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Ramgarh (Dharmendra Pradhan, Bhurkunda) : रामगढ़ के भुरकुंडा का थाना मैदान चौक आज कुछ अलग ही नजर आ रहा था। चेहरे पर उत्साह, हाथों में झंडे और आंखों में एक साथ आगे बढ़ने का भरोसा। मौका था वैश्य सद्भावना महासम्मेलन का, जहां समाज के लोग सिर्फ भाषण सुनने नहीं, बल्कि एक दूसरे का हौसला बनने पहुंचे थे।
शोभायात्रा बनी पहचान का प्रतीक
सुबह थाना मैदान चौक से उत्सव मैरेज हॉल तक निकली शोभायात्रा में बुजुर्गों की चाल में अनुभव था तो युवाओं के कदमों में ऊर्जा। महिलाएं और बच्चे भी पूरे मन से शामिल हुए। रास्ते भर एक ही बात सुनाई दे रही थी कि समाज तब मजबूत होता है, जब लोग साथ खड़े होते हैं।
श्रद्धा और सम्मान से हुई शुरुआत
कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही माहौल गंभीर और सम्मानपूर्ण हो गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। दीप प्रज्वलन के साथ महासम्मेलन की शुरुआत हुई। यह पल कई लोगों के लिए भावुक करने वाला था, क्योंकि यहां सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि साझा पहचान का अहसास था।
संगठन की कहानी, समाज की जुबानी
वरीय उपाध्यक्ष संजीव चौधरी और संगठन सचिव अनिल वैश्य ने स्वागत भाषण में मोर्चा की गतिविधियों और उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे छोटे छोटे प्रयासों से समाज के लोगों को जोड़ने का काम किया गया। कई श्रोता सिर हिलाकर सहमति जताते दिखे, जैसे वे खुद इस सफर का हिस्सा हों।

एकजुटता का भरोसा
केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहू ने मंच से कहा कि समाज की असली ताकत उसकी एकता में है। उन्होंने आने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए सभी से संगठन के साथ जुड़े रहने की अपील की। उनके शब्दों में अनुभव भी था और भविष्य की चिंता भी।
मंच से उठी सामूहिक आवाज
अशोक गुप्ता, राजकुमार केसरी, महेंद्र प्रसाद, कृष्णदेव प्रसाद, गजाधर, दिलेश्वर मंडल, लक्ष्मण साहू, अरविंद कुमार, रोहित साव और लखन अग्रवाल ने अपने विचार रखते हुए सामाजिक एकजुटता को समय की जरूरत बताया। हर वक्ता की बात में कहीं न कहीं आम आदमी की चिंता झलक रही थी।
साथ होने का भरोसा
कार्यक्रम के अंत में जब लोग एक दूसरे से हाथ मिलाकर विदा ले रहे थे, तब यह साफ था कि यह सिर्फ एक सम्मेलन नहीं था। यह भरोसा था कि जरूरत पड़ने पर समाज एक दूसरे के साथ खड़ा रहेगा। भुरकुंडा की इस शाम ने वैश्य समाज को एक नई उम्मीद और साझा संकल्प देकर विदा किया।
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