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Ramgarh (Dharmendra Pradhan) : रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड की कटिया बस्ती इन दिनों कुछ अलग ही रंग में रंगी है। रोजमर्रा की भागदौड़, कामकाज और चिंता के बीच यहां के लोग पिछले कई दिनों से एक ही तैयारी में जुटे थे। सोमवार को जब सात दिवसीय श्रीश्री 1008 रुद्र महायज्ञ और भगवान शिव परिवार की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठा की शुरुआत कलश जलयात्रा के साथ हुई, तो लगा जैसे पूरे गांव ने एक साथ सांस ली हो।
पीले वस्त्रों में सजी आस्था
सुबह की हल्की धूप में पीले वस्त्र पहने महिलाएं सिर पर कलश रखे कतारबद्ध चल रही थीं। किसी के साथ उसकी छोटी बेटी थी, तो कोई अपनी बुजुर्ग सास का हाथ थामे आगे बढ़ रही थी। ढोल-नगाड़ों की थाप और “हर हर महादेव” के जयकारों के बीच माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया। गांव की बुजुर्ग कांति देवी कहती हैं, “ऐसा आयोजन बरसों बाद हो रहा है। लगता है जैसे पूरा गांव एक परिवार बन गया है।” सच भी है, यहां हर घर से कोई न कोई इस आयोजन में अपनी भूमिका निभा रहा है।
विधायक रोशन लाल चौधरी भी बने सहभागी
कलश जलयात्रा में विधायक रोशन लाल चौधरी भी शामिल हुए। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ कदम मिलाया और कलश उठाकर उत्साह बढ़ाया। लोगों ने इसे औपचारिक उपस्थिति से ज्यादा सहभागिता के रूप में देखा। विधायक ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने का काम करते हैं।

मंत्रोच्चारण से गूंजा वातावरण
यज्ञाचार्य रामप्रवेश उपाध्याय जी महाराज ने वैदिक मंत्रों के साथ विधिवत अनुष्ठान की शुरुआत कराई। मंत्रों की गूंज के बीच श्रद्धालु आंखें बंद कर प्रार्थना में लीन दिखे। बच्चों के लिए यह एक नया अनुभव था। वे उत्सुकता से सब देख रहे थे और बड़ों से सवाल पूछ रहे थे। यजमान के रूप में कई स्थानीय परिवारों ने जिम्मेदारी संभाली है। उनके लिए यह केवल धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए परंपरा को आगे बढ़ाने का मौका भी है।
तैयारी में झलकी सामूहिक मेहनत
इस आयोजन की तैयारी पिछले कई हफ्तों से चल रही थी। पंडाल सजाने से लेकर श्रद्धालुओं के लिए पानी और प्रसाद की व्यवस्था तक, हर काम में गांव के युवाओं और महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पंचायत प्रतिनिधि और यज्ञ समिति के सदस्य लगातार समन्वय में जुटे रहे। किसी ने चंदा जुटाया, किसी ने श्रमदान किया, तो किसी ने अपने घर का आंगन मेहमानों के लिए खोल दिया। यही वजह है कि यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल का भी अवसर बन गया है।
सात दिनों तक रहेगा आध्यात्मिक माहौल
दामोदर गिरी महाराज के मार्गदर्शन में चल रहे इस महायज्ञ में प्रतिदिन हवन, पूजा, भजन-कीर्तन और प्रवचन का कार्यक्रम होगा। वाराणसी से आए यज्ञाचार्य और प्रयागराज से पहुंचे प्रवचनकर्ता श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश देंगे। गांव के युवाओं का कहना है कि ऐसे आयोजन से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका मिलता है। वहीं बुजुर्गों को संतोष है कि परंपरा अभी जीवित है।
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