढ़कर 1.56 करोड़ रही और पैसेंजर लोड फैक्टर भी 88.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ एक महीने के बेहतर आंकड़े पूरे साल की तस्वीर नहीं बदल सकते।
जेट फ्यूल लगातार महंगा बना हुआ है
विमानन उद्योग में सबसे बड़ा खर्च एटीएफ का होता है। जून 2026 में एटीएफ की कीमतों में महीने के हिसाब से बदलाव नहीं हुआ, लेकिन सालाना आधार पर यह करीब 27 प्रतिशत अधिक रही। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी विमान ईंधन की कीमतें पिछले साल के मुकाबले लगभग 23 प्रतिशत ज्यादा बनी हुई हैं।
क्या यात्रियों को और महंगे टिकट खरीदने पड़ेंगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस लगातार बढ़ती लागत का पूरा बोझ खुद नहीं उठा सकतीं। ऐसे में आने वाले महीनों में कई रूटों पर टिकट किरायों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि कंपनियां प्रतिस्पर्धा के कारण हर रूट पर एक साथ किराया नहीं बढ़ाएंगी, लेकिन जहां मांग ज्यादा होगी वहां यात्रियों को महंगा टिकट खरीदना पड़ सकता है।
आगे की राह आसान नहीं
भारतीय एविएशन सेक्टर इस समय दोहरी चुनौती से जूझ रहा है। एक तरफ ईंधन, लीज और विदेशी मुद्रा से जुड़ा खर्च लगातार बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ यात्रियों की मांग अपेक्षा के अनुसार नहीं बढ़ रही। ऐसे में एयरलाइंस के लिए रिकॉर्ड घाटे से बाहर निकलना आसान नहीं होगा। अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में हवाई सफर पहले से ज्यादा महंगा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
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