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Palamu : पलामू कचहरी परिसर में शनिवार की सुबह कुछ अलग थी। हाथों में तख्तियां, आंखों में सवाल और दिलों में भविष्य की चिंता लिए छात्र एक-एक कर जमा हो रहे थे। कोई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है, तो कोई छात्रवृत्ति के भरोसे अपनी पढ़ाई आगे बढ़ा रहा है। इन सभी को जोड़ने वाली एक ही बात थी, अनिश्चितता। छात्रहित सर्वोपरि मंच, झारखंड के बैनर तले छात्र आज सिर्फ मांगें नहीं रख रहे थे, बल्कि अपने सपनों की कहानी सुना रहे थे।
परीक्षा आधारित बहाली की मांग
पलामू जिले में फोर्थ ग्रेड बहाली को लेकर छात्रों के मन में लंबे समय से असमंजस है। मंच से उठती आवाज यही थी कि बहाली पूरी तरह परीक्षा आधारित हो। छात्रों का कहना है कि परीक्षा ही वह माध्यम है, जिससे मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिल सकता है। एक छात्र ने बताया, “हम सालों से पढ़ाई कर रहे हैं। अगर चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तो हमारी मेहनत का कोई मोल नहीं रहेगा।”
छात्रवृत्ति की देरी, पढ़ाई पर सीधा असर
प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों की आंखों में चिंता झलक रही थी। कारण है, लगभग दो वर्षों से लंबित छात्रवृत्ति। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए यह छात्रवृत्ति सिर्फ सहायता नहीं, बल्कि पढ़ाई जारी रखने का सहारा है। एक छात्रा ने कहा, “कॉलेज की फीस, किताबें, रहने का खर्च, सब कुछ इसी छात्रवृत्ति से चलता है। जब पैसा नहीं आता, तो घर वालों पर बोझ बढ़ जाता है।” कुछ छात्रों ने यह भी बताया कि कई साथी पढ़ाई छोड़ने के कगार पर हैं।
नेतृत्व जो छात्रों की बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा
इस पूरे आंदोलन को दिशा देने में छात्रहित सर्वोपरि मंच का प्रदेश नेतृत्व सक्रिय रूप से मौजूद रहा। प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार राणा ने कहा कि छात्र सिर्फ अधिकार मांग रहे हैं, कोई विशेष लाभ नहीं। प्रदेश उपाध्यक्ष आमिर हमज़ा ने कहा कि छात्रों की समस्याएं अब और नजरअंदाज नहीं की जानी चाहिए। प्रदेश संगठन प्रभारी कुणाल पोद्दार ने आंदोलन को मजबूत और संगठित रूप देने की बात कही। प्रदेश सचिव रईस अंसारी ने प्रशासनिक स्तर पर संवाद को तेज करने की जरूरत बताई।
जिला स्तर पर एकजुटता की मिसाल
पलामू जिले में इस कार्यक्रम का नेतृत्व जिला अध्यक्ष दीपू कुमार और जिला सचिव सचिन सिंह ने किया। उनके नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र एकजुट हुए और अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखी। छात्रों का कहना था कि यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने भविष्य के पक्ष में है।
समाधान नहीं मिला तो और तेज होगा संघर्ष
छात्रहित सर्वोपरि मंच ने साफ किया कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और व्यापक होगा। छात्रों ने कहा कि वे पढ़ाई छोड़ना नहीं चाहते, बल्कि सम्मान और न्याय के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।
एक सवाल जो अब भी कायम है
कचहरी परिसर से लौटते छात्रों के कदम धीमे थे, लेकिन आवाज मजबूत। सवाल यही है कि क्या छात्रों की यह आवाज समय रहते सुनी जाएगी, या फिर सपनों की यह फाइल भी किसी दफ्तर की अलमारी में धूल खाती रह जाएगी।
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