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Ranchi : सुबह-सुबह किसी कॉलोनी की गली में टहलते हुए अक्सर हम बुज़ुर्गों को छड़ी का सहारा लेते देखते हैं। कई बार कोई हल्की ठोकर भी उन्हें गिरा देती है। उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें महीनों तक बिस्तर पर रहना पड़ता है। यही चिंता आज हर घर की है… उम्र बढ़ रही है, लेकिन सेहत कैसे संभाली जाए? इसी सवाल का जवाब खोजने के लिए आज रांची के होटल चाणक्य बीएनआर में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर एक बड़ा कार्यक्रम हुआ। इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथैरेपिस्ट्स (IAP) झारखंड ब्रांच और मेडिका मणिपाल हॉस्पिटल के तत्वावधान में आयोजित इस सीएमई का थीम था… “हेल्दी एजिंग विद ए फोकस ऑन प्रिवेंटिंग फ्रेल्टी एंड फॉल्स।”

जब डॉक्टरों ने कही दिल छू लेने वाली बातें
सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. अजीत कुमार ने कहा… गिरने से बुज़ुर्गों में होने वाला कूल्हे का फ्रैक्चर सिर्फ हड्डी का दर्द नहीं, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता छीन लेता है। फिजियोथेरेपी उन्हें फिर से खड़ा करने की ताक़त देती है।
वहीं सीनियर फिजिशियन व कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एचडी शरण ने उदाहरण देते हुए कहा कि रांची में हर साल कई बुज़ुर्ग सिर्फ गिरने की वजह से लंबे इलाज में चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते व्यायाम और फिजियोथेरेपी अपनाई जाए तो इन हादसों से बचा जा सकता है।

फिजियोथेरेपी : बिना दवा का इलाज
आईएपी झारखंड के सदस्य डॉ. अभय पांडेय ने इसे सबसे आसान भाषा में समझाया। उन्होंने कहा… फिजियोथेरेपी दवा का विकल्प नहीं, बल्कि शरीर को दवा की ज़रूरत से दूर रखने का तरीका है। इसमें साइड इफेक्ट नहीं होते और मरीज को धीरे-धीरे उसकी सामान्य जिंदगी में लौटाया जाता है।
फिजियोथेरेपी काउंसिल बनने से इस क्षेत्र में अनुशासन आया
आईएपी के सचिव डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि अब झारखंड में फिजियोथेरेपी काउंसिल बनने से इस क्षेत्र में अनुशासन आया है। जो भी चिकित्सक प्रैक्टिस करना चाहते हैं, उन्हें काउंसिल से रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। इससे मरीजों को भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण सेवा मिलेगी।
जब 100 से ज़्यादा डॉक्टर मिले एक मंच पर
इस कार्यक्रम में राज्यभर से 100 से अधिक फिजियोथेरेपिस्ट जुटे। किसी ने बुज़ुर्ग मरीजों के अनुभव साझा किए तो किसी ने नए रिसर्च और तकनीकों की चर्चा की। माहौल सिर्फ औपचारिक नहीं था, बल्कि ऐसा लग रहा था जैसे हर डॉक्टर अपने घर के किसी बुज़ुर्ग की चिंता कर रहा हो। IAP से जुड़े वरिष्ठ डॉक्टरों में डॉ. उमा सेन गुप्ता, डॉ. दिनेश ठाकुर, डॉ. गौतम लाल, डॉ. गोपाल, डॉ. संध्या, डॉ. धर्मेंद्र और कई अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे। मणिपाल अस्पताल से भी डॉ. श्याम देव कुमार, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. नैयर आलम, डॉ. द्रौपदी और डॉ. मुकुंद ने भाग लिया। हर साल 8 सितंबर को दुनिया भर में वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे मनाया जाता है। रांची का यह कार्यक्रम सिर्फ डॉक्टरों की बैठक नहीं थी, बल्कि उस सोच की झलक थी जिसमें हर बुज़ुर्ग के चेहरे पर मुस्कान लौटाने की इच्छा छिपी है।

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