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Hazaribagh (Badkagaon) : सुबह से ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हलचल थी। कोई पर्ची संभाल रहा था, कोई अपनी जांच रिपोर्ट। कई चेहरे थके हुए थे, लेकिन आंखों में एक उम्मीद साफ दिख रही थी। मंगलवार को यहां अदाणी फाउंडेशन की ओर से टीबी मरीजों के लिए पोषण किट वितरण शिविर लगाया गया, जहां 80 मरीजों को ‘नई ताकत’ यानी पोषण किट दी गई। इनमें से कई ऐसे थे जो महीनों से दवा ले रहे हैं। लेकिन दवा के साथ सही खाना जुटा पाना उनके लिए आसान नहीं रहा।
“दवा तो मिल जाती है, अच्छा खाना मुश्किल होता है”
पिछले तीन महीने से टीबी का इलाज करा रही हैं 32 साल की एक महिला कहती हैं, “सरकारी अस्पताल से दवा मिल जाती है, लेकिन डॉक्टर जो खाने को कहते हैं, वह रोज जुटा पाना मुश्किल होता है। घर की हालत ठीक नहीं है।” उनके पति दिहाड़ी मजदूर हैं। कई दिन काम नहीं मिलता। ऐसे में दूध, फल या अंडा रोज खरीदना संभव नहीं हो पाता। किट मिलने के बाद उनके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। उन्होंने हौले से कहा- अब कुछ दिन तो चिंता कम रहेगी। ऐसी कहानियां वहां मौजूद कई मरीजों की थीं। बीमारी से ज्यादा उन्हें कमजोरी और आर्थिक तंगी परेशान कर रही थी।

डॉक्टरों ने समझाया, इलाज आधा नहीं छोड़ें
कार्यक्रम में मौजूद चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अंजू प्रभा ने मरीजों से सीधे बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि टीबी पूरी तरह ठीक हो सकती है, बशर्ते दवा नियमित ली जाए और बीच में छोड़ी न जाए। उन्होंने बताया कि कई मरीज कुछ हफ्तों में थोड़ा बेहतर महसूस करने लगते हैं और दवा बंद कर देते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। इससे बीमारी दोबारा गंभीर रूप ले सकती है। डॉ. प्रभा ने यह भी समझाया कि पौष्टिक खाना शरीर को ताकत देता है और दवा का असर बेहतर करता है। दाल, हरी सब्जी, अंडा, दूध और मौसमी फल जितना संभव हो, खाने की कोशिश करनी चाहिए।

सिर्फ किट नहीं, जागरूकता भी
शिविर में मरीजों को टीबी से जुड़ी जानकारी वाले पर्चे भी दिए गए। इनमें लक्षण, बचाव और खानपान से जुड़ी सलाह आसान भाषा में लिखी गई है। स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा कि परिवार के लोग भी इन बातों को समझें। टीबी छूने से नहीं, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलती है। सही इलाज और सावधानी से इसे रोका जा सकता है।
अगला शिविर 17 मार्च को
कार्यक्रम के अंत में बताया गया कि इस चरण का अंतिम शिविर 17 मार्च 2026 को लगाया जाएगा। मरीजों से समय पर आने और जांच कराते रहने की अपील की गई।
बीमारी से लड़ाई में साथ खड़ा समाज
अदाणी फाउंडेशन की ओर से बड़कागांव क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका से जुड़े कई काम किए जा रहे हैं। लेकिन इस शिविर में जो बात सबसे ज्यादा दिखी, वह थी मानवीय जुड़ाव। कई मरीजों ने कहा कि उन्हें सिर्फ राशन नहीं, बल्कि यह एहसास मिला कि वे अकेले नहीं हैं।

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